जानें- बार-बार प्यास लगने के 5 कारण, नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

कल्याण आयुर्वेद- प्यास लगना एक सामान्य प्रक्रिया है. शरीर में जैसे ही पानी का लेवल कम होता है तो प्यास महसूस होने लगती है. निश्चित मात्रा में पानी पीने पर प्यास बुझ जाती है लेकिन अगर पानी पीने के बाद भी सामान्य से अधिक प्यास लग रही है डायबिटीज की तरफ इशारा करता है अधिक प्यास लगती है अधिक पेशाब, दस्त, उल्टी और शरीर से भारी मात्रा में पानी निकल जाता है लेकिन उसके अलावा भी कई कारण हैं जिससे हमें बार-बार पानी पीने की इच्छा होती है.

जानें- बार-बार प्यास लगने के 5 कारण, नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

तो चलिए जानते हैं बार-बार प्यास लगने के पांच कारणों के बारे में-

1 .डायबिटीज- जब ब्लड शुगर का स्तर असामान्य होता है जैसा कि डायबिटीज के मामले में जब किडनी शुगर की अधिकता से निपटने में असमर्थ होती है जब यह होता है तो शरीर में पानी की अधिक मात्रा को हटाते हुए भी शुगर पेशाब में प्रवेश करती है इसकी वजह से शरीर पानी की कमी की स्थिति में रहता है जो स्थिति से जूझ रहे लोगों में अत्यधिक प्यास का कारण बनता है. इसलिए अत्यधिक प्यास के मुख्य कारणों में से एक है टाइप-1 डायबिटीज.

2 .डिहाईड्रेशन- कई बीमारियां हैं जो भी डिहाइड्रेशन का कारण बन सकती है. डिहाइड्रेशन एक ऐसी स्थिति है जब शरीर से निकलने वाले पानी की मात्रा शरीर में मौजूद पानी की मात्रा से ज्यादा हो जाती है. यह स्थिति शरीर को पानी की कमी की तरफ ले जाती है. कुछ प्रमुख बीमारियों में फूड प्वाइजनिंग के साथ-साथ अन्य डायरिया संबंधी बीमारियां हिट, इंफेक्शन शामिल है जो बुखार और जलन पैदा करते हैं. जब शरीर से पानी निकलना शुरू हो जाता है तो सुस्ती, थकान और अत्यधिक प्यास जैसे लक्षण प्रकट हो सकते हैं. इसके अलावा गंभीर डिहाइड्रेशन के मामले में मतली और उल्टी भी हो सकती है. यदि कोई अपने मुंह के जरिए तरल पदार्थ लेने में सक्षम नहीं है तो नसों के जरिए तरल पदार्थ देने की जरूरत पड़ सकती है.

3 .चिंता- एंग्जायटी यानी चिंता के अन्य लक्षणों में से एक है. शुष्क मुंह यानि मुंह का सूखना. जब व्यक्ति किसी चीज के बारे में अधिक चिंतित होता है तो मुंह सूखने लगता है और वह वास्तव में प्यास की तरह महसूस कर सकता है. चिंता यानी एंग्जायटी मुंह से पानी निकाल लेती है और इसे शरीर के अन्य क्षेत्रों में भेज सकती है. यह पेट में एसिड को बढ़ा सकती है जो लार की कमी का कारण बन सकता है. यदि चिंतित महसूस कर रहे हैं तो यह बीमारी भी महसूस कर सकता है.

4 .पसीने का अधिक आना- अत्यधिक गर्म और आर्द्र वाली परिस्थितियों में अधिक पसीना आना कारण हो सकता है. अत्यधिक पानी पीना जो अत्यधिक पसीना, दस्त या यहां तक कि उल्टी का कारण बनता है. जरूरी नहीं है कि अत्यधिक पेशाब के साथ से जुड़ा हो, जैसा की पॉलीडिप्सिया यानी अधिक मात्रा में प्यास लगने के अन्य कारणों के साथ होता है.

5 .पाचन- पाचन की गड़बड़ी के कारण भी व्यक्ति को अधिक प्यास का अनुभव हो सकता है. यह विशेष रूप से दिन या रात के दौरान भारी भोजन के बाद होता है. इसके अलावा तैलीय और मसालेदार भोजन कारण बन सकता है. यह तब होता है जब शरीर की फ्लुएड्स भोजन को पचाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. यह एक मुख्य कारण है कि भारी भोजन के बाद प्यास महसूस करते हैं. हालांकि भोजन के बाद सीधे पानी पीना उचित नहीं है क्योंकि यह सिस्टम में भोजन को संतृप्त करता है और इसे बसा के रूप में इकट्ठा करता है.

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