खूनी एवं बादी बवासीर का रामबाण इलाज है काला तिल, जानें कैसे करें इस्तेमाल

कल्याण आयुर्वेद- बवासीर बहुत ही कष्ट दायक बीमारी है. बवासीर में गुदा और मलाशय के निचले हिस्से में सूजन आ जाती है. इस वजह से मस्से गुदा के अंदर और बाहर या किसी जगह पर बनती है. मस्सा कभी अंदर रहते हैं तो कभी बाहर आते हैं. लगभग 60% लोगों को उनकी उम्र के चरणों में बवासीर होता है. यदि बवासीर का समय पर इलाज नहीं किया जाता है तो यह समस्या काफी बढ़ जाती है.; कई बार बवासीर में इतना तेज दर्द और जलन होता है कि सहन करना मुश्किल हो जाता है.

खूनी एवं बादी बवासीर का रामबाण इलाज है काला तिल, जानें कैसे करें इस्तेमाल
लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी बवासीर खूनी हो या बादी दोनों ही तरह के बाबासीर को काला तिल जड़ से खत्म कर सकता है.

कैसे करें इस्तेमाल-

खूनी बवासीर में- 50 ग्राम काले तिलों को सूखने योग्य पानी में भिगोए. लगभग 30 मिनट जल में भीगे रहने के बाद उन्हें पीसकर उसमें लगभग एक चम्मच मक्खन एवं दो चम्मच मिश्री मिला दें. इसका प्रतिदिन 2 बार सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ होता है. कुछ दिनों तक सेवन करते रहने से खूनी बवासीर जड़ से खत्म हो जाता है.

बादी बवासीर में- काले तिल चबाकर ऊपर से ठंडा जल पीने से बादी बवासीर ठीक हो जाता है या तिल पीसकर गर्म करके मस्सों पर लेप करने और बांधने से भी बवासीर में लाभ होता है. इसके साथ ही तिल के तेल का एनिमा देने से भी आते चिकनी होकर शौच के गुच्छे निकल जाते हैं. जिससे धीरे-धीरे रोग ठीक हो जाता है.

नोट- यह पोस्ट शैक्षिक उद्देश्य से लिखा गया है. प्रयोग से पहले किसी योग्य डॉक्टर की सलाह जरूर लें. धन्यवाद.

Post a Comment

0 Comments