जानें- स्तनों के अत्यधिक छोटा रह जाने के कारण, लक्षण और बड़ा करने के घरेलू उपाय

कल्याण आयुर्वेद- महिला के स्तन अत्यधिक छोटे हो जाते हैं. यहां तक कि उनमें उभार तक नहीं दिखता है. उसमें दूध भी बहुत कम मात्रा में आता है. साथ ही महिला की सौंदर्य तभी खत्म हो जाती है. ऐसी ज्यादातर महिलाएं बांझ होती हैं. छोटे स्तनों वाली महिला से अन्य महिला तथा उसका ही पति उससे कभी- कभी घृणा करने लगता है.

जानें- स्तनों के अत्यधिक छोटा रह जाने के कारण, लक्षण और बड़ा करने के घरेलू उपाय 
स्तनों का अत्यधिक छोटे होने का कारण-

शारीरिक दुर्बलता, रक्त विकार, स्तनों के पालन-पोषण के लिए रक्त की पूरी मात्रा में स्तनों तक नहीं पहुंचना आदि कारणों से स्तनों का पूर्ण विकास नहीं हो पाता है. महिला हार्मोन की कमी से भी स्तन छोटे रह जाते हैं. महिला की जननेंद्रिय में जन्मजात भीतरी खराबी होने से भी स्तनों का विकास सामान्य रूप से नहीं हो पाता है. स्तनों को रक्त पहुंचाने वाली वाहिनियों में जब कोई फोरेइग्न बॉडीज आकार उसके मार्ग को अवरुद्ध कर देती है. तो स्तनों को पूर्ण रूप से विकसित होने का समय ही नहीं मिल पाता है.

स्तन छोटे होने के लक्षण-

इसमें कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं. केवल स्तन ही आकार में छोटे होते हैं और उसमें या तो दूध आता ही नहीं है या आता भी है तो बहुत कम आता है.

छोटे स्तनों को विकसित करने का आयुर्वेदिक चिकित्सा-

1 .स्तनों को विकसित करने के लिए मुख्य कारणों को सबसे पहले दूर करें एवं महिला को आयरन युक्त चीजों का अधिक मात्रा में सेवन कराएं.

2 .असगंध, काली मिर्च, सोया के बीज, कड़वी कूठ सभी चीजों को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर पाउडर बना लें. अब इसे भैंस के घी में मिलाकर लेप तैयार करें. इस लेप को स्तन पर 40 दिन तक लगाते रहें. इससे स्तनों का पूर्ण विकास होता है. इसके साथ ही महिला को दूध, मक्खन, अनार, आम, सेब आदि पर्याप्त मात्रा में सेवन कराते रहें.

3 .मेथी का तेल हथेली पर लेकर स्तनों पर प्रतिदिन रात को सोने से पहले मालिश करने से स्तनों का विकास होता है. क्योंकि मेथी में प्राकृतिक रूप से एस्ट्रोजेनिक हारमोंस होता है जो स्तनों को विकास में मदद करता है. इसके अलावा मेथी की तेल की मालिश करने से सीने की आसपास की त्वचा फैलती है. इसलिए प्रतिदिन स्तनों पर मेथी तेल की मालिश करने से स्तनों का विकास होने लगता है.


4 .एक कप पानी में एक चम्मच सौंफ डालकर इसे उबालें. 10 मिनट उबालने के बाद इसे आंच से उतारकर ठंडा होने दें. ठंडा होने पर एक चम्मच शहद मिलाकर इसे पिए. दिन में कम से कम 2 बार प्रतिदिन पीने से स्तनों का विकास होने लगता है क्योंकि साथ में फ्लेवोनॉयड्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. जिससे एस्ट्रोजेनिक गतिविधि होती है. इसके पीने से शरीर में एस्ट्रोजन का उत्पादन बढ़ जाता है. जिससे स्तनों के विकास में मदद मिलती है.

5 .सुखा हुआ दूब घास को एक कप पानी में डालकर उबालें. 10 मिनट उबालने के बाद इसे आंच से उतार कर ठंडा होने पर छानकर इसमें स्वादानुसार शहद मिलाकर पिए. दिन में तीन से चार बार पीना चाहिए. यह स्तनों के विकास में फायदेमंद होता है. क्योंकि दूब में आइसोफ्लेवोन्स पाया जाता है जो शरीर के अंदर एस्ट्रोजन की तरह कार्य करता है. इसके अलावा दूब में फाइटोन्यूट्रिएंट्स भी मौजूद होते हैं. जिसे जेनिस्टीन कहा जाता है. इन यौगिकों की उपस्थिति के कारण स्तनों का विकास होता है.


6 .प्रतिदिन जैतून की तेल मालिश करने से स्तनों का विकास होता है.


7 .स्तनों का सुरक्षित विकास के लिए फलों का सेवन फायदेमंद होता है. विटामिन ए, विटामिन B3, विटामिन सी और विटामिन के ना सिर्फ स्वास्थ्य लाभ पहुंचाता है. बल्कि स्तनों के विकास में भी मददगार होता है. आपको बता दें कि विटामिन ए कोलेजन के उत्पादन में मददगार होता है जो स्तनों को मजबूत करने में मदद करता है. विटामिन B3 आपके रक्त परिसंचरण को ठीक करने में मदद करता है. जिससे स्तनों के विकास में मदद मिलती है. विटामिन सी कोलेजन पैदा करता है जो स्तनों की कोशिकाओं को हाइड्रेटेड रखता है इससे शरीर के हारमोंस संतुलित रहते हैं और स्तनों के आकार को विकसित करने में मदद मिलती है. वही विटामिन के कोलेस्ट्रॉल के स्तर को ठीक रखता है. इसलिए यह सभी विटामिन युक्त चीजों का सेवन करना स्तनों को बढ़ाने में फायदेमंद होता है.

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