इस लक्षण से जानें गर्भ में लड़का है या लड़की ?

कल्याण आयुर्वेद- एक महिला को गर्भधारण करते ही उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता है. लेकिन गर्भधारण करने के बाद हर महिला की यह लालसा होती है कि हमारे गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की. हालांकि एक महिला के लिए लड़का या लड़की जो भी हो उसके लिए सभी प्यारे होते हैं. हालांकि आजकल विज्ञान इतना आगे हो चुका है कि गर्भ में पलने वाला शिशु लड़का है या लड़की. इसका पता लगाना आसान हो चुका है. लेकिन यह कानूनन जुर्म होता है. लेकिन कुछ ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं जिससे आप आसानी से जान सकते हैं कि आपके गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की.

इस लक्षण से जानें गर्भ में लड़का है या लड़की ?
तो चलिए जानते हैं विस्तार से-

गर्भ में लड़का है या लड़की इस संबंध में पर्याप्त अनुसंधान हो चुके हैं. इनका पता अब आसानी से 3 माह के बाद लगाया जा सकता है. काफी दिन पहले शिकागो के डॉक्टर गस्टव डब्लू रेप तथा डॉक्टर गारवूड सी रिचार्डसन 6 माह की गर्भवती महिलाओं के लिंग का पता उनकी लाल की परीक्षा से लगाया था कि अमुक स्त्री के गर्भ में पुत्र है अथवा पुत्री. इसमें पूर्ण सफल भी हुए थे. उनके परीक्षण में जीन गर्भवती महिलाओं की लार पॉजिटिव निकली थी उनमें अधिकांश को नर बच्चे पैदा हुए थे और जिनकी लार नेगेटिव निकली थी उन्हें पुत्रियां पैदा हुए थे.

अब नवीन उपकरणों द्वारा 3 माह के गर्भ में यह पता लगाया जा सकता है कि गर्भ में शिशु लड़का है अथवा लड़की. गर्भाशय से गर्भ का एक साधारण टिशु लेकर इसका परीक्षण किया जाता है. यह परीक्षण शत प्रतिशत सही निकला है.

आचार्य वाग्भट के अनुसार-

अगर महिला की सब चेष्टाएँ, सब क्रियाएं यदि बाएं अंग से अधिक प्रकट हो, बाए पसली की तरफ गर्भ का संचय अधिक हो, बाएं स्तन से दूध पहले निकले तो गर्भ में कन्या समझनी चाहिए.

पहले दाहिने स्तन में दूध आने, पहले दाहिने अंग से चलने, काम में दाहिने हाथ को ही आगे बढ़ाने, पुरुष नाम वाली वस्तुओं की अधिक इच्छा प्रकट करने और दाहिनी कुक्षी के ऊंची होने से गर्भ में पुत्र की उत्पति समझनी चाहिए.

डॉक्टर जास्टन का विचार-

यदि भ्रूण के ह्रदय स्पंदन 130  प्रति मिनट से अधिक हो तो गर्भस्थ शिशु को कन्या समझें और यदि गर्भ के हृदय का स्पंदन 130 से कम हो तो पुत्र समझना चाहिए.

यह लेख स्त्रीरोग चिकित्सा से ली गयी है.

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