कैसे जाने कि आ रहा बुखार टाइफाइड है? जानें इसके कारण, लक्षण और शर्तिया आयुर्वेदिक इलाज

कल्याण आयुर्वेद- मौसम बदलने के साथ-साथ कई बीमारियां होने शुरू हो जाते हैं. जिनमें से टाइफाइड भी शामिल है. टाइफाइड में मरीज को तेज बुखार आता है. वैसे बुखार मलेरिया, डेंगू या वायरल इंफेक्शन के कारण भी हो सकता है. लेकिन टाइफाइड का बुखार इनसे अलग होता है. इसलिए यदि एक-दो दिन में ही बुखार नहीं उतर रहा है तो आपको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि बुखार के सही कारणों का पता चलने के बाद ही आपका बेहतर इलाज संभव है.

कैसे जाने कि आ रहा बुखार टाइफाइड है? जानें इसके कारण, लक्षण और शर्तिया आयुर्वेदिक इलाज

टाइफाइड कैसे होता है?

सबसे पहले तो आपको यह जानना जरूरी है कि आखिर टाइफाइड बुखार होता कैसे हैं? डेंगू और मलेरिया तो जैसा कि सब जानते हैं कि मच्छर के काटने से होता है और टाइफाइड का मुख्य कारण है दूषित पानी या भोजन.

एक्सपर्ट के मुताबिक टाइफाइड सालमोनेला टायफी नामक बैक्टीरिया के कारण होता है. भारत में टाइफाइड की बीमारी बहुत ही आम है. इसे कई जगहों पर मोतीझरा या मियादी बुखार के नाम से भी जाना जाता है. समय पर इलाज न करवाए जाए तो टाइफाइड जानलेवा भी हो सकता है?

टाइफाइड की मुख्य लक्षण-

चिकित्सकों के अनुसार किसी भी बीमारी का पता उसके लक्षणों के आधार पर ही लगाया जाता है, इसलिए आपको लक्षणों के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए? यदि आपको कई दिनों से बुखार आ रहा है तो आपके लिए यह समझना जरूरी है कि क्या यह सामान्य है या टाइफाइड बुखार है?

तो चलिए जानते हैं टाइफाइड के कुछ लक्षणों के बारे में-

सिर दर्द, बहुत अधिक बुखार 104 डिग्री तक होना, शरीर में ऐठन एवं दर्द होना, भूख नहीं लगना, जी मिचलाना, दस्त और कब्ज की शिकायत होना, पेट में दर्द होना, कफ की समस्या होना आदि लक्षण सामने आते हैं.

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक यदि आपका बुखार दो-तीन दिनों में भी नहीं उतरता है और आपको बुखार के साथ ही उपरोक्त बताई गई समस्याओं में से कुछ समस्याएं है तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए और कुछ भी दवाई लेने की बजाय आपको डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए.

टाइफाइड बुखार में डाइट का भी रखें खास ध्यान-

डॉक्टरों के मुताबिक टाइफाइड में बैक्टीरिया आंतों को प्रभावित करते हैं. इसलिए उसमें डाइट का भी खास ध्यान रखने की जरूरत होती है. भारी, तला- भूना, मसालेदार खाने से परहेज करना चाहिए और अधिक से अधिक तरल पदार्थ और फलों का सेवन करना अधिक लाभदायक होता है.

करें इन चीजों का सेवन-

ताजे फल जैसे- सेब, मौसमी, अनार, अंगूर, पपीता आदि खाएं.

हरी सब्जियां जैसे- पालक, पत्ता गोभी, फूल गोभी, गाजर, कच्चा पपीता, लौकी, करेला आदि खाना फायदेमंद होता है.

यदि आपको सर्दी- खांसी की समस्या नहीं है तो डाइट में दही को जरूर शामिल करें. यह काफी फायदेमंद होता है.

टाइफाइड में तरल पदार्थ का अधिक सेवन करना चाहिए, इसलिए नारियल का पानी, फलों का जूस आदि पीते रहें.

पाचन तंत्र को ठीक रखने के लिए आप गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पी सकते हैं. ध्यान रहे पूरे दिन से उबाला हुआ ही पानी पिएं.

बुखार उतर जाने के बाद भी कुछ दिनों तक कमजोरी आपका पीछा नहीं छोड़ता है इसलिए पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेते रहें. किशमिश, मुनक्का, मूंग दाल खिचड़ी, दलिया आदि का सेवन करें.

इन चीजों से बना ले दूरी-

चाय, कॉफी और अन्य कैफीन युक्त चीजों से परहेज करें, क्योंकि इनसे गैस की समस्या हो सकती है?

रिफाइंड, प्रोसेस फूड, ज्यादा तेल- मसाले वाला खाना से परहेज करें.

घी, तेल, बेसन, मक्का, शकरकंद, कटहल, ब्राउन राइस आदि का सेवन नहीं करें.

* लाल मिर्च, चिली सॉस, विनेगर, गरम मसाला, अचार आदि के साथ गर्म तासीर वाली चीजों से परहेज रखें. मांसाहारी से भी परहेज रखें, पनीर और डेयरी प्रोडक्ट का भी सेवन न करें.

टाइफाइड बुखार का आयुर्वेदिक इलाज-

1 .महासुदर्शन चूर्ण या गोली का सेवन करें- इसके लिए दो गोली सुबह और दो गोली शाम पानी से.

2 .अमृतारिष्ट का सेवन करें- इसके लिए 15 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह- शाम पानी के साथ लें.

महासुदर्शन चूर्ण या गोली और अमृतारिष्ट का सेवन करने से किसी भी तरह के बुखार में लाभ होता है. खासकर टाइफाइड बुखार के लिए यह किसी रामबाण से कम नहीं है. इन दोनों के सेवन करने से तुरंत ही बुखार उतरने लगता है.

नोट- यदि आप टाइफाइड का इलाज करा चुके हैं और कमजोरी महसूस कर रहे हैं तो भी इनका सेवन करना फायदेमंद होगा, लगातार 1 से 2 महीने इनका सेवन कर लेने से टाइफाइड बुखार जल्दी नहीं होता है. यह आजमाया हुआ आयुर्वेदिक दवा है.

यह पोस्ट शैक्षनिक उद्देश्य से लिखा गया है, किसी भी प्रयोग से पहले योग्य डॉक्टर या वैद्य की सलाह अवश्य लें और जानकारी अच्छी लगे तो लाइक, शेयर जरूर करें. धन्यवाद.

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