डायबिटीज में घबराहट और गुस्सा क्यों बढ़ जाती है? जानें विस्तार से

कल्याण आयुर्वेद- आजकल मोटापा, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां आम होते जा रही है. इस बीमारी से ना सिर्फ पुरुष परेशान रहते हैं बल्कि महिलाएं भी परेशान रहती हैं यानी महिला व पुरुष यह बीमारियां सामान्य रूप से होती है. आज हम आपको डायबिटीज में घबराहट और गुस्सा क्यों बढ़ जाती है के बारे में बताएंगे.

डायबिटीज में घबराहट और गुस्सा क्यों बढ़ जाती है? जानें विस्तार से

चलिए जानते हैं विस्तार से-

आज के समय में डायबिटीज अपना पांव तेजी से पसार रहा है, जिससे महिला व पुरुष काफी प्रभावित हो रहे है. डायबिटीज का पता चलते कुछ लोगों की भावनाएं एकदम से बदल जाती है और वे उदास रहने लगते हैं. खानपान को लेकर भी वे शर्मिंदगी महसूस करने लगते हैं. डायबिटीज के मरीज अक्सर चाहते हैं कि लोग उनसे उनकी सेहत के बारे में पूछे और सहानुभूति जताए. लेकिन इसी वजह से वे कभी-कभी चिड़चिड़ा भी हो जाती हैं.

तो आइए जानते हैं डायबिटीज और भावनाओं के बीच संबंध कैसा है?

डायबिटीज में असमंजस-

डायबिटीज के रोगियों के लिए यह जानना आवश्यक है कि उनके लिए क्या सही है और क्या गलत? लेकिन अक्सर आहार विशेष चुनते समय में असमंजस में फंस जाते हैं कि उनके लिए क्या सही है और क्या गलत है. सामान्यतः हर कोई डायबिटीज के मरीजों को सलाह देता रहता है. लेकिन जरूरी यह है कि असमंजस में ना फंसे और सीधे डॉक्टर से संपर्क करें और उनके द्वारा दिए गए दवा एवं सलाह मानें. इसके अलावा आप उनसे यह भी सलाह लें कि उनके लिए कौन सा एक्सरसाइज सही रहेगा.

डायबिटीज में शर्मिंदगी-

 अक्सर डायबिटीज के मरीज पार्टी आदि जगहों में जाते हैं तो खान-पान के प्रति उन्हें बेहद ही सावधान रहना होता है, दूसरों के सामने तमाम चीजें नहीं खा पाते हैं. इससे उन्हें शर्मिंदगी का अहसास होता है. लेकिन उन्हें शर्मिंदगी महसूस नहीं करना चाहिए, क्योंकि आज के समय में वे अकेले ऐसे मरीज नहीं है जिन्हें डायबिटीज की समस्या है. ऐसे सैकड़ों, लाखों लोग हैं जो डायबिटीज से ग्रसित है. आपको किसी भी पार्टी फंक्शन में ऐसे लोग मिल जाएंगे जो इस बीमारी से ग्रसित हैं. उनके साथ रहे, वह जो खा रहे हैं वही खाए. इसके अलावा मौजूदा समय में पार्टियों में तमाम ऐसे किस्म के आहार भी शामिल होते हैं जो मधुमेह के मरीजों के लिए उपयुक्त है. अतः उन्हें को चुने और पार्टी का आनंद लें यानी आप शर्मिंदगी महसूस ना करें बल्कि भूल जाएं.

डायबिटीज में उदासी-

अक्सर डायबिटीज हो जाने पर लोग उदासी के शिकार हो जाते हैं. उनके अंदर नकारात्मक सोच बढ़ जाती है और वे तनाव लेने लगते हैं, कुल मिलाकर कहने का मतलब है कि यदि डायबिटीज के मरीज उदास हैं तो यह उनके लिए अच्छी बात नहीं है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप इस से लड़ नहीं सकते हैं. आपको चाहिए की उदासी को खत्म करें. लेकिन कैसे? जाहिर है अपने आप को किसी अन्य काम में व्यस्त रहें, जरूरी नहीं है कि डायबिटीज है तो अपनी हाबी को खत्म कर दिया जाए. खानपान में भी ज्यादा कटौती की आवश्यकता नहीं है. हालांकि डॉक्टर की सलाह लें और खानपान में बदलाव करें. यकीन मानिए यदि जीवन शैली अच्छी रहेगी तो उदासी आपके आसपास भी नहीं भटकेगी.

डायबिटीज में घबराहट-

पहले- पहले बार डायबिटीज का पता चलने पर अक्सर लोग घबरा जाते हैं. क्योंकि डायबिटीज को मैनेज करना शुरू- शुरू में बहुत मुश्किल होता है. डॉक्टर जब मरीज से उनके बारे में जानना चाहते हैं तो यह और भी घबरा जाते हैं. ऐसी स्थिति में जरूरी है कि मरीज अपनी इस बीमारी को सहजता से ले. जरूरी नहीं है कि डायबिटीज हो गया तो उनकी जिंदगी बेकार हो गई. आपको बताते चलें कि डायबिटीज पूर्णतः आपकी जीवन शैली पर आधारित बीमारी है. जीवन शैली को नियंत्रित रखें. यह बीमारी अपने आप संभल रहेगी. इससे घबराने की कोई जरूरत नहीं है.

डायबिटीज में गुस्सा-

डायबिटीज में गुस्सा बढ़ जाना बहुत ही आम बात है. किसी भी बीमारी के प्रति गुस्सा आ सकता है. डायबिटीज के मरीज को जब छोटी-छोटी चीजों को खाने से भी परहेज करना पड़ता है तो उन्हें गुस्सा बढ़ जाता है. यदि आपने इस बीमारी के प्रति गुस्सा, क्रोध, आवेश है तो उसका इस्तेमाल ऊर्जा के रूप में करें. गुस्सा का उपयोग करें और एक्सरसाइज करें ताकि आपकी बीमारी को ठीक होने में मदद मिले. डायबिटीज में एक्सरसाइज बहुत ही अच्छा विकल्प है. इससे आपका डायबिटीज नियंत्रण में रह सकता है.

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