इस तरह रोजाना करें भोजन, बने रहेंगे अधिक उम्र तक ख़ूबसूरत और जवान

कल्याण आयुर्वेद- स्वस्थ शरीर के लिए हमें बहुत तरह के चीजों की आवश्यकता पड़ती है. जैसे- अच्छे खान-पान, साफ-सुथरे कपड़े, अच्छे रहन-सहन इत्यादि आज हम इस पोस्ट के माध्यम से स्वस्थ शरीर के लिए कुछ भोजन के नियम के  बारे में बात करने जा रहे हैं.




तो चलिए जानते हैं विस्तार से-

कार्य करने से शरीर के शक्ति की वृद्धि होती है. उसकी पूर्ति और शरीर को पोषण के लिए भोजन की जरूरत पड़ती है. यथा क्षुधा, प्यास, नींद और युवावस्था में काम चेष्टा का होना स्वाभाविक है. शरीर के इन वेगों को रोकने से स्वाभाविक है कि शरीर में बीमारियां और कमजोरी होती है. अतः जल, अन्न और नारी संघ उचित सेवन करें.

हमारा शरीर पांच तत्वों से बना हुआ है तथा खाद्य पदार्थ भी पांच तत्वों से बने हुए हैं. किसी पदार्थ में जल तत्व, तो किसी पदार्थ में पृथ्वी या आग्नेय आदि तत्व अधिक होते हैं. कोई पदार्थ उष्ण वीर्य है तो कोई सीत वीर्य है. कोई पदार्थ मधुर, लवण, कटु तथा चपरा है. इन रसों में से एक या अधिक रस है. इसलिए आहार रस से तत्काल शरीर का पोषण होता है. बल, बुद्धि, स्मृति, आंसू और उत्साह की वृद्धि होती है. अग्नि 3 प्रकार की होती है. नंद, सम और तीक्ष्ण. आहार पर प्रायः सवेरे 10:00 बजे के पहले और शाम 7:00 बजे के पहले लेना चाहिए. किंतु जब भूख लगे तब भी भोजन करना चाहिए. यदि बीच में भूख लगे तो बीच में भी खाना चाहिए. प्रायः नियम से भोजन करना चाहिए. भोजन गृह- स्वच्छ, सुंदर और पुष्प आदि से सजाया हुआ हो, वातावरण शांत हो, मन एकाग्र और क्रोध, भय, चिंता आदि से मुक्त हो और प्रसन्न हो. वातावरण संगीतमय हो तो खाया हुआ हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होता है.

भोजन में चावल, गेहूं, भाजिया, टमाटर, मूली, गाजर, स्निग्ध पदार्थ, दूध, दही, मांस, मछली आदि होने चाहिए. प्रतिदिन एक सा आहार का सेवन नहीं करना चाहिए. प्रत्येक दिन बदल- बदल कर आहार सेवन करना चाहिए. इससे हमारे शरीर को सभी तरह के तत्व प्राप्त होते हैं. जिससे शरीर को पोषण मिलता है और हमें स्वस्थ रहने में मदद मिलती है.



भोजन के पहले आर्द्रक और सेंधव, सोडा खाना चाहिए. प्यासा अधिक लगी है तो पहले पानी पीकर थोड़ी देर बाद खाना खाना चाहिए. भोजन के बीच- बीच में थोड़ा- थोड़ा पानी पीना चाहिए. भोजन करते समय पहले ठोस फिर नरम और अंत में तरल पदार्थ का सेवन करना चाहिए. पहले मधुर रस वाले, फिर खट्टे रस वाले और खारे, पीछे कटु और तीक्ष्ण का रस वाले पदार्थ का सेवन करना चाहिए. दूध सबसे पीछे पीयेन.

पेट का दो भाग भोजन से 1 भाग पानी से और एक भाग खाली होना चाहिए. परिपाक के लिए आहार के बाद हाथ, और मुंह अच्छी तरह से साफ करना चाहिए. जैसे- दातों में खाए हुए पदार्थ ना रह जाए, गिले हाथ से आंखों को स्पर्श करें, भोजन के पश्चात पान, लोंग, इलायची, सौंफ आदि का सेवन करना चाहिए. इससे भोजन को पचाने में आसानी होती है.

भोजन करने के बाद धीरे-धीरे सौ कदम चलना चाहिए. फिर पहले सीधा सोकर 8 सांस लें. फिर दाहिने करवट होकर 24 सांस लें. फिर बाई करवट लेकर 16 सांस लें. फिर यथेष्ट सोयें. बाया करवट लेकर सोने से भोजन का शीघ्र पाचन होता है.

अजीर्ण में यानी पेट में किसी तरह की गड़बड़ी हो तो भोजन ना करें. भूख न लगने पर भी भोजन नहीं करना चाहिए. भोजन के तुरंत बाद फिर से भोजन नहीं करना चाहिए. स्वादिष्ट भोजन और अच्छे भोजन का लोभ करके अधिक नहीं खाना चाहिए.

बांसी, सड़ा, गला या कच्चा पदार्थ खुला पदार्थ एक दूसरे के विरुद्ध व्यंजन जैसे कि मछली और दूध नहीं खाना चाहिए. इससे हमारे शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ता है और हमारा शरीर रोगी हो जाता है.

भोजन करके दौड़ना, कसरत करना, संभोग करना, पढ़ना, गाना और तुरंत सोना नहीं चाहिए. खाना खाने के कम से कम आधा घंटा तक यह काम ना करें.

भोजन करने के बाद जो मन को अच्छा लगे ऐसे गीत- संगीत सुनें.

अग्नि अनुसार यानी आप पाचन के अनुसार भोजन का सेवन करें. खाने को एक बार गर्म करने के बाद पुनः गर्म करके नहीं खाएं. खाने के पदार्थ को अच्छी तरह रखें.

महीने में एक दो बार उपवास करना हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होता है.

दिन में सोना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है. केवल ग्रीष्म ऋतु में ही सोए या जो रात में जागरण किया हो, थका हुआ हो, व्यायाम किया हो, उपवास में हो, संभोग कर चुका हो, बालक, वृद्ध, बिमार और जिसे दिन में सोने की आदत हो वह सुख पूर्वक दिन में सोए.

आपको बताते चलें कि ऊपर बताए गए नियम को पालन करने से हमारा स्वास्थ्य ठीक रहता है क्योंकि इससे हमारे शरीर की आवश्यकताओं की पूर्ति होती है. और हम अधिक उम्र तक ख़ूबसूरत और जवान बने रह सकते हैं.

Post a Comment

0 Comments