इन 10 कारणों से जल्दी आता है बुढ़ापा, महिला हो या पुरुष ना करें नजर अंदाज

कल्याण आयुर्वेद- आजकल के व्यस्त जिंदगी में ज्यादातर लोग ऐसे हैं जो सेहत का ध्यान नहीं रख पाते हैं और समय से पहले बुढ़ापा का शिकार हो जाते हैं. बुढ़ापा अर्थ बालों का सफेद होना. शरीर कमजोर हो जाना. दांत कमजोर होना. गाल अंदर बैठना. जल्दी थक जाना. चेहरा निस्तेज हो जाना. पाचन तंत्र खराब रहना. आंखें कमजोर होना इत्यादि. यह सभी लक्षण बुढ़ापे की अवस्था में होते हैं. लेकिन अब ऐसा नहीं है जवानी के दिनों में ही काफी युवा इन बुढ़ापे का शिकार हो जाते हैं.

इन 10 कारणों से जल्दी आता है बुढ़ापा, महिला हो या पुरुष ना करें नजर अंदाज

आज हम आपको 10 ऐसे कारणों के बारे में बताने की कोशिश करेंगे जो उम्र से पहले ही बुढ़ापे को न्योता देते हैं.

1 .बहुत ज्यादा मात्रा में पानी पीना-

कई लोग यह मानते हैं कि अधिक मात्रा में पानी पीने से शरीर स्वस्थ रहता है. लेकिन वह यह नहीं जानते हैं कि किडनी को उतना ही अधिक कार्य करना पड़ता है. कहा जाता है कि किसी चीज की अधिकता बुरी होती है. आयुर्वेद के अनुसार बहुत अधिक मात्रा में पानी जल्दी बुढ़ापा आता है क्योंकि अधिक पानी पीने से आपके वात, पीत और कफ का संतुलन बिगड़ जाता है. भोजन करते समय और भोजन के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए. हमेशा बैठकर ही पानी पीना चाहिए. पानी स्वच्छ हो इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए. हर कहीं का पानी पीने से परहेज करना चाहिए.

2 .रात में जागना और दिन में सोना-

प्रकृति में हमारे शरीर में एक घड़ी फिट कर दी है. प्राचीन काल में मनुष्य उस घड़ी के अनुसार ही सो जाता और प्रातः काल जल्दी उठ जाता था. कहते हैं कि जो रात को जल्दी सोए और सुबह को जल्दी उठे उस बच्चे का दूर-दूर तक दुनिया का दुख भागे. लेकिन आज के मानव की दिनचर्या और रातचर्या बदल गई है. देर तक टीवी देखना या ऑफिस में काम करना और उसके बाद दिन भर या सुबह देर तक सोना आम हो गया है. शास्त्रों के अनुसार यह आदत बुढ़ापे को जल्दी बुलावा देती है. कई लोग ऐसे हैं जो दिन में भी सोते हैं और रात में भी और यह उनकी आदत बन जाती है.

नींद का समय बिगड़ने से नींद की कमी हो जाती है. नींद कई रोगों को ठीक करने में सक्षम है. नींद की कमी से ना केवल आंखों के इर्द-गिर्द कालापन आता है बल्कि मोटापा बढ़ने के चांस अधिक हो जाते हैं.

3 .गरिष्ठ भोजन करना-

गरिष्ठ भोजन को पचाने के लिए आँतों को अतिरिक्त परिश्रम करना पड़ता है जो काम दांत नहीं करते उस काम को भी आंतों को करना पड़ता है. यदि आप गरिष्ठ भोजन कर रहे हैं तो दांतो का थोड़ी ज्यादा तकलीफ दे दे यानी भोजन को अच्छी तरह से चबाकर खाएं. गरिष्ठ भोजन करने के बाद पेट फूल जाता है. गरिष्ठ भोजन वसा युक्त स्वाद में अच्छा लग सकता है. लेकिन शरीर को उसे पचाने में अधिक उर्जा खर्च करनी पड़ती है तो शरीर स्फूर्तिदायक नहीं रह पाता है.

मांस और मछली के अलावा आलू, अरबी, जमीकंद गरिष्ठ हैं. चावल बिना माड़ निकाले खाना गरिष्ठ ही होता है. ज्यादा तली हुई और मसालेदार चीजें गरिष्ठ ही होती है. जंक और फास्ट फूड भी गरिष्ठ ही होते हैं. कई तरह के गरिष्ट नाश्ते भी होते हैं जो आपकी आँतों को दिन प्रतिदिन कमजोर करके पाचन क्रिया समाप्त कर देते हैं. जिसके कारण कब्ज, एसिडिटी और पेट संबंधी रोग होने लगते हैं जो बुढ़ापे को आमंत्रित कर लेते हैं.

भूख लगने पर ही भोजन करें, जितनी भूख हो उससे थोड़ा थोड़ा कम खाएं, अच्छी तरह से चबा चबाकर खाए. दिनभर कुछ न कुछ खाते रहने का स्वभाव छोड़ दें. दूध, जूस, पानी आदि तरल पदार्थों का अधिक- अधिक सेवन करें.

4 .वीर्य का अधिक स्वखलन या धातुक्षीणता-

आज के अधिकांश युवकों की ज्वलंत समस्या है कामुक विचार, कामुक चिंतन का भाव और काम क्रीड़ा करने के अलावा खट्टे, चटपटे, मिर्च- मसाले वाले पदार्थ का अधिक सेवन करने से शरीर में कामाग्नि बनी रहती है. जिससे शुक्र धातु पतली होकर क्षीण होने लगती है. इसके और भी कई कारण है. वीर्य बल का प्रतीक है. यह जितनी ज्यादा मात्रा में संचित होता रहता है. व्यक्ति उतना स्वस्थ और जवान बना रहता है.

