इन 21 रोगों का रामबाण इलाज है नागफनी, जानें इस्तेमाल करने कि विधि

कल्याण आयुर्वेद- नागफनी एक ऐसा पौधा होता है जिसका तना पत्ते की तरह ही होता है. लेकिन यह पूरी तरह से गूदेदार होता है. इसे मरुभूमि का पौधा भी कहा जाता है क्योंकि यह पौधा पानी के अभाव में भी जीवित रहता है. इसकी पत्तियों पर कांटे लगे होते हैं. यह पौधा बहुत धीरे-धीरे बढ़ता है और काफी लंबे समय तक आसानी से जीवित रहता है. इसे लोग घर में भी शोपीस के तौर पर लगाकर रखते हैं.

इन 21 रोगों का रामबाण इलाज है नागफनी, जानें इस्तेमाल करने कि विधि

नागफनी में कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, मैग्नीशियम शामिल होते हैं. नागफनी कैलोरी में कम वसा से भरपूर कोलेस्ट्रोल कम होने के साथ ही कई तरह के पोषक तत्वों का स्रोत होता है. इसके फलों को सुखाकर और पीसकर मवेशियों को भी खिलाया जाता है.

नागफनी के फायदे-

1 .पेट की सूजन - 

इसके पत्तों को कूटकर पुल्टिस बनाकर बांधने से दाह और पित्त की सूजन मिटती है।

2 .जोड़ों की सूजन -
सुजे हुए जोड़ों पर इसके पत्ते को बीच में से चीर कर भीतर की तरफ कुछ हल्दी और सेंधा नमक लगाकर गर्म करके बांध देते हैं। जिससे सूजन उतर कर कम हो जाती है।

3 .सुजाक -
इसके फल का गूदा 3 ग्राम शर्बत में मिलाकर संदल के तेल की 10 बूंद डालकर पिलाने से सुजाक में लाभ होता है।

4 .आंख का दुखना -
इसके पंजे का गूदा आंख पर बांधने से आंख का दुखना बंद हो जाता है।

5 .आमवात -
प्राचीन आमवात और संधि शोथ में इसकी जड़ का काढा दिया जाता है

6 .हुपिंग कफ -
इसके फलों का शरबत या उनका रस दमा और हुपिंग कफ मे लाभदायक होता है। इससे कफ पतला होकर छूट जाता है और खांसी का वेग कम हो जाता है।
7 .कब्ज -
इसके दूध की 10 बूंद शक्कर में मिलाकर खाने से खूब दस्त आते हैं।
8 .नागफनी का तेल -
इसके बीजों का तेल अत्यंत काम शक्तिवर्धक है इसकी कामेंद्रिया पर मालिश करने से बहुत उत्तेजना और शक्ति पैदा होती है।
9 .खून की कमी -
नागफनी के पत्तों के काटे वगैरा साफ करके उन के टुकड़े-टुकड़े करके पानी में तर करके रात को औंस में रख दे सवेरे उसके मल को छानकर मिश्री मिलाकर पीने से खून बढ़ता है।
10 .कुक्कर खांसी -
 इसके फल को भूनकर उसका रस निकाल कर पीने से कुक्कर खांसी मिटती है।
11 .नारू कीड़ा-
इसके पत्तों का गूदा निकालकर उस को गर्म करके उसका पुल्टिस बांधने से नारू और उसमें पैदा हुई समस्याओं में बड़ा लाभ होता है।
12 .पित्त विकार - 
इसके फल का शरबत दिन में तीन चार बार 4 ग्राम की मात्रा में लेने से पित्त विकार शांत होता है।
13 .कफ रोग -
जीर्ण कफ रोगों में इसको देने से कफ की उत्पत्ति कम हो जाती है। जिससे खांसी का कष्ट भी घट जाता है।
14 .दर्द नाशक तेल -
इसके पंचांग को तेल में तलकर उस तेल को छानकर दर्द के स्थान पर मालिश करने से सब प्रकार का दर्द आराम हो जाता है।
15 .विरेचन - 
इसके दूध को 10 बुंद शक्कर में मिलाकर देने से विरेचन हो जाता है।
16 .मूत्रकच्छ - 
इसके फल के 4 ग्राम का शरबत में चंदन के तेल की 25 बूंद डालकर पिलाने से मूत्रकच्छ मिटता है।
17 .नेत्र रोग - 
इसके पत्ते का गूदा आंख पर बांधने से आंख का दुखना मिटता है।
18 .हृदय की गति -
ह्रदयोदर के अंदर इसके पंचांग की राख को देने से दस्त और पेशाब होकर हृदय की क्रिया सुधर जाती है। इसके पंचांग का रस देने से हृदय की शीघ्रगामी धड़कन बंद होकर हृदय की गति सुव्यवस्थित हो जाती है।
19 .बवासीर -
इन पत्तों को साफ करके जरा हल्दी लगाकर बवासीर पर बांधने से बवासीर में लाभ होता है।
20 .कुक्कर खांसी -
जुकाम की वजह से होने वाले नालियों के प्रदाह और कुक्कर खांसी में भी इससे काफी लाभ होता है। 24 घंटे में ही खांसी के अंदर लाभ दिखलाई देने लगता है।
21 .मसूढ़ों के रोग -
इसके पत्तों के गुदा की पुल्टिस को गर्म करके बांधने से मसूड़ों के असाध्य रोग भी मिट जाते हैं।
नागफनी का शरबत बनाने की विधि -
नागफनी के पके फलों का रस आधा किलो और स्वच्छ रवेदार शक्कर 1 किलो इन दोनों को मिलाकर हल्की आंच पर पकाना चाहिए। जब सरबत की चाशनी हो जाए तब उसको उतारकर किसी ढक्कनदार बर्तन में बंद करके 12 घंटे तक पड़े रहने देना चाहिए। उसके बाद उस शरबत को बिना हिलाए शरबत को ऊपर से निकालकर बोतल में भर लेना चाहिए और नीचे जमी हुई गाद को फेंक देना चाहिए। इस शरबत को 6 ग्राम से 10 ग्राम तक की मात्रा में दिन से 4 बार लेने से सब प्रकार की कुक्कर खांसी और दमे में बहुत लाभ होता है।
नोट- यह पोस्ट शैक्षणिक उदेश्य से लिखा गया है किसी भी प्रयोग से पहले किसी योग्य वैध कि सलाह जरुर लें. धन्यवाद.

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