असफल होने से बचने के लिए जरूरी है सहिष्णुता, एक बार जरुर पढ़ें हर संकट हो जाएगी दूर

धर्मशास्त्र- जीवन के किसी भी क्षेत्र में काम करते समय प्रतिकूलताएँ उपस्थित होती ही है. बना- बनाया निष्कंटक राजमार्ग किसी को कभी नहीं मिला है. व्यवहारिक जीवन में सर्वथा भले आदमियों का संग मिलना और अनुकूलताएँ सामने आना संभव नहीं, झगड़ालू, दुष्ट प्रकृति के लोगों से बचने को कितना भी यत्न किया जाए पर उनसे नित्य ही संबंध आता ही है. उनके दूर वचनों, अशोभनीय व्यवहारों के प्रति असहिष्णु हो जाने पर मन की शांति निरंतर भंग होती है एवं कार्य भली-भांति संपन्न नहीं हो पाता है. शांत और संतुलित मन स्थिति बनाए रखने के लिए सहिष्णु नितांत आवश्यक होती है.

असफल होने से बचने के लिए जरूरी है सहिष्णुता, एक बार जरुर पढ़ें हर संकट हो जाएगी दूर

असहिष्णु से संपूर्ण शरीर थरथराने सा लगता है. इस बीच उक्त मनः स्थिति में क्रोध उभर सकता है और अनुचित कार्य हो सकता है. आवेगो से बचने के लिए सहिष्णुता का होना जरूरी है.

कई बार प्रतिकूल परिस्थितियों में ही कार्य करते रहना पड़ता है. उनके प्रति असहिष्णु बने रहने से मन में आवेग उठते हैं और चित्त को विचलित करते रहते हैं. इससे कार्य सिद्धि अधिक कठिन हो जाती है. जीवन में प्रतिकूलतावों के बीच भी मानसिक संतुलन बनाए रखने हेतु सहिष्णुता एक महत्वपूर्ण साधन है.

हथेली पर सरसों जमे देखने की चाहत वाली बाल-बुद्धि में सहिष्णुता और धैर्य कहां से आए, जीवन में जिन्होंने भी विशिष्ट सफलताएं अर्जित की है वे सभी धैर्यवान और सहिष्णु रहे हैं. सहिष्णुता समुद्र किसी गंभीरता का नाम है. इसमें तमाम बाधाएं प्रतिकूलताओं की बड़ी-बड़ी चट्टानें भी बिना व्यापक उथल-पुथल उत्पन्न किए समा जाती है. असहिष्णुता की स्थिति में लिए गए निर्णय में प्रतिक्रिया का भाव विशेष रहता है.

सुसंस्कृत व्यक्ति सदा सहिष्णु होता है क्योंकि वह जानता है कि विश्व व्यवस्था ऐसी ही है कि यहां अनुकूलतम के साथ ही प्रतिकूलताएं भले लोगों के साथ बुरे लोग पुष्प के साथ कांटो का भी अस्तित्व होता है और हम उनसे बचकर नहीं रह सकते हैं. पारिवारिक जीवन तो सहिष्णुता के बगैर चल ही नहीं सकता, क्योंकि घर के प्रत्येक सदस्यों की प्रवृत्तियों में विभिनता स्वाभाविक होती है.

सहिष्णुता का व्यापक पैमाने पर प्रयोग महात्मा गांधी ने किया और उनके चमत्कारी परिणाम विश्व के समक्ष आये. उनकी सहिष्णुता का प्रभाव ब्रिटिश शासकों पर भी पड़ा और अनेकों प्रबुद्ध अंग्रेज, प्रशंसक सहयोगी उनके अनुयाई भक्त बन गए.

इस लेख का सार यह है कि हर परिस्थिति में धैर्य यानि सहन शक्ति हो तो कोई भी बाधा को पार किया जा सकता है.

स्रोत- अखंड ज्योति-

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