जानें- महिलाओं को पेशाब में रुकावट होने के कारण, लक्षण और ठीक करने के घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपाय

 कल्याण आयुर्वेद- मुत्रावारोध, मुत्रसंग, मूत्र निरोध, पेशाब में रुकावट आदि नामों से जाना जाता है.

मूत्र की मात्रा स्वाभाविक रूप से बनते रहने पर भी मूत्राशय की दुर्बलता अथवा मूत्र मार्ग में अवरोध के फल स्वरुप मूत्र उत्सर्ग ना हो सकने की अवस्था में यह स्थिति उत्पन्न होती है. अर्थात इस अवस्था में मूत्र निर्मित होकर मूत्राशय में एकत्रित होता रहता है. परंतु महिला मूत्र त्याग करने में असमर्थ रहती है.

मुत्रावरोध होने के कारण-

प्रायः मूत्र मार्ग के संकुचन अथवा मूत्र मार्ग में रक्त की अधिकता के कारण मूत्र निरोध होता है. शीत एवं मद्यपान के कारण रक्त की अधिकता होती है. मूत्र मार्ग में बाल्यावस्था के अंतर्गत बाहरी पदार्थ के प्रवेश से रुकावट हो जाती है. मध्य अवस्था में मूत्रमार्ग के संक्रमण होने तथा पूयमेह होने के कारण होता है. वृद्धावस्था में मूत्राशय की शिथिलता के कारण मूत्र निरोध हो जाता है.


जानें- महिलाओं को पेशाब में रुकावट होने के कारण, लक्षण और ठीक करने के घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपाय

महिलाओं में हिस्टीरिया तथा मूत्राशय पर ट्यूमर का दबाव पड़ने के कारण मूत्र निरोध हो जाता है. नव युवतियों में मूत्र मार्ग अथवा मूत्राशय में बाह्य पदार्थ की उपस्थिति एक प्रधान कारण होता है. वृद्धावस्था में महिलाओं में गर्भाशय में अर्बुद अथवा अन्य किसी कारणवश मूत्राशय अथवा मूत्र मार्ग पर दबाव पड़ने के कारण मूत्र का अवरोध हो जाता है. सूतिका काल के प्रारंभिक कुछ दिनों में, उदर या श्रोणि में शस्त्र कर्म करने से आंशिक रूप से मूत्र की रुकावट हो जाती है. गर्भाशयोछेदन योनि- सुधार आदि शस्त्र कर्मों में मुत्रवारोध विशेष रूप से मिलता है. सुषुम्ना अथवा मस्तिष्क किसी केंद्र के बीच होने से भी मुत्रावरोध हो जाता है.

गर्भाशय ग्रीवा की अर्बुदों, बीज ग्रंथि के अर्बुदों, गर्भाशय के अर्बुदों के कारण जो श्रोणि प्राचीर से चिपके रहते हैं. मूत्र मार्ग को लंबा कर देते हैं. जिससे वस्ती ग्रीवा हट जाती है और मुत्रावरोध रोग हो जाता है. गलत ढंग से लगाई गई पेसरी भी मुत्रावरोध का कारण बन जाती है क्योंकि यह मूत्र मार्ग पर दबाव डालती है. भग एवं योनि कर्कटों के विस्तार से भी मुत्रावरोध हो जाता है. वस्ति गत पथरी, मूत्राशय में अर्बुद से भी मुत्रावरोध हो जाता है.

कई बार सरविक्स एवं यूरेथ्रा का कैंसर भी मुत्रावरोध का प्रमुख कारण बनता है.

मुत्रावरोध रोग के लक्षण-

जब मूत्र मार्ग में किसी रूकावट के कारण मुत्रावरोध होता है तो रुकावट की जगह मूत्रमार्ग फट जाता है. इसके कारण पास के तंतु में मूत्र भर जाता है. इसी प्रकार मूत्राशय में किसी घाव आदि के भी बन जाने से मूत्राशय की दीवार फट जाती है और मूत्र बाहर आने लगता है. जब मूत्राशय में साधारण रुकावट होती है तो आंशिक रूप से थोड़ा-थोड़ा मूत्र टपकता रहता है. यदि मूत्र पर्याप्त समय तक मूत्राशय में रुका रहता है तो उसमें सूजन आ जाती है जिसे सिस्टाइटिस कहते हैं.

