जानें- महिलाओं में होनेवाले 11 गुप्त रोग एवं लक्षण

कल्याण आयुर्वेद- महिलाओं में यौन रोग होना कोई बड़ी बात नहीं है. पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में यौन रोग होने की संभावना अधिक होती है. यौन रोगों के संक्रमण विशेष रूप से जननांग में खुजली या यूटीआई, बदबू, सफेद दाग, फंगल इंफेक्शन आदि महिलाओं में आम यौन संचारित रोग है.

जानें- महिलाओं में होनेवाले 11 गुप्त रोग एवं लक्षण
गुप्त रोगों के कारण-

यौन रोग होने का मुख्य कारण असुरक्षित यौन संबंध और जानकारी का अभाव, इंजेक्शन व स्तनपान आदि है. इसके अलावा शारीरिक संबंध से जुड़ी कई बातें हैं जो यौन रोगों को जन्म देती है.
तो चलिए जानते हैं महिलाओं में होने वाले कौन-कौन सी यौन रोग है?
1 .क्लैमीडिया-
महिलाओं में क्लैमीडिया एक बीमारी है जो ट्रेकोमैटिस नामक जीवाणु से होता है.
क्लैमीडिया के लक्षण- पेशाब के दौरान दर्द पेट के निचले हिस्से में दर्द, वेजाइना डिस्चार्ज, संभोग के दौरान योनि मार्ग में दर्द, एक मासिक धर्म से दूसरे मासिक धर्म के बीच रक्त स्राव.
2 .गोनोरिया-
यह रोग बैक्टीरिया से होता है जो कि शरीर में बहुत तेजी से फैलता है. जिसकी वजह से गला, यूरिनल ट्रैक, वजाइना आदि संक्रमित हो जाते हैं.
गोनोरिया के लक्षण- वेजाइना से ब्लड निकलना, यूरिनेशन में दर्द होना, लंबे समय तक रक्त स्राव, वेजाइना और एनस में खुजली होना.
3 .स्कैबीज-
यह रोग सेक्स या एक दूसरे के संपर्क के कारण या संक्रमित व्यक्ति के कपड़े, बिस्तर का उपयोग करने से फैलता है.
स्कैबीज के लक्षण- कलाइयों उंगलियों के बीच दाने और खुजली, गुप्तांगों के आसपास खुजली होना, लाल- लाल दाने व चकत्ते निकलना.
4 .सिफीलिस-
इस संक्रमण का कारण ट्रेपेनेमा पैरीडम सिफिलिस वायरस है. महिलाओं में यह संक्रमण जननांग के बाहरी हिस्से सर्विक्स और गुर्दा पर होता है.
सिफीलिस के लक्षण- चकते होना, मुंह, एनस या वेजाइना में सूजन होना बाद में चरणों में नर्वस और अंगो को हानि.
5 .जेनिटल वार्ट्स-
महिलाओं में आमतौर पर पाए जाने वाला यह रोग एचपीवी यानी ह्यूमन पेपिलोमा वायरस है. इस रोग में महिला के गुप्तांगों पर मस्से हो जाते हैं जो कि त्वचा के रंग के ही होते हैं. इस में खुजली होती है. लेकिन छूने पर दर्द नहीं होता है. ह्यूमन पेपिलोमा वायरस गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का रूप धारण कर सकता है.
जेनिटल वार्ट्स के लक्षण- वेजाइना के ऊपरी अंदर सर्विक्स और एनस पर दाने होना, मासिक धर्म के समय दर्द का होना, गुप्तांग में खुजली होना, सेक्स के दौरान रक्तस्राव होना.
6 .जेनिटल हर्पीज-
इस रोग में संक्रमण छालों या फफोलों की तरह दिखता है. इस संक्रमण से ग्रसित महिला को दौरे में बुखार, थकान, पीठ के निचले हिस्से में दर्द, सूजन होता है.
जेनिटल हर्पीज के लक्षण- गुदा, जननांग और अन्य क्षेत्रों में छोटे- छोटे लाल- लाल दाने होना या छाले होना, जननांग क्षेत्र, जांघों और नितंबों के आसपास खुजली या दर्द होना.
7 .बैक्टीरियल वेजाइनोसिस-
जब महिला के वैजाइना में जीवाणु बढ़ने लगते हैं तो बैक्टीरियल वेजाइनोसिस की समस्या होती है. आमतौर पर इस रोग से ग्रसित महिला में कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं. क्योंकि इस तरह के जीवाणुओं के बढ़ने से कोई नुकसान ही नहीं होता है.
बैक्टीरियल वेजाइनोसिस के लक्षण- योनि मार्ग से सफेद या पीला स्राव आना, तेज बदबू आना, यूरिनेशन में दर्द होना, वेजाइना के बाहरी भाग में खुजली, लाली और सूजन का होना.
8 .कैंडिडा-
कैंडिडा यीस्ट संक्रमण है इस संक्रमण में शुरू में कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं.
कैंडिडा के लक्षण- वेजाइना के आसपास जलन होना, खुजली होना, रेशेज और सूजन होना, योनि मार्ग से गाढ़ा और बदबूदार स्राव होना, यूरिन या सेक्स के समय दर्द का होना.
9 .वाटर वार्ट्स-
यह संक्रमण वायरस से होता है और त्वचा पर बुरा प्रभाव डालता है.
वाटर वार्ट्स के लक्षण- पानी से भरे फफोले, जननांगों, गुदा, जांघों और धड़ पर होना.
10 .एक्टो पैरासिटिक-
यह संक्रमण छोटे परजीवी कीड़े या जून के वजह से होते हैं. यह बालों या त्वचा को प्रभावित करते हैं.
एक्टो पैरासिटिक के लक्षण- तीव्र खुजली और शरीर पर नजर आने वाले चकत्ते का होना.
11 .इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस ( एचआईवी )
एड्स का कारण बनने वाला वायरस एचआईवी कहलाता है. यह रक्त, वजाइना, स्तन के दूध के माध्यम से फैल सकता है.
एचआईवी के लक्षण- हल्का बुखार होना, थकान महसूस होना, मांसपेशियों में दर्द का होना, वजन का कम होना.

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