खुनी एवं बादी बवासीर को जड़ से खत्म करने के रामबाण घरेलू उपाय, सिर्फ 7 दिन में ही हो जायेगा ठीक

कल्याण आयुर्वेद- बवासीर जिसे अंग्रेजी भाषा में पाइल्स कहा जाता है. यह बहुत ही तकलीफ देने वाली बीमारी है. जो कब्ज के कारण होती है. बवासीर होने पर मलद्वार में असहनीय दर्द, सूजन, घाव, जलन आदि हो जाते हैं और बवासीर का सही समय पर इलाज नहीं कराने से मलाशय कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है.

खुनी एवं बादी बवासीर को जड़ से खत्म करने के रामबाण घरेलू उपाय, सिर्फ 7 दिन में ही हो जायेगा ठीक

बवासीर आमतौर पर दो प्रकार के होते हैं- खूनी बवासीर और बादी बवासीर. खूनी बवासीर में मल के साथ खून आता है जबकि बादी बवासीर में गुदा के मुंह पर छोटे-छोटे मस्से हो जाते हैं. इसका इलाज नहीं कराने से यह बढ़कर मटर के आकार के फुल कर बड़े हो जाते हैं और कठोर होने लगते हैं.

बवासीर के लक्षण-

मस्सों के बड़े होने पर गुदा में सूजन और जलन सी महसूस होने लगती है, ऐसी स्थिति में मल विसर्जन करते समय काफी दर्द होता है. बवासीर के मस्से की बीमारी के दौरान गुदा के अंदर और गुदा के आसपास की जगह पर सूजन हो जाती है. व खूनी बवासीर होने पर मल के साथ खून आता है. कभी-कभी ऐसे ही खून निकल आता है. गुदा बड़ी आत के नलिका का अंतिम हिस्से को कहा जाता है. आपको बता दें कि लगभग 4 सेंटीमीटर लंबा है. गुदा नलिका के निचले सिरे पर बाहर की ओर खुलता है. बवासीर के मस्से बहुत ही दुख देने वाले होते हैं. कई बार तो मरीज का उठना- बैठना यहां तक कि चलना- फिरना भी मुश्किल हो जाता है. कई बार ऐसा भी होता है कि बादी बवासीर बिना उपचार के ही ठीक हो जाते हैं. लेकिन ज्यादातर मामलों में इसके उपचार की सख्त जरूरत होती है.

बवासीर को दूर करने के रामबाण घरेलू उपाय-

रीठा-

रीठा के फल में से बीज निकालकर शेष भाग को लोहे की कढ़ाई में डालकर आंच पर तब तक गर्म करें, जब तक कि वह जलकर कोयला न बन जाए, जब वह जलकर कोयले की तरह हो जाए तब आंच पर से उतारकर बराबर मात्रा में पपड़िया कत्था मिलाकर चूर्ण बनाकर सुरक्षित रखें, औषधि तैयार है.

अब इसमें से एक रत्ती यानी 125 मिलीग्राम लेकर मक्खन या मलाई के साथ सुबह-शाम सेवन करते रहें. इस प्रकार 7 दिन तक सेवन करने से बवासीर की खुजली, बवासीर से खून बहना, कब्ज आदि दूर होकर बवासीर ठीक हो जाता है.

इस बीमारी से सदा के लिए छुटकारा पाना चाहे तो 6 महीने के बाद फिर 7 दिन का यह कोर्स बिल्कुल इसी प्रकार का लेना चाहिए.

औषधि सेवन के दौरान परहेज-

ध्यान रखें कि औषधि लेते समय 7 दिन तक नमक का बिल्कुल भी सेवन नहीं करना है. देसी इलाज में पथ्य- अपथ्य का विशेष ध्यान रखा जाता है. कई रोगों को तो दूर करने में पथ्य, आहार-विहार भी कारगर होता है.

औषधि सेवन के दौरान इन चीजों का सेवन करें-

मूंग, चने की दाल, कुलथी की दाल, पुराने चावल का भात, साठी चावल, बथुआ, परवल, करेला, कच्चा पपीता, गुड़, दूध, घी, मक्खन, काला नमक, सरसों आदि सेवन करना हितकर है.

औषधि सेवन के दौरान इन चीजों से रखें परहेज-

उड़द, सेम, भारी तथा भूने पदार्थ, घीया, धुप या अपान वायु को रोकना, साइकिल की सवारी, मैथुन करना, कड़े आसन पर बैठना आदि बवासीर के लिए हानिकारक है.

इसके अलावा यह उपाय करें-

* हल्दी का लेप- हल्दी को कड़वी तोरई के रस में लेप बनाकर मस्सों पर लगाने से सब तरह के मस्से नष्ट हो जाते हैं. इसमें अगर नीम का तेल या कोई भी कड़वा तेल मिलाकर मस्सों पर लगाया जाए तो अधिक फायदेमंद होता है.

* नीम का तेल- नीम का तेल को बवासीर के मस्सों पर लगाने से एवं चार-पांच बूंद प्रतिदिन पीने से काफी आराम मिलता है. नीम का तेल आपको आसानी से पंसारी की दुकान में मिल जाता है.

* नीम का बीज- नीम के बीजों की गिरी को लेकर गुड़ के साथ एक गिरी प्रतिदिन सुबह खाली पेट 7 दिन तक चबाकर खाने से खूनी एवं बादी बवासीर जड़ से खत्म हो जाते हैं.

नोट- बवासीर एक गंभीर समस्या है, जिसको नजरअंदाज करना आपको भारी पड़ सकता है. यह समस्या गंभीर होने पर यह उपाय काम नहीं करेंगे. इसलिए बेहतर है कि आप शुरुआत में ही इन उपायों का इस्तेमाल करके बवासीर खत्म कर दें.

यह पोस्ट शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है, प्रयोग से पहले किसी योग्य डॉक्टर की सलाह जरूर लें. धन्यवाद.

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