जानें- हैजा ( डायरिया ) से बचने के उपाय

कल्याण आयुर्वेद- एक कहावत है कि इलाज की अपेक्षा रोगों को उत्पन्न न होने देना अधिक बुद्धिमानी है. वेद शास्त्र में हैजा को उत्पन्न करने के लिए मनुष्य को ही दोषी ठहराया गया है. इस तरह तो प्रायः सभी रोग मनुष्य की भूल के ही परिणाम है. लेकिन हैजा की भूल भयानक है. सावधान आदमी निश्चित ही हैजे से सुरक्षित रह सकता है.

जानें- हैजा ( डायरिया ) से बचने के उपाय

जहां बहुत अधिक गर्मी पड़ने लगी, बर्षा न हुई या गंदगी अधिक होने लगे अथवा अजीर्ण कारक भोजन बराबर होने लगा, वहां समझना चाहिए कि हैजा फैलने वाला ही है. हैजा शुरू होते ही लोगों को उससे बचने के उपाय में लग जाना चाहिए.

डरपोक प्रकृति वाले आदमी को वह स्थान छोड़ देना चाहिए. हैजे को उत्पन्न करने वाले जो कीड़े कहे गए हैं. वे भी सहाय सामग्री बिना कुछ नुकसान पहुंचा सकते हैं. कच्चे व सड़े फलों का खाना, सड़ा हुआ बासी भोजन, बाजार की मिठाई, दूषित, वायु मैले या खराब सड़े पानी का पीना, मादक चीजों का सेवन, रात्रि जागरण, ऋतु परिवर्तन आदि सहायक कारण है.

बुद्धिमान आदमी को ऊपर लिखे कारणों से बचना एवं लोगों को बचाने के लिए कहना चाहिए या चिंता ना करके भगवान पर अटल विश्वास रखना चाहिए. मन को सदा प्रसन्न रखे. सुगंधित चीजों का व्यवहार करें, कपूर सूंघते रहना बहुत उत्तम है. उत्तम धूप से घर वायु को शुद्ध कर देना चाहिए. उपवास या व्रत न करना चाहिए. अधिक परिश्रम करने की तरह निकम्मा रहना भी खतरे से खाली नहीं है.

दस्तावर दवा सेवन न करें. सबसे अधिक महत्वपूर्ण बात जल की है. हैजे के दिनों में भूल कर भी कच्चा पानी न पीना चाहिए. पानी खूब अच्छी तरह से औटाए और उसी औटाए हुए पानी से बर्तन को धोकर तब उसमें अच्छी तरह ढककर पीने का पानी रखें.

रसोई बनाने के लिए भी उसी पानी का उपयोग करें. परमैग्नेट ऑफ पोटाश उत्तम कृमिघ्न औषध है 29 ग्राम एक कुएं में डालने से पानी शुद्ध हो जाता है. बिन बुझी कलई पत्थर का चूना 18 किलो महीन पीसकर डालने से या ढाई किलो फिटकरी डालने से कुएं का पानी शुद्ध हो जाता है.

हैजा से पीड़ित व्यक्ति का मल, मूत्र और गड्ढा खोदकर डालें या फिनाइल मिलाकर एक तरफ डालें. इस तरह रोगी के कपड़ों से भी बचें. मकान में जो जगह नीचे या दुर्गंध पूर्ण हो उन सब जगह भूमि पर कार्बोलिक एसिड या राख डाल दें. यदि माता को हैजा हो गया है तो उसका दूध बच्चे को न पिलायें. भोजन के साथ पुदीना की चटनी या प्याज खाएं. भोजन हल्का और ताजा खाए. अजीर्ण ना हो जाए इस बात का पूरा ध्यान रखें और कपूर को दो-तीन बूंद प्रतिदिन सुबह खाएं और घर से खाली पेट बाहर नहीं जाना चाहिए. कुछ खाकर ही हमेशा रोगी के यहां जाना चाहिए. इस तरह सावधान रहने से हैजा होने का खतरा बिल्कुल नहीं रहता है.

नोट- यह पोस्ट शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए योग्य डॉक्टर की सलाह जरूर लें. धन्यवाद.

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