जानें- कालाजार ( फीवर ) होने के कारण, लक्षण और बचाव के उपाय

कल्याण आयुर्वेद- कालाजार एक बहुत हीं बड़ी बिमारी है. जिससे कभी-कभी इंसान की मृत्यु भी हो जाती है. यह रोग दुनिया का दूसरा ऐसा रोग है जिससे की इंसान बहुत ज्यादा मर रहे हैं जो मृत्यु का कारण है. यह एक ऐसा रोग है जो धीरे-धीरे करके फैलता है. पहले किसी गाँव में होता है और धीरे- धीरे करके पुरे राज्य में फ़ैल जाता है और फिर पुरे देश में फ़ैल जाता है. इसलिए हमें यह जानना बहुत जरुरी है कि इससे कैसे बचा जाए.

तो आइये जानते हैं इसके कारण -

*अगर आपके घर के आस पास कोई गंदगी है तो उसे साफ़ करिए क्योंकि कालाजार एक मच्छर जिसका नाम है मादा फ्लेबोटोमिन सैंडफ्लाईस के काटने से होता है जो गन्दी में रहता है यह मच्छर मनुष्यों या जानवरों का खून चूसने के लिए काटती है जिससे उनके अण्डों का विकाश होता है यह लाश्मैनिया पेरासाईट का वेक्टर है जब यह जीवाणु किसी मनुष्य या जानवर को काट कर हट जाता है और दुसरे व्यक्ति को काट लेता है तो वह व्यक्ति भी संक्रमित हो जाता है.

इसके शुरूआती संक्रमित के बाद यह बिमारी महीनो में अधिक गंभीर रूप ले सकती है और आंत में लिश्मानियासिस या कालाजार कहा जाता है.

कालाजार के लक्षण-

1.बुखार रुक-रुक कर आना या बुखार आती है और फिर अपने आप उतर जाती है.

2.भूख न लगना एवं लगातार शरीर का वजन घटते जाना.
3.प्लीहा का तेजी से बढ़ना एवं आमतौर पर प्लीहा का नरम हो जाना.
4.यकृत का बढ़ना प्लीहा के मुकाबले कम.
5.त्वचा का शुष्क हो जाना, त्वचा के बाल का टूट कर कम होना, व्यक्ति के हाथ, पैर, पेट आदि का रंगीन होना , चेहरे त्वचा पर भूरे रंग का विकर्ण होना जिसकी वजह से इसे ब्लैक फीवर या कालाजार के नाम से जानते हैं.
6.शरीर में तेजी से खून की कमी होना जिससे एनीमिया जैसी लक्षण हो सकती है.
कालाजार से बचाव के उपाय -
*कालाजार से बचाव का कोई टिका उपलब्ध नहीं है सबसे अच्छा तरीका है खुद हीं बचाव करें खुद को बड़मक्खी या रेत मक्खी के काटने से बचें अगर वैसी जगह जाना आवश्यक हो तो गोधुली या शाम से सुबह तक अपने गतिविधियों को कम से कम करें क्योंकि इस समय बड़मक्खी या रेत मक्खी सक्रीय रहती है.
*शरीर को ढक कर रखें यानि पुरे कपडे पहने, कीटनाशक का इस्तेमाल करें सोते वक्त मेडिकेटेड मच्छरदानी का इस्तेमाल करना हीं कालाजार से बचने का उपाय है.
*कोई भी बुखार हो तो अपने डॉक्टर से सलाह लें ताकि आप कालाजार के चपेट में न आएं.

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