जानें- अफारा होने के कारण, लक्षण और दूर करने के घरेलू उपाय

 कल्याण आयुर्वेद- यह आध्मान, अफारा, वायु एकत्रित होना, पेट फूलना, पेट में गैस होना आदि नामों से जाना जाता है.

जानें- अफारा होने के कारण, लक्षण और दूर करने के घरेलू उपाय 
अफारा या गैस बहुधा पाई जाने वाली शिकायत है. यह गैस जब मुंह से डकार के रूप में निकलती है. तब उसे आमाशयी आध्मान कहते हैं और जब नीचे से निकलती है तब उसे आन्त्रिय आध्मान कहते हैं.
जानें- अफारा होने के कारण, लक्षण और दूर करने के घरेलू उपाय 
जठरांत्र पथ में गैस के एकत्रित होने की अवस्था को फ्लेट्यूलेंस कहते हैं. अजीर्ण मन्दाग्नि तथा अतिसार के परिणाम स्वरुप पेट में वायु एकत्रित होकर पेट फूल जाता है तथा पेट में अफारा हो जाता है. जब तक पेट स्थित वायु बाहर नहीं निकलती है रोगी को काफी कष्ट एवं बेचैनी होती है. इसमें रोगी का दिल तेजी से धड़कता है. सांस लेने में कठिनाई होती है. मन घबराता है. पेट में दर्द और गैस की समस्या होती है. गैस एकत्रित होने से उदर प्रदेश की नसें तन जाती है.

अफारा होने के कारण-

आहार का भली-भांति नहीं पचना.

पित्त की न्यूनता के कारण आहार के किंविकरण तथा दूषित वायु के अत्यधिक निर्माण से.

मलबद्धता होने से.

आँतों की शिथिलता के कारण उदर में संचित वायु का निष्कासन ना होना.

संक्रामक व्याधियों में विशेषकर आंतरिक ज्वर, निमोनिया, मस्तिष्क आवरण शोथ आदि में तीव्र विषमयता के कारण.

वायु भक्षण या वायु निगरन.

रुक्ष अंश युक्त खाद्य पदार्थों की अधिक मात्रा में सेवन करने से.

अमीबा रोग रुग्णता यानी पेट में कीड़े होने से.

अमाशय आंत्र एवं यकृत के पाचन में सहायक स्राव की कमी होने से.

काईम में उपस्थित कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन की की किन्वीकरण से भी गैस उत्पन्न होती है.

कुछ व्यक्तियों में अधिक मात्रा में अधोवायु निकलती है. यदि वह दुर्गंधित है तो समझना चाहिए कि प्रोटींस का की किन्वीकरण हो रहा है. जिसके लिए छोटी आंत की गति का अधिक होना अथवा अग्नाशय रस की अल्पता या क्रिया क्षीणता उत्तरदाई है.

ऐसे रोग जो आंत्र की गति में बाधा डालते हैं. यकृत तथा फेफड़ों में रक्त प्रवाह की कमी से भी अफारा की बीमारी होती है.

अफारा होने के लक्षण-

अफारा होने पर पेट में वायु भर जाता है और पेट फूल जाता है. घबराहट तथा बेचैनी होती है. श्वसन क्रिया में रोगी को बाधा उत्पन्न होता है. पेट की नसें तन जाती है.

मलावरोध होता है. छाती में जलन होता है. छाती में गैस का दबाव पड़ने से दिल की गति अधिक हो जाती है.
पेट में गुड़गुड़ाहट महसूस होता है. डकार आने के साथ-साथ गुदा मार्ग से वायु निकलती है. मल त्याग करते समय भी वायु आवाज के साथ निकलती है. वायु के निकल जाने से राहत महसूस होता है.

सिर दर्द चक्कर आना, नाड़ी दुर्बलता आदि लक्षण होते हैं.

अफारा दूर करने का आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपाय-

1 .लवन भास्कर चूर्ण खाना खाने के बाद खाने से अफारा से राहत मिलती है.

2 .शंख वटी या अग्निकुमार रस या लहसुन आदि वटी या संजीवनी वटी या विषतिन्दुक वटी दो गोली दिन में तीन से चार बार पानी के साथ लेने से अफरा दूर होता है.

3 .अमृतधारा दो बूंद एक ग्लास पानी में मिलाकर पीने से अफारा से राहत मिलती है.

4 .नींबू का रस 50 ग्राम, अदरक का रस 50 ग्राम, काला नमक 10 ग्राम, शहद 50 ग्राम सबको मिलाकर इसमें से 10 से 15 ग्राम दिन में तीन बार सेवन करने से अफारा दूर होता है.

5 .सप्ताह में 1 दिन उपवास रखना अफारा में फायदेमंद होता है.

6 .रात को खाना खाने के बाद 2 चम्मच इसबगोल की भूसी सेवन करने से अफारा से राहत मिलती है.
जानें- अफारा होने के कारण, लक्षण और दूर करने के घरेलू उपाय 
7 .पुदीना की पत्तियों को पीसकर रस निकाल लें. 5 ग्राम रस में थोड़ा सा काला नमक मिलाकर पीने से अफारा दूर होती है.
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8 .3 पीस लौंग 200 ग्राम पानी में उबालकर पीने से अफारा से छुटकारा मिलता है.

9 .अदरक का एक टुकड़ा गुड़ के साथ खाने से आफारा की बीमारी ठीक होती है.
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10 .50ml अंगूर के रस में 5 ग्राम मिश्री और 2 ग्राम जवाखार मिलाकर पीने से अफारा दूर होता है.

11 .पुदीने का रस 50 ग्राम, नींबू का रस 10 ग्राम, एक ग्लास पानी में मिलाकर पीने से अफारा ठीक होता है.

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