खुशहाल जिंदगी के लिए अपनाएं ये टिप्स, रहेंगे तनाव मुक्त

कल्याण आयुर्वेद- अतीत में किए गए गलत निर्णय के कारण वर्तमान में पछताना अपने भविष्य को खराब करने के सिवा और कुछ भी नहीं है. इसलिए पुरानी बातों को भुलाकर आगे की सुध लेनी चाहिए, तभी एक खुशहाल और सुकून भरा जिंदगी बिताया जा सकता है.

खुशहाल जिंदगी के लिए अपनाएं ये टिप्स, रहेंगे तनाव मुक्त

चलिए जानते हैं विस्तार से-

मनपसंद जीवनसाथी से शादी नहीं कर पाना, सही करियर नहीं चुन पाना, किन्ही कारणों से अपेक्षित तरक्की नहीं कर पाना, अपने माता-पिता की सलाह ना मानना जैसे कई और कारण होते हैं. जिसकी वजह से कई लोग जीवन भर पछतावा करते हैं. उनके मन में हमेशा ही अपने अतीत के गलत निर्णय को लेकर चिंता बनी रहती है. लेकिन लंबे समय तक अपने निर्णय पर पछतावा कोई समझदारी नहीं है. ऐसा करने से उदासी, आत्मविश्वास में कमी आती है इसलिए बीती बातों को भूलकर आगे बढ़ने के बारे में सोचना चाहिए.

इसके लिए क्या करें?

भूलना सीखें-

अमेरिकी न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर एनी सरीन का कहना है आप चाहे जितनी बार एक बात को लेकर पछतावा करे लेकिन आप अतीत को बदल नहीं सकते हैं. इसके बाद भी आप बार-बार पछतावा करके अनजाने में अपने तन और मन को कष्ट देते हैं. इसलिए ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए.

याद रखिए, जिंदगी की खूबसूरती इस बात में नहीं है कि आप कितना तेज चल सकते हैं या कितना ऊंचा उठ सकते हैं. जिंदगी की खूबसूरती और सार्थकता इस बात में है कि आप गिरकर कितनी जल्दी वापस उठ सकते हैं. कोई गलती हो गई और आपको इसका एहसास है तो इसे भूलकर आगे बढ़ने की तरफ ध्यान दें.

जिन बातों पर आपका नियंत्रण नहीं है. उसके बारे में सोच कर अपनी सेहत और समय को बर्बाद ना करें. अच्छा होगा कि प्रतिदिन खुशी आनंद और हंसी ठिठोली के कुछ पल अपनी जिंदगी में शामिल करें और खुश रहें.

खुला रहे मन और दिमाग-

म्यूजिशियंस फ्रैंक जैप्पा का कहना है कि हमारा मन और दिमाग पैराशूट की तरह होता है जो खुला ना हो तो काम नहीं करता है. गलती करना और गलत निर्णय लेना मानवीय स्वभाव है. लेकिन अपने गलत निर्णयों के लिए खुद को दोषी समझते रहना और उन्हें भूलकर आगे ना बढ़ पाना आपकी एक और गलती होगी. इससे आपका जीवन रुक जाएगा. ऐसी गलती करेंगे तो आपको कभी खुशी नहीं मिल पाएगी. बेहतर होगा कि आप अपनी गलती से सीखे और एक सकारात्मक राह पर आगे बढ़ने का निर्णय लें.

अपनी इच्छाओं को ना करे दमन-

ऑस्ट्रेलिया की नर्स वेयर ने अपनी सर्विस के दौरान बहुत से मरीजों के साथ समय बिताया. उन्होंने अपनी पुस्तक द टॉप फाइव रिग्रेट्स ऑफ लाइन में मरीजों से की गई बातों और अपने अनुभव के आधार पर लिखा है. ज्यादातर लोग मरते समय पछतावा करते हैं कि उन्होंने बहुत कठोर मेहनत की लेकिन दूसरों को खुश रखने या संतुष्ट रखने के लिए अपनी इच्छाओं और खुशियों का दमन किया. अगर आप हर समय अपने अतीत के बारे में सोच कर दुखी होते रहेंगे तो अपनी पारिवारिक जीवन, बिजनेस या प्रोफेशनल पर सही ढंग से फोकस नहीं कर पाएंगे. हमेशा दुखी रहेंगे और इच्छाओं का दमन करेंगे तो आपके पास जो अच्छी चीजें हैं उसका सुख भी आप नहीं हो पाएंगे. ऐसे में जो आपके पास है उसके साथ जीना सीखें.

स्वास्थ्य को खराब कर देता है पछतावा-

मनोविज्ञानी कहते हैं कि पछतावा यानी रिग्रेट स्ट्रेस का ही एक रूप है जो ना सिर्फ मानसिक बल्कि शारीरिक रूप से भी दर्द का कारण बन सकता है. खुद को बार-बार दोषी ठहराना आपको एक खुशहाल जिंदगी जीने से रोक सकता है. इससे आप अनजाने में ही खुद को नुकसान पहुंचाते हैं.

एक मेडिकल जनरल में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार यह अफसोस क्रॉनिक स्ट्रेस की वजह बन सकता है इससे ना सिर्फ हार्मोन असंतुलन बल्कि इम्यून सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है. कुछ लोगों में तो इसका असर इतना ज्यादा होता है कि उन्हें आत्महत्या करने की नौबत तक आ जाती है. इसलिए पुरानी बातों को भूलकर आगे बढ़ें.

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स्रोत- हरिभूमि.

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