गर्भावस्था के दौरान हो सकती है जेस्टेशनल डायबिटीज, जानें बचने के तरीके

कल्याण आयुर्वेद- गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को कई तरह की मानसिक एवं शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इस दौरान महिलाओं में कई तरह की बीमारियां हावी होने लगती है. इसलिए गर्भावस्था के दौरान हर महिला को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए. गर्भावस्था में जेस्टेशनल डायबिटीज होना भी एक आम समस्या है.

गर्भावस्था के दौरान हो सकती है जेस्टेशनल डायबिटीज, जानें बचने के तरीके

आपको बता दें कि जेस्टेशनल डायबिटीज गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में हो जाती है. इसकी कई वजह हो सकते हैं. जैसे- हार्मोन्स में बदलाव, सही खान-पान ना लेना, ज्यादा तनाव लेना आदि.

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में इंसुलिन के उतार-चढ़ाव से भी गर्भकालिन डायबिटीज हो सकता है. पाचन प्रक्रिया के दौरान खाया हुआ भोजन कार्बोहाइड्रेट से ग्लूकोज में बदल जाता है और शारीरिक ऊर्जा प्रदान करता है. हमारा शरीर ऊर्जा को दैनिक गतिविधियों के लिए उपयोग करता है. सामान्यतः अग्नाशय में उत्पादित इन्सुलिन इस शर्करा को कोशिकाओं तक ले जाने में मदद करता है और शरीर में शर्करा के स्तर को बढ़ने से रोकता है.

गर्भावस्था के दौरान गर्भनाल का निर्माण होता है जो मां से विकसित होते शिशु तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति को पूरा करता है. हालांकि गर्भनाल अपनी कार्य के साथ कई हार्मोन उत्तेजित करती है जो मां के प्राकृतिक हार्मोनल तंत्र में हस्तक्षेप करते हैं. इसे इंसुलिन के उत्पादन को बाधित करने और हस्तक्षेप करने के लिए जाना जाता है. जिसके परिणाम स्वरूप रक्त शर्करा के स्तर में बढ़ोतरी होती है और इसे परिवर्तित करने के लिए पर्याप्त इंसुलिन नहीं होता है. यह एक ऐसा समय होता है जब एक गर्भवती महिला गर्भकालिन डायबिटीज से प्रभावित होती है.

महिलाओं में गर्भकालिन डायबिटीज होने का एक अन्य बड़ा कारण महिला का वजन भी हो सकता है. यह देखा गया है कि शरीर के इंसुलिन प्रतिरोधी होने के साथ-साथ मोटापे का सीधा संबंध है. यदि गर्भाधान से पहले गर्भवती महिला का वजन अधिक है तो उसे गर्भकालिन मधुमेह होने की संभावना अधिक हो सकती है. गर्भावस्था के दौरान वजन पर नियंत्रण रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है.

लेकिन आपको जानकर खुशी होगी आज के समय में प्रेगनेंसी का पता चलते ही लोग डॉक्टरी सलाह लेना शुरू कर देते हैं और आपकी डॉक्टर आपकी गर्भावस्था के दौरान आपकी डायबिटीज पर पूरी नजर रखती हैं. इसके लिए पहली और दूसरी तिमाही में दो डायबिटीज टेस्ट किए जाते हैं. अगर यह किसी महिला में पाई जाती है तो उनका इलाज किया जाता है. इसलिए गर्भावस्था के दौरान अपनी डॉक्टर की सलाह जरूर मानें. अपनी डायबिटीज को कंट्रोल में रखें.

गर्भावस्था में डायबिटीज से बचने के तरीके-

1 .गर्भावस्था के दौरान आपको डायबिटीज होने का खतरा अभी हो या ना हो आप निश्चित रूप से इससे प्रभावित होने के खतरे को कम कर सकती हैं. डायबिटीज के प्रभाव को कम करने के लिए आपको स्वस्थ आहार व नियमित व्यायाम जरूर करना चाहिए.

2 .नियमित भोजन में डाइटरी फाइबर शामिल करें, इसके लिए आहार जैसे साबुत अनाज, ताजी सब्जियां और फलों का सेवन बढ़ा सकती हैं. आप प्रतिदिन दिनभर में लगभग 10 ग्राम तक फाइबर का सेवन बढ़ाकर गर्भकालिन डायबिटीज के खतरे को लगभग 26% तक कम कर सकती हैं.

3 .मीठे पदार्थों का सेवन और कार्ब युक्त भोजन का सेवन ना करें, चटर-पटर या जंक फूड खाकर भूख को ना मिटाएं.

4 .एक बार खूब सारा भोजन करने से अच्छा है कि एक से ज्यादा बार करके थोड़ा- थोड़ा भोजन करें.

5 .विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों को शामिल करें, ताकि आपको रोजाना अपने आहार में सभी आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में प्राप्त हो सके.

6 .अपनी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधियों को भी शामिल करें, गर्भावस्था के दौरान सक्रिय रहने से डायबिटीज के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है. गर्भवती महिलाओं को तैराकी और टहलने की अधिक सलाह दी जाती है. अपने स्वास्थ्य गर्भावस्था की स्थिति के आधार पर आप हल्के व सरल व्यायाम करें. प्रतिदिन व्यायाम की दिनचर्या को निर्धारित करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें.

7 .गर्भावस्था के पहले और बाद में वजन को नियंत्रित रखने से रक्त शर्करा के स्तर को बनाए रखने में मदद मिलती है.

नोट- यह पोस्ट शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर की सलाह लें और यह जानकारी अच्छी लगे तो लाइक, शेयर जरूर करें. धन्यवाद.

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