लड़कियों को जरुर मालूम होने चाहिए मासिक धर्म से जुड़े ये महत्वपूर्ण जानकारियां

कल्याण आयुर्वेद- प्रत्येक व्यस्क स्त्री के योनि मार्ग से प्रति महीना जो रक्त का स्राव होता है उसे मासिक धर्म कहते हैं. इसमें बीरबहूटी के रंग जैसा गहरे लाल रंग का रक्त निकलता है. जिसका वस्त्र पर लगा दाग होने से छूट जाता है. इसके निकलने में दाह, वेदना हो अथवा बहुत कम या बहुत अधिक रक्त निकले तो रोग का कारण समझना चाहिए. 27 दिन के पहले या बाद में देर से मासिक धर्म होना भी सामान्य रूप का चिन्ह है तीन-चार दिन से अधिक मासिक रक्त निकलना भी विकार का सूचक है. रक्त के साथ लोथड़े निकले, उसका रंग पीलापन लिए हुए हो अथवा उसमें दुर्गंध आती हो तो उसे विकार समझ कर उसकी चिकित्सा करनी चाहिए.

लड़कियों को जरुर मालूम होने चाहिए मासिक धर्म से जुड़े ये महत्वपूर्ण जानकारियां

मासिक धर्म का रक्त प्रायः 3 दिन निकलता है. आर्तव दर्शन के दिन से लेकर 16 दिन तक अथवा आर्तव के स्नान के पश्चात 12 दिन तक स्त्री गर्भधारण करने योग्य रहती है.

रजोदर्शन से लेकर 3 दिन तक स्त्री को ब्रह्मचारिणी रहना चाहिए. इन दिनों में स्नान, श्रृंगार और किसी भी प्रकार का मानसिक या शारीरिक परिश्रम नहीं करना चाहिए. एकांत स्थान में मुलायम आसन पर प्रायः लेटे रहना चाहिए. दिन में सोना नहीं चाहिए. आर्तव बंद होने पर चौथे दिन स्त्री को सिर्फ स्नान करना चाहिए.

मासिक धर्म के दिनों में प्रायः स्त्रियां गंदे कपड़े पहने रहती है और गंदे कपड़े की तह योनि मार्ग पर बांधती है. कोई- कोई तो कपड़ों की तह करके योनि मुख में भर लेती हैं. यह अत्यंत ही खराब है. गंदे कपड़े के कीटाणु योनि में प्रवेश कर भयंकर रोग का कारण बन जाती है. सेफ्टीक का भी खतरा रहता है क्योंकि मासिक धर्म में गर्भाशय की अंत कला विदीर्ण होती है. इसलिए मासिक धर्म में बहुत साफ- सुथरा कपड़ा पानी में उबालकर इस्तेमाल करना चाहिए. शहरों में इसके लिए सेनेटरी टॉवल्स मिलते हैं उनका उपयोग करना बेहतर होता है.

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स्रोत- आरोग्य प्रकाश.

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