अगर बच्चा पढ़ने में है काफी कमजोर तो बसंत पंचमी के दिन करें यह छोटा सा उपाय, फिर देखें चमत्कार

धर्मशास्त्र- वसंत ऋतु के आगमन पर विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती को समर्पित है. बसंत पंचमी का त्यौहार बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है. इस दिन मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा की जाती है. कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने मां सरस्वती को वरदान दिया था कि बसंत पंचमी के दिन आपकी आराधना की जाएगी. इस सरस्वती पूजा उत्सव से कई रोचक तथ्य भी जुड़े हुए हैं.

अगर बच्चा पढ़ने में है काफी कमजोर तो बसंत पंचमी के दिन करें यह छोटा सा उपाय, फिर देखें चमत्कार

बसंत पंचमी के दिन से ही होली के त्यौहार की औपचारिक शुरुआत हो जाती है. इस दिन पतंग उड़ाने की परंपरा है और यह परंपरा वीर हकीकत राय के बलिदान का स्मरण करने से भी जुड़ी हुई है. लाहौर में यह घटना हुई थी. माता शबरी के जूठे बेर प्रभु श्रीराम बसंत पंचमी के दिन ही खाए थे. बसंत पंचमी के दिन पृथ्वीराज चौहान शब्दभेदी बाण चलाकर मोहम्मद गौरी का वध किया था.

वसंत पंचमी के दिन ही राजा भोज के जन्मदिवस को भी मनाया जाता है. राजा भोज इस दिन आम जनता के लिए बहुत बड़े भोज का आयोजन कराते थे. जिसमें 40 दिनों तक पूरी प्रजा भोजन करती थी. वसंत पंचमी के दिन ही बच्चों की शिक्षा का आरंभ किया जाता है. इस दिन मां सरस्वती को खुश करने के लिए पीले वस्त्र धारण किए जाते हैं.

वसंत पंचमी में काले और लाल रंग के वस्त्र धारण कर मां सरस्वती की पूजा ना करें, ऐसा माना जाता है कि इस दिन सांप को दूध पिलाने से परिवार में सुख और समृद्धि का आगमन होता है. मां सरस्वती की पूजा में वाद्ययंत्र और किताबें रखें. बच्चों को भी पूजा में शामिल करें. बच्चों को पुस्तकें उपहार में दें. पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें. सफेद पुष्प, चंदन आदि से विधि विधान के साथ माँ सरस्वती की पूजा- अर्चना करें.

अगर आपका बच्चा पढ़ाई में कमजोर है तो बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा कर हल्दी को एक कपड़े में बांधकर बच्चे की भुजा में बांध दें. ऐसा कहा जाता है कि इससे बच्चे का दिमाग तेज होता है और वह पढ़ाई में अब्बल रहता है. माता सरस्वती की उपासना से मन शांत होता है और बाणी में भी निखार आता है.

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