मुत्रावरोध रोग की आयुर्वेदिक इलाज-

1 .मुत्रावरोध रोग की चिकित्सा में कारण का निवारण करते हुए. दशमूल क्वाथ, वरुणादि क्वाथ, बृहत वरुणादि क्वाथ, शुंठयादि क्वाथ तथा ककायण बटी का प्रयोग करना चाहिए. गोक्षुरादि गुग्गुल या गोक्षुरादि बटी का सेवन करना चाहिए.

2 .श्वेत पर्पटी 480 मिलीग्राम से 960 मिलीग्राम की मात्रा में दें. अथवा आवश्यकतानुसार अवस्था को ध्यान में रखते हुए एक बार सुबह शीतल जल या नारियल के पानी या 120 मिलीग्राम कपूर को जल में मिलाकर उसके साथ दें. आधे कच्चे दूध और आधे पानी की लस्सी का अनुमान भी देना अच्छा रहता है.

3 .पेडू पर पलाश के फूल को कांजी या गोमूत्र में उबालकर गरम- गरम लेप करने से पर्याप्त लाभ मिलता है.

4 .कलमी शोरा, नौसादर तथा कपूर 2-2 ग्राम की मात्रा में लेकर 100 मिलीलीटर जल में मिलाकर कपड़े को भिगोकर नाभि के नीचे कुछ समय तक रखने से तीव्र मुत्रावरोध में लाभ होता है मूत्र होने लगता है.

5 .कलमी शोरा तथा कपूर पीसकर भीगी हुई रुई में लपेटकर नाभि पर रखने से शीघ्र लाभ होता है. रुई के ऊपर बीच- बीच में एक दो बूंद जल भी डालते रहना चाहिए.

मुत्रावरोध की सामान्य अवस्था में निम्न योग फायदेमंद होता है.

6 .जवाखार 240 मिलीग्राम, सर्जिकाक्षार 240 मिलीग्राम, मुली खार 240 मिलीग्राम, पुनर्नवा क्षार 240 मिलीग्राम, पाषाण बदर पिष्टी 240 मिलीग्राम कुल मिलाकर एक मात्रा गोक्षुरादि क्वाथ, मिश्री मिलाकर तीन-तीन घंटे पर देने से मूत्र रोग में लाभ होता है.

7 .240 मिलीलीटर नारियल के पानी में 1 ग्राम कलमी शोरा या 3 ग्राम श्वेतपर्पटी तथा 24 ग्राम ताल मिश्री मिलाकर पिलाने से मूत्र की उत्पत्ति होने लगती है.

8 .पेडू पर मिट्टी की पट्टी रखना, टब में गर्म पानी भरकर उसमें रोगी को बैठाना, उष्ण कटी स्नान कराना तथा वस्ति के द्वारा मलाशय की शुद्धि करना मुत्रावरोध में पर्याप्त लाभ पहुंचाता है.

9 .जवाखार, भुनी हुई फिटकिरी, शीतल मिर्च, धनिया, कदलीक्षार, छोटी इलायची, मिश्री 12-12 ग्राम लेकर सबको कूट पीसकर चूर्ण बना लें. अब इस चूर्ण में से 6 ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार शीतल जल के साथ सेवन कराएं. इसके सेवन करने से मुद्रा व रोग दूर होता है.
नोट- ऊपर बताए गए औषधियां पुरुषों के मूत्र अवरुद्ध में भी लाभदायक है.
यह आलेख आपकी जानकारी के लिए है. ऊपर बताए गए किसी भी औषधि का सेवन व इस्तेमाल करने से पहले किसी जानकार चिकित्सक से सलाह लें और लाभ उठाएं.

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