2021 में ऐसे रखे अपना ख्याल, दुगनी ऊर्जा से करेंगे सभी कार्य

कल्याण आयुर्वेद- कोरोनावायरस से अब उबरने की ओर हम अग्रसर हो चले हैं, लेकिन हमें नहीं भूलना चाहिए कि इसने हमारी जीवन को किस तरह उथल-पुथल कर दिया है. अधिकांश लोगों में चिंता, अवसाद और कई शारीरिक समस्याएं देखी गई है. इसमें खान-पान, बॉडी, फिटनेस और कामकाज पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है. जीवन शैली दिक्कतों के कारण ही कमर दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव, मोटापा, डायबिटीज आदि रोगों का खतरा कई गुना अधिक हो गया है. नए वर्ष यानी साल 2021 में सेहत के प्रति ज्यादा सक्रिय रहकर अपना ध्यान रखें तभी ठीक रहेंगे और  दोगुनी ऊर्जा से पूरे साल का भरपूर सहयोग कर पाएंगे.

2021 में ऐसे रखे अपना ख्याल, दुगनी ऊर्जा से करेंगे सभी कार्य

चलिए जानते हैं विस्तार से-

अभी हम लोग बहुत ही बड़ी महामारी का सामना कर रहे है इस महामारी से बचाव के लिए संतुलित आहार लें और अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता ( इम्यूनिटी ) को मजबूत बनाएं. इससे संक्रमण का असर हमारे शरीर नहीं होगा.

आपको बता दें कि सर्दी के मौसम में पाचन क्रिया की अग्नि मंद हो जाती है. इसलिए ठंडा लगने पर बहुत लोगों को उल्टी और पतला दस्त होने लगता है. देर से पचने योग्य भोजन का सेवन न करें. अधपचा अनाज उल्टी और पखाने के द्वारा बाहर निकल जाता है. बहुत से लोगों में महामारी के कारण तनाव बढ़ गया है. जीवन शैली और खानपान में बदलाव करके खुद को मानसिक और शारीरिक तौर पर स्वस्थ रखें. जीवन से जुड़े ऐसे ही अनेक पहलुओं के बारे में आज हम आपको बताएंगे. जिससे आप स्वस्थ व ऊर्जावान बने रहेंगे.

सुबह जगने की क्रिया-

सुबह सूर्योदय से 2 घंटे पहले जागें. इस समय वातावरण में शांति और सात्विकता बनी रहती है. प्रातः काल दिनभर की कार्य योजना बना लें इससे आपका दिन व्यवस्थित तरीके से बीतेगा. सुबह जागने के बाद बहुत सारे लाभदायक बैक्टीरिया हमारे मुंह में मौजूद होते हैं  इसलिए सुबह उठने के बाद बिना कुल्ला किए ही एक गिलास गुनगुना पानी पी लें.

मुख धोना-

सुबह बिस्तर छोड़ने के बाद स्वच्छ जल से मुख धोएं. इससे आंख- नाक और चेहरे पर जमी गंदगी साफ हो जाती है. इतना ही नहीं इससे सुस्ती भी दूर हो जाती है और शरीर में ताजगी आती है. जाड़े में थोड़े- थोड़े गुनगुने पानी से मुख धोएं.

खाली पेट पिएं पानी-

प्रतिदिन मुंह धोने के बाद खाली पेट दो गिलास गुनगुना पानी पिएं. मोटापे से ग्रसित लोग गुनगुना पानी का सेवन जरूर करें. आयुर्वेद में इसे उष: पान कहा जाता है. इससे मल- मूत्र का त्याग ठीक तरीके से होता है. हमेशा पानी बैठकर पिएं. खड़े-खड़े पानी पीने से जोड़ो  या घुटने में दर्द की समस्या हो सकती है.

मल त्याग-

प्रातकाल नियमित मल त्याग की आदत डालें. इस तनावपूर्ण और व्यस्त जिंदगी में कई लोगों को समय पर मल के वेग का अनुभव नहीं होता है. इसके कई कारण हो सकते हैं. जैसे- रात में लिए गए भोजन का न पचना, नींद पूरी ना होना, तनाव अधिक रखना इत्यादि. इन कारणों से वात कारक भोजन यानी भारी दाल या तला हुआ पदार्थ के सेवन से आंतों में वात हो जाता है जो मल त्याग की गति में रुकावट पैदा करता है.

दातुन करना-

आयुर्वेद में मल त्याग के बाद दांतों की सफाई करने का विधान है. कटु रस वाले औषधीय वृक्षों की लकड़ी से दातुन करना चाहिए. इससे मुख के रोग एवं बैक्टीरिया का नाश होता है. इसके लिए बबूल, करंज, नीम वृक्षों की टहनी के दातुन का इस्तेमाल करना चाहिए. यह औषधीय गुणों से परिपूर्ण होते हैं.

सुबह का नाश्ता-

सुबह का नाश्ता लेना न भूलें. आयुर्वेद के अनुसार सुबह समय नाश्ता नहीं करने से शरीर में पित्त की वृद्धि होती है जिसके कारण पेट से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न होने लगती है. इसके अलावा पित्त बढ़ने के कारण हृदय रोग होने का भी खतरा अधिक हो जाता है. वही सुबह समय पर नाश्ता करने से आप दिन भर खुद को ऊर्जावान बने रहते हैं.

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