वैज्ञानिक शोध में दावा- तनाव लेने वाले इंसानों में कम हो सकता है कोरोना वैक्सीन का असर

कल्याण आयुर्वेद- कोरोनावायरस महामारी का कहर अभी भी जारी है. इस बीच कोरोना रोकथाम के लिए दुनिया भर में लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है. दुनिया के कई देशों में वैक्सीन टीकाकरण अभियान की शुरुआत हो चुकी है. भारत में भी 16 जनवरी से टीकाकरण की शुरुआत होने जा रही है. इस बीच कोरोना वैक्सीन और इसके  असर को लेकर दुनिया के वैज्ञानिक शोध में लगे हुए हैं.

वैज्ञानिक शोध में दावा- तनाव  लेने वाले इंसानों में कम हो सकता है कोरोना वैक्सीन का असर

वैज्ञानिकों ने एक शोध में दावा किया है कि डिप्रेशन और तनाव जैसी परेशानियों से कोरोना वैक्सीन के असर में कमी आ सकती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि डिप्रेशन, तनाव और अकेलापन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकते हैं और इस कारण कोरोना वैक्सीन ऐसे व्यक्ति के शरीर पर कम प्रभावकारी हो सकती है.

जर्नल पर्सपेक्टिव इन साइकोलॉजिकल साइंस में प्रकाशन के लिए स्वीकार की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक टीकाकरण से पहले 24 घंटे का व्यायाम और एक अच्छी रात की नींद प्राप्त करना सहित सरल हस्तक्षेप टीके की प्रारंभिक प्रभावशीलता को अधिकतम कर सकते हैं.

वैज्ञानिकों ने कहा है कि भले ही कठोर परीक्षण से पता चला है कि अमेरिका में अनुमोदित कोविड-19 वैक्सीन एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया का उत्पादन करने में अत्यधिक प्रभावी है. लेकिन हर व्यक्ति के अंदर तुरंत इसका असर देखने को नहीं मिल पाएगा.

शोधकर्ताओं ने कहा है कि पर्यावरणीय कारकों साथ ही एक व्यक्ति के अनुवांशिकी और शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ( इम्यून सिस्टम ) को कमजोर कर सकते हैं और एक वैक्सीन की प्रतिक्रिया को धीमा कर सकते हैं.

अमेरिका में ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के एक शोधकर्ता केली मैडिसन ने कहा कि कोविड-19 के भौतिक टोल के अलावा महामारी में एक समान रूप से परेशान मानसिक स्वास्थ्य घटक है जो कई अन्य संबंधित समस्याओं की भी चिंता और अवसाद का कारण बनता है. इस लेख के प्रमुख लेखक मेडिसन ने कहा कि इस तरह के भावनात्मक तनाव एक व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली ( इम्यून सिस्टम ) को प्रभावित कर सकते हैं? संक्रमण को दूर करने की उनकी क्षमता को खराब कर सकते हैं?

 स्रोत- जागरण.

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