आर्थिक तंगी से हैं परेशान या फिर कन्या का नहीं हो पा रहा है विवाह तो गुप्त नवरात्रि में करें यह उपाय, हर मनोकामनाएं होगी पूरी

ज्योतिष शास्त्र- ज्यादातर लोग दो ही नवरात्रि के बारे में जानते हैं. चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि. लेकिन आपको बता दें कि साल में चार नवरात्रि होती है. जिसमें दो गुप्त नवरात्रि होती है जो माघ मास के शुक्ल पक्ष और आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में आती है. विशेष सिद्धियों की प्राप्ति के लिए इन नवरात्रि में माता के काली रूप और 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है. इस दौरान किए जाने वाले मंत्र जाप और पाठ वगैरह को पूरी तरह से गुप्त रखा जाता है. इस वर्ष  यानी 2021 में माघ मास की गुप्त नवरात्रि 12 फरवरी से शुरू हो रही है और 21 फरवरी तक चलेगी. इस दौरान कुछ विशेष उपाय करके आप सभी मनोकामनाओं की पूर्ति कर सकते हैं.

आर्थिक तंगी से हैं परेशान या फिर कन्या का नहीं हो पा रहा है विवाह तो गुप्त नवरात्रि में करें यह उपाय, हर मनोकामनाएं होगी पूरी

चलिए जानते हैं विस्तार से-

आर्थिक तंगी से छुटकारा पाने के लिए-

यदि आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं तो गुप्त नवरात्रि के दौरान किया गया उपाय आपके लिए काफी लाभदायक सिद्ध हो सकता है. लेकिन इसे करते समय कोई आपको ना देखें, गुप्त नवरात्रि के किसी भी दिन सभी कार्यों से निवृत्त होकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके पीले आसन पर बैठ जाएं. अब तेल का 9 दीपक जला लें. इनमे इतना तेल डालें कि यह दीपक साधना काल तक जलता रहे.

आप दीपक के सामने रोली से रंगे लाल चावल की एक ढेरी बनाएं. उस पर एक श्री यंत्र स्थापित करें. अब कुमकुम, फूल, धूप और दीप से पूजन करें. इसके बाद एक प्लेट पर स्वस्तिक बनाकर उसे अपने सामने रखकर उसका पूजन करें. इसके बाद श्री यंत्र को अपनी पूजा स्थल पर स्थापित कर लें और शेष सामग्री को नदी में प्रवाहित कर दें. पूजा स्थान पर नियमित श्री यंत्र की पूजा करें. इससे आय के रास्ते खुलेंगे और आर्थिक तंगी से छुटकारा मिलेगी.

मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए-

यदि कन्या का विवाह नहीं हो पा रहा है या मनपसंद वर नहीं मिल पा रहा है तो गुप्त नवरात्रि के दौरान किसी भी दिन शिव मंदिर में जाएं. वहां भगवान शिव और मां पार्वती पर जल व दूध चढ़ाएं और पंचोंप्चार चंदन, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर पूजन करें. इसके बाद कलावा लेकर दोनों का गठबंधन कर दें.

इसके बाद लाल चंदन की माला लेकर हे गौरी शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकर प्रिया और मां कुरु कल्याणी कांत कांतां सुदुर्लभाम इन दोनों मंत्रों का 108- 108 बार जप करें. इस जप को 3 महीना तक जारी रखें, आप इसे मंदिर या घर के पूजा स्थल पर कर सकती हैं. लेकिन जप के साथ पंचोपचार पूजा भी करना आवश्यक है.

नोट- यह पोस्ट शैक्षणिक उदेश्य से लिखा गया है, विशेष जानकारी के लिए किसी योग्य ज्योतिष की सलाह लें. धन्यवाद.

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