कमर की चर्बी को खत्म कर लचकदार बनाना चाहते हैं तो आज से ही शुरु कर दें यह काम, फिर देखें चमत्कार

कल्याण आयुर्वेद- आज के समय में पेट निकलने और कमर की चर्बी बढ़ने की समस्या से ज्यादातर लोग परेशान रहते हैं और यदि आपकी कमर और पेट लचकदार तथा संतुलित है तो स्फूर्ति और जोश तो कायम रहेगा ही साथ ही आप कई रोगों से बचे भी रहेंगे. अनियमित और अत्यधिक खान-पान के कारण कमर को कमरा बनने में देर नहीं लगती है. कमर के छरहरा होने से व्यक्ति ठीक तो नजर आता ही है साथ ही उसमें स्फूर्ति भी बनी रहती है तो आज हम आपको कमर को छरहरा बनाए रखने के लिए उपाय बताने जा रहे हैं. जिसकी मदद से आप कमर को कमरा बनने से रोक सकते हैं और खुद को स्फूर्तिवान बना सकते हैं?

कमर की चर्बी को खत्म कर लचकदार बनाना चाहते हैं तो आज से ही शुरु कर दें यह काम, फिर देखें चमत्कार

करें यह उपाय-

स्टेप 1- कटिचक्रासन करें. सावधान मुद्रा में खड़े हो जाएं फिर दोनों हाथों को कमर पर रखकर कमर के पीछे की ओर जहां तक संभव हो झुककर वहां रुके. अब सांस की गति सामान्य रखकर आंखें बंद कर लें और कुछ देर इसी पोजीशन में रुकने के बाद वापस आ जाएं. चार- पांच बार दोनों ओर से इसका अभ्यास करें. 

स्टेप 2- इसके बाद पुनः सावधान मुद्रा में खड़े होकर दाएं हाथ को बाएं कंधे पर और बाएं हाथ को दाएं कंधे पर रखकर पहले दाई ओर कमर से पीछे की ओर मुड़े. गर्दन को भी मोड़कर पीछे की ओर देखें. अब सांस की गति सामान्य रखकर आंखे बंद कर लें और कुछ देर इसी पोजीशन में रुकने के बाद वापस आ जाएं. चार- पांच बार दोनों ओर से इसका अभ्यास कर लें. इसी तरह बाई ओर मुड़कर भी अभ्यास करें.

स्टेप 3- सावधान मुद्रा में खड़े होकर फिर हथेलियों को पलट कर हाथों को ऊपर उठाकर समानांतर क्रम में सीधा कर लें. सांस लेते हुए कमर को बाई और झुकाए इसमें हाथ भी साथ-साथ बाई ओर चले जाएं. अधिक से अधिक कमर झुकाकर वहां रुके. अब सांस की गति सामान्य रहकर आंखें बंद कर लें और कुछ देर इसी पोजीशन में रुकने के बाद वापस आ जाएं. चार- पांच बार दोनों ओर से इसका अभ्यास कर लें.

स्टेप 4- शवासन में लेट कर पहले दोनों हाथ समानांतर क्रम में फैला ले फिर दाएं पैर को बाईं ओर ले जाएं और गर्दन को मोड़ कर दाएं ओर देखें इस दौरान बाया पैर सीधा हो. फिर इसी क्रम में इसका विपरीत करें. चार-पांच बार दोनों ओर से इसका अभ्यास कर लें.

इसके फायदे- कमर की चर्बी को कम करता है. इसके साथ ही कब्ज व गैस की समस्या को दूर करके किडनी, लीवर, आंतों, पैंक्रियाज को भी स्वस्थ बनाए रखने में सक्षम है.

ऊपर बताए गए योगा के अलावा आप चाहें तो वृक्षासन, ताड़ासन, त्रिकोणासन, पादहस्तासन, आंजनेय आसन और वीरभद्रासन भी कर सकते हैं? लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि किसी योग्य योग शिक्षक की सलाह के अनुसार इसके करम और विलोम आसन को समझते हुए ही करें.

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