आयुर्वेद- मौसम और शारीरिक जरूरत के अनुसार ही सेवन करें भोजन

कल्याण आयुर्वेद- आयुर्वेद में खानपान को समय और मौसम के अलावा शारीरिक प्रकृति के आधार पर ही निर्धारित किया गया है. भोजन में सभी रस शामिल होते हैं. ये रस मीठा, नमकीन, खट्टा, कड़वा और कसैला है.

आयुर्वेद- मौसम और शारीरिक जरूरत के अनुसार ही सेवन करें भोजन

जाड़े में तिल से बने पदार्थों का सेवन करें, तिल का लड्डू या तिलकुट खाएं. इसके अलावा सोंठ का लड्डू प्रतिदिन खाएं, मेथी का लड्डू फायदेमंद होता है, इससे ठंड से बचाव होता है.

सब्जियों को पकाने में अधिक समय न लगाएं, सब्जियां न अधिक पक्की हो और ना ही कच्ची हो. ऐसी सब्जियों का सेवन करें.

चीनी के जगह पर शहद या गुड़ लें. मैदे के जगह पर चोकर युक्त आटा और दलिया खाएं.

अदरक का एक छोटा सा टुकड़ा लें और उसे तवे पर भुन लें ठंडा होने पर इस पर थोड़ा सा सेंधा नमक लगाएं. अब इस टुकड़े को भोजन करने की 5 मिनट पहले खा लें. इसके सेवन से भूख बढ़ती है और पाचन क्रिया सही रहती है. इससे आपके द्वारा सेवन किए गए भोजन का पाचन अच्छी तरह से होता है.

जंक फूड में सोडियम, ट्रांसफैट और शर्करा प्रचुर मात्रा में होती है. ऐसे फूड लेने से परहेज करें.

हमेशा न खाएं ऐसी चीजें-

सप्ताह में बार-बार पनीर ना खाएं. सप्ताह में दो या तीन बार ही दही खाएं, प्रतिदिन दही खाने से मोटापा, जोड़ों का दर्द, डायबिटीज आदि बीमारियां हो सकती है. दही में गुड़ मिलाकर खाएं. जिन्हें जोड़ों का दर्द हो, एलर्जी हो वह दही और केला नहीं खाए तो बेहतर होगा.

ये फूड एक साथ कभी न लें-

आयुर्वेद में खानपान की कुछ चीजों का कॉन्बिनेशन सही नहीं माना गया है. जैसे- दूध और दही एक साथ नहीं खाना चाहिए. फल के साथ दूध का सेवन नहीं करना चाहिए. ज्यादा ठंडी दही के साथ गर्म पराठे का सेवन न करें. दूध के साथ ऐसी चीजों का सेवन न करें जिसमें नमक मिला हुआ हो.

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