5 .मल- मूत्र का वेग रोकना-

कभी भी पेशाब या मल आए तो उसे रोकना नहीं चाहिए, इसे रोके रखने से किडनी और आँतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है यह आदत कई तरह के गंभीर रोगों उत्पन्न करता है.

6 .तनाव-

अक्सर माना जाता है कि तनाव या डिप्रेशन इंसान को मानसिक और भावनात्मक रूप से कमजोर बना देता है. लेकिन अब वैज्ञानिकों का कहना है कि इन समस्याओं के साथ ही अवसाद यानी तनाव बुढ़ापा भी जल्दी लाता है. नीदरलैंड्स के वैज्ञानिक ने एक शोध में पाया कि डिप्रेशन के कारण शारीरिक क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ता है और यह सेल्स में एजिंग की प्रक्रिया को तेज कर देता है जो लोग गंभीर किस्म के अवसाद का शिकार होते हैं बाकी लोगों के मुकाबले जल्दी बूढ़े हो जाते हैं.

क्रोध, चिंता, तनाव, घबराहट, चिड़चिड़ापन इत्यादि भाव बुढ़ापे को न्योता देने वाले कारक हैं. हमेशा प्रसन्न चित्त रहने का प्रयास करें, उत्साह, संयम, संतुलन, क्षमता, संतुष्टि व प्रेम का मानसिक भाव हर पल बना रहे.

7 .नमक का अधिक सेवन-

अधिक नमक का सेवन भी बुढ़ापा को आमंत्रित करता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि सोडियम की बहुत अधिक मात्रा लेने से कोशिकाओं का क्षय होता है. इसका प्रभाव अधिक वजन वाले लोगों में सबसे ज्यादा देखा जाता है जो किशोर मोटे होते हैं और चिप्स आदि के जरिए बहुत अधिक नमक खाते हैं. उनके शरीर में कोशिकाओं की आयु तेजी से बढ़ने लगती है. इस कारण वे जीवन में बाद के वर्षों में ह्रदय रोग के शिकार हो सकते हैं.

 भोजन में नमक की कमी करने से कोशिकाओं की आयु बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है. अगस्ता स्थित जॉर्जिया रिजल्ट्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक शोध किया है. जिसमें उन्होंने निष्कर्ष निकाला है कि खाने में नमक की अधिक मात्रा से शरीर की कोशिकाओं का क्षय होता है और यह समय से पहले ही बूढ़ी हो जाती हैं. जबकि खाने में नमक की कम मात्रा कोशिकाओं की एजिंग प्रोसेस को धीमी कर देती है. यह तथ्य ऐसे लोगों के मामले में अधिक प्रभावी होता है जो कि मोटे होते हैं और जिनका वजन अधिक होता है.

8 .धूम्रपान या नशा करना-

तंबाकू, धूम्रपान या शराब को पहले व्यक्ति पीता है. इसके बाद या व्यक्ति को पीने लगती है. धूम्रपान से कुछ ही दिनों में त्वचा पर बुरा प्रभाव पड़ता है. शराब आपके लीवर दिल और दिमाग को कमजोर करती है. तंबाकू चबाने की आदत से व्यक्ति की दांत और गाल वक्त से पहले ही खत्म हो जाते हैं. जहां तक सवाल स्मोकिंग का है तो इससे त्वचा खुश्क होती है और चेहरे पर झुर्रियां पड़ती है. स्मोकिंग से शरीर में विटामिन सी का स्तर भी घटता है जबकि विटामिन सी का काम त्वचा में नमी बनाए रखना होता है. निकोटीन झुर्रियां पैदा करता है.

9 .प्रदूषण-

प्रदूषण कई प्रकार का होता है. प्रमुख प्रदूषण है वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण है. प्रदूषण से भी व्यक्ति वक्त से पहले ही बुढा होने लगता है. प्रदूषण से फेफड़ों, आंखों और त्वचा पर असर पड़ता है. आज पूरा भारत कचरे का ढेर बना हुआ है.

प्राकृतिक संतुलन में दोष पैदा होना प्रदूषण कई प्रकार का होता है. ना शुद्ध वायु मिलना. ना शुद्ध जल मिलना. ना शुद्ध खाद पदार्थ मिलना. न शांत वातावरण मिलना शरीर और मस्तिष्क के लिए बहुत घातक होता है.

10 .बहुत देर तक बैठना-

बहुत देर तक बैठे रहना भी बुढ़ापे को न्योता देता है. ऑफिस में लगभग 8 घंटे बैठे रहना पड़ता है. कई लोगों की दुकानें हैं जहां उनको कम से कम 12 घंटे बैठे रहना पड़ता है. जिन लोगों का काम बैठे रहने का है उन्हें गुर्दे और हृदय रोग हो सकते हैं. मोटापा होना तो आम हो जाता है. यहां तक कि उन्हें कैंसर का खतरा भी अधिक रहता है. ब्रिटिश जनरल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन के मुताबिक नियमित कसरत से इसे टाला जा सकता है और उम्र बढ़ाई जा सकती है. वे लोग जो सप्ताह में लगभग 150 मिनट कसरत करते हैं वह कसरत करने वाले से औसतन 10 से 13 साल ज्यादा जीते हैं.

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स्रोत- वेबदुनियां-

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