बवासीर से लेकर नपुंसकता तक को जड़ से ख़त्म करता है यह पौधा, जानें इस्तेमाल करने के तरीके

कल्याण आयुर्वेद- प्रकृति ने हमारे आसपास कई ऐसे पेड़ पौधे उगाए हैं जो औषधीय गुणों से भरपूर होता है. उन्हीं पौधों में से एक है सत्यानाशी का पौधा. जिसे खरपतवार समझ कर लोग उखाड़कर फेंक देते हैं.



सत्यानाशी का पौधा लगभग हर क्षेत्र में पाया जाता है. यह बंजर भूमि, नदी किनारे, जंगलों, खाली जगह के आसपास कटीले फूल वाले हरे पत्ते नुकीले पौधे होते हैं. यह पौधा देखने में तो बहुत ही आम लगते हैं. लेकिन इसके अंदर कई औषधीय गुण मौजूद होते हैं. इसके नाम के अनुसार इसका काम भी है. सत्यानाशी मतलब कि सभी प्रकार के रोगों को नाश करने वाला.
आयुर्वेद में इस पौधे को बहुत ही उपयोगी माना गया है. इसके बीजों को भी बहुत सी बीमारियों के लिए दवाइयों के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. सत्यानाशी के बीज सरसों दाने की तरह होते हैं. यह लगभग हर बंजर जगह पर देखने को मिल जाते हैं. इसे अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है. स्वर्णक्षीरी, कटुपर्णी, पीला धतूरा, श्याम कांटा, दारूड़ी आदि नामों से जाना जाता है.
चलिए जानते हैं सत्यानाशी के फायदे और प्रयोग विधि-
1 .जॉन्डिस के लिए-
सत्यानाशी के पौधे का उपयोग जौंडिस यानी पीलिया रोग को दूर करने में बहुत कारगर होता है. पीलिया के रोगी को आधा चम्मच सत्यानाशी तेल गन्ने के जूस के साथ पीने से जल्दी छुटकारा मिल जाता है.
2 .पेट के लिए-
सत्यानाशी पेट, फेफड़ों और शरीर के अंगों में पानी भरने की समस्या को दूर करने का रामबाण औषधि माना जाता है. इसके लिए एक चम्मच सत्यानाशी तेल और चुटकी भर सेंधा नमक को एक गिलास गुनगुने पानी में मिलाकर प्रतिदिन पीना चाहिए. इससे कुछ ही दिनों में इन समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है.
3 .मुंह के छाले-
मुंह में छाले होने पर सत्यानाशी के कोमल डंठल और पत्तियां चबानी चाहिए और कुछ देर बाद थोड़ा दही और चीनी खाने से मुंह के छालों में तुरंत राहत मिलती है.
4 .बवासीर के लिए-
सत्यानाशी बवासीर को ठीक करने का एक खास औषधि है. सत्यानाशी जड़, चक्रमरद बीज और सेंधा नमक बारीक पीसकर चूर्ण तैयार कर लें. अब प्रतिदिन सुबह-शाम चुटकी भर सत्यानाशी मिश्रण चूर्ण को दही के साथ सेवन करें. इससे बवासीर के घाव ठीक हो जाते हैं और बवासीर जड़ से खत्म हो जाता है. आप इस मिश्रण को गुड़ के पानी के साथ भी सेवन कर सकते हैं.
5 .चोट के लिए-
चोट, घाव ठीक करने में सत्यानाशी फूल, पत्तियों का रस अचूक औषधि मानी जाती है. सत्यानाशी फूल पत्तियों का रस घाव जल्दी भरने में मददगार होता है. साथ ही घाव को संक्रमित होने से भी बचाता है.
6 .दमा रोग-
सत्यानाशी फूल, कोमल पत्तों से कांटे अलग करें फिर फूल और कांटे बिना पत्तों को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें. प्रतिदिन सुबह-शाम आधा चम्मच इस चूर्ण को हल्के गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से दमे की खांसी से जल्दी राहत मिलता है और एक चम्मच सत्यानाशी तेल मिश्री, गुड़ के साथ खाने से दमा रोग से जल्दी छुटकारा मिलता है.
8 .कुष्ठ रोग-
कुष्ठ रोग फैलने से रोकने में सत्यानाशी काफी मददगार होता है. सत्यानाशी के फूल, पत्तों और नीम के पत्तों को बारीक कूटकर पानी में उबालें. अब इस पानी से स्नान करें. आधा चम्मच सत्यानाशी फूल रस दूध के साथ सेवन करें. सत्यानाशी तेल खाने में इस्तेमाल और कुष्ठ ग्रसित त्वचा पर लगाएं. यह पौधा कुष्ठ रोगी के लिए बहुत फायदेमंद होता है.
9 .आंखों के लिए-
नजर कमजोर होने पर, मोतिया बिंदु होने पर सत्यानाशी के दूध को मिश्री, कच्चे दूध के साथ सेवन करना लाभदायक होता है. सत्यानाशी दूध और ताजा मक्खन या फिर गाय के घी के साथ मिलाकर आंखों पर काजल की तरह लगाने से भी काफी लाभ होता है.
10 .कब्ज, गैस के लिए-
सत्यानाशी कब्ज और गैस की समस्या को भी दूर करता है. इसके लिए सत्यानाशी की जड़ और अजवाइन को उबाल कर काढ़ा बना लें. अब प्रतिदिन सुबह-शाम इस कार्य को पीने से 10- 15 दिन में ही यह समस्या दूर हो जाती है.
11 .नपुंसकता के लिए-
सत्यानाशी पुरुषों और महिलाओं दोनों की अंदरूनी गुप्त बीमारी, नपुंसकता, धातु रोग, वीर्य की कमी, शुक्राणुओं की गड़बड़ी और निसंतान कलंक दूर करने में मददगार होता है. सत्यानाशी का इस्तेमाल प्राचीन काल से इस समस्या को दूर करने में किया जा रहा है. महिलाओं और पुरुषों के गुप्त रोगों में सत्यानाशी के फूल, पत्तियों का रस आधा चम्मच सुबह-शाम कच्चे दूध के साथ सेवन करना फायदेमंद होता है यह महिला व पुरुषों के लिबिडो बढ़ाने में मददगार होता है.
12 .पेशाब में जलन होना-
पेशाब में जलन संक्रमण होने पर सत्यानाशी की जड़ों को उबालकर काढ़ा बनाकर प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से पुरानी से पुरानी पेशाब में जलन और दर्द की समस्या दूर हो जाती है.
13 .दांतों में कीड़ा होना-
दांतों में कीड़े होने से दांतों में दर्द होने लगता है. ऐसे में सत्यानाशी के तने और नीम के तने से लगातार दातुन करने से दांतो के कीड़ा, दांत दर्द से जल्दी छुटकारा मिलता है. दांतो के लिए सत्यानाशी और नीम का तना एक साथ मिलाकर दातुन करना अधिक फायदेमंद होता है.
नोट- सत्यानाशी का इस्तेमाल गर्भवती महिलाओं और 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को नहीं करना चाहिए. यह पोस्ट शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है. किसी भी प्रयोग से पहले आप किसी जानकार से अवश्य सलाह लें. धन्यवाद.

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