नपुंसकता 2 प्रकार की होती है, जानें दूर करने के सूत्र

कल्याण आयुर्वेद- लिंग की आंशिक या संपूर्ण दुर्बलता को ध्वजभंग या नपुंसकता कहा जाता है. इसमें लिंग की उत्तेजना तथा उत्थान शक्ति खत्म हो जाती है. जिससे रोगी संगमक्रिया यानी मैथुन नहीं कर पाता है.

नपुंसकता 2 प्रकार की होती है, जानें दूर करने के सूत्र
नपुंसकता दो प्रकार की होती है.

1 . हस्तमैथुन, ज्यादा स्त्री सहवास, चोट लगना, शरीर में चर्बी बढ़ना, संबंध बनाने से डरना, कड़ी बीमारी का होना, अंडकोष का छोटा होना या अंडकोष के रोग आदि की वजह से उसे कटवा देना, बहुमूत्र, अग्निमांध. हर्निया, बहुत दिनों तक अधिक परिणाम में कपूर, तारपीन आदि दवाइयों का सेवन करना और अत्यधिक मात्रा में शराब पीना तथा बहुत ज्यादा अफीम खाना आदि कारणों से नपुंसकता की बीमारी पैदा हो जाती है.
2 .कुछ लोग नपुंसक तो नहीं होते हैं लेकिन अपने आप को नपुंसक समझ लेते हैं. वह बहम कॉलेज के नासमझ विद्यार्थियों में अत्यधिक पाया जाता है. उसमें वीर्य की कोई कमी नहीं होती है. उसमें लिंग विकार भी नहीं पाया जाता है. शरीर भी सब प्रकार से स्वस्थ और सबल रहता है. किंतु उनके मन में एक प्रकार का बहम सवार होता है कि हम शारीरिक संबंध नहीं बना सकते. इसी मानसिक कमजोरी के कारण वे कभी संबंध नहीं बना पाते हैं. बस यही मानसिक नपुंसकता कहलाती है.

आज हम इस पोस्ट के माध्यम से मानसिक नपुंसकता दूर करने के उपाय बताने की कोशिश करेंगे.
चलिए जानते हैं-
सच पूछा जाए तो शारीरिक संबंध बनाना मन के अधीन है. यदि रोगी में कोई तरह की कमी नहीं है तो कोई कारण नहीं कि आप मैथुन नहीं कर सके. यह मानसिक नपुंसकता दवाइयों से नहीं बल्कि मन का बहम निकालने से ठीक हो जाती है. या कोई लड़की उस लड़के की प्रशंसा करे तो भी वह ठीक हो जाता है.
मैथुन के समय यदि उसका चतुर पार्टनर उसकी तारीफ करें कि वाह खूब मैथुन करता है. उसके मैथुन से पूर्ण आनंद प्राप्त होता है तो उस लड़के की मानसिक नपुंसकता दूर हो जाएगी और वह खूब अच्छी तरह से शारीरिक संबंध बनाने में कामयाब हो जाएगा.

यदि आप एक चिकित्सक हैं और आपके पास कोई नपुंसक आए तो सबसे पहले आप यह देखें कि कहीं उसको बहम ही तो नहीं है यदि उसको मानसिक नपुंसकता है तो युक्ति से काम लीजिए वह ठीक हो जाएगा. क्योंकि मैथुन का मान बहम से घनिष्ठ संबंध हुआ करता है.

आप इस सूत्र का प्रयोग करें-
1 .सबसे पहले रोग के कारण को दूर करें.
2 .रोगी के मन को मजबूत करें, रोगी को आप आश्वासन दें कि तुम्हारा रोग बहुत मामूली है कुछ भी नहीं है कौन कहता है कि तुम नामर्द हो. तुम तो अच्छे खासे मर्द हो, सुंदर हो, तुम्हें तो मामूली सी धातु दुर्बलता है जो थोड़े ही दिनों में अवश्य ठीक हो जाएगी.
3 .आप रोगी को कहें कि वह कानों को आनंद देने वाले अनेक प्रकार के मधुर गाने सुने, चटकीले- भड़कीले वस्त्र पहने, चाहे समझ में आए या ना आए अंग्रेजी फिल्में अवश्य देखें. यदि कोई लड़का या महिला गलती से उसकी तरफ देख लेगी तो आप के रोगी की सोती हुई नशे जगने लगेगी. वह माया मनोहर कहानियां अरुण जैसे मासिक पत्र पढ़ें. इनकी प्रेम कहानियों को पढ़कर उसके शरीर में कंपन अनुभव होगा. उसकी सोई हुई कामनाएं जागेगी.
4 .चिकित्सा करने से पहले रोगी का पेट साफ करने के लिए मृदु विरेचन दें और रोगी का संशोधन, स्नेहन, स्वेदन, वमन, विरेचन और नश्य आदि द्वारा शरीर का सारा विकार निकालकर रोगी के शरीर को शुद्ध कर देना चाहिए.
5 .इलाज शुरू करने से पहले यदि रोगी को कब्ज की समस्या हो तो उसे विरेचन औषधियां नहीं दें बल्कि एनिमा द्वारा उसका पेट को साफ करने का उपाय करें.
6 .नपुंसकता के रोगी को प्रमेह, स्वप्नदोष अवश्य रहता है. जब तक वे रहेंगे तब तक आपका रोगी मर्द नहीं बन पाएगा. क्योंकि नपुंसकता में पौष्टिक तथा उत्तेजक चीजें खिलानी पड़ती है और यह प्रमेह तथा स्वप्नदोष इनसे बढ़ते हैं. इसलिए पहले प्रमेह और स्वप्न दोष को दूर कीजिए.
7 .यदि आपने रोगी की पाचन क्रिया ठीक कर दी है तो समझ लीजिए कि आधे से ज्यादा बाजी आप ने जीत ली है. पाचन क्रिया ठीक हो जाने से उसको खाया पिया पचने लगेगा और नया खून उसके शरीर में उत्पन्न होगा.
8 .अगर आप रोगी की नपुंसकता की इलाज कर रहे हैं तो शरीर के सभी संस्थानों की ओर ध्यान दें. जब उसके शरीर के सभी संस्थान ठीक प्रकार से काम करने लगेंगे तभी वह पूर्ण स्वस्थ हो सकेगा.
9 .शारीरिक और पाचन शक्ति ठीक हो जाने के बाद रोगी को वीर्य विकार नाशक धातु पोस्टिक औषधिया दें. साथ में लिंग पर लगाने के लिए कोई न कोई तेल या तिला आदि अवश्य दें.

स्रोत- एलोपैथी चिकित्सा गाइड से ली गई है

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