जानें- मासिक धर्म रुकने के कारण और उसका प्रभाव

कल्याण आयुर्वेद- महिलाओं में मासिक धर्म चक्र की एक निश्चित प्रक्रिया है जो सभी महिलाओं में लगभग एक जैसी ही होती है. इस दौरान महिलाओं के गर्भाशय से रक्त योनि के द्वारा बाहर आता है. जाहिर है कि यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसकी शुरुवात सामान्यतः 10 से 15 वर्ष की आयु की लड़कियों में होती है और ये उनमें यौवन की शुरुआत का एक प्रमुख संकेत है. उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें कई शारीरिक और मानसिक परिवर्तनों से गुजरना पड़ता है. यदि इसके लिए मानसिक रूप से पहले से ही तैयार रहें तो इससे होने वाली परेशानी में कमी आती है. पीरियड्स के करीब पहुँच चुकी किशोरियों में हार्मोनल परिवर्तन अनियमित चक्रों के साथ लंबी माहवारी का कारण हो सकते हैं. आइए इस लेख के माध्यम से हम मासिक धर्म के रुकने के कारणों और उसके प्रभावों पर एक नजर डालें.

जानें- मासिक धर्म रुकने के कारण और उसका प्रभाव
मासिक धर्म के रुकने का कारण-

1. हार्मोनल परिवर्तन - यदि हार्मोनल परिवर्तन के कारण माहावारी में देरी हो रही हो तो भी चिकित्सक के पास जाना ही बेहतर विकल्प है. क्योंकि जांच के बाद ही सही निष्कर्ष निकल सकता है. मासिक धर्म में देरी की एक वजह तनाव, अधिक व्यायाम, वजन घटाने या आहार भी हो सकता है.

2. वजन या मोटापा का बढ़ना - वजन में अत्यधिक वृद्धि या मोटापा भी माहवारी में अनियमितता का एक प्रमुख कारण हो सकता है. इसके अलावा कई बार तो यह समस्या थायरॉइड के कारण भी उत्पन्न होती है. इसलिए डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है.

3. दिनचर्या और खानपान में बदलाव - हमारी दिनचर्या और खानपान में बदलाव के कारण भी कई बार माहवारी देरी से आने की समस्या होती है. ऐसे में अपनी जीवनशैली और डाइट को व्यवस्थित कर आप इसे नियमित कर सकते हैं. जीवनशैली को व्यवस्थित करने से माहावारी की अनियमितता तो ख़त्म होगी ही इसके और भी कई फायदे हैं जिससे कि आप जीवन में ज्यादा खुशहाली ला सकेंगे.

4. पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम - माहवारी देरी से होने का एक गंभीर कारण पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम हो सकता है, अत: ऊपर दिए गए कारणों के अलावा अगर ऐसा होता है तो इसकी जांच जरूर करवाएं. जांच करवा लेने से आप अनावाह्स्यक परेशानी से बच जाते हैं.

5. आवश्यकता से अधिक व्यायाम या तनाव - तनाव एवं जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज भी माहवारी को प्रभावित करने वाला एक बड़ा कारण है. ओवरी यानि अंडाशय पर सिस्ट अर्थात आवरण बन जाने के कारण भी अक्सर ऐसा होता है. किसी भीचीज की अधिकता नुकसानदेह ही साबित होती है. इसलिए संतुलन आवश्यक है.

6. कम उम्र भी हो सकता है जिम्मेदार - कम या अधि‍क उम्र में माहवारी की शरुआत होना कई बार माहवारी में अनियमिता पैदा करता है, जो कि सामान्य बात है. समय के साथ इसका नियमन होता, अत: चिंता की बात नहीं है.

कुछ अन्य समस्याएं - इसके साथ ही इसका कारण कुछ अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं जैसे गर्भाशय फाइब्रॉएड, पॉलीप्स या कैंसर भी हो सकते हैं. पीरियड्स है तो महिलाओं को प्रकृति का विशेष उपहार लेकिन जब यह अनियमित हो जाए तो यह एक समस्या बन जाती है. कई बार तो माहावारी में होने वाली देरी के कारणों का पता भी नहीं लगाया जा सकता है. इसके उचित कारणों का पता लगाने के लिए आपको चिकित्सकीय जांच का सहारा लेना पड़ेगा.

मासिक धर्म के रुकने से उत्पन्न संकेत-
पीरियड्स का एक निश्चित चक्र होता है इसलिए पीरियड्स का रुक जाना गर्भ धारण करने का प्रारंभिक संकेत माना जाता है. लेकिन जाहिर है कि गर्भधारण करने के बाद महिलाओं के शरीर में और भी कई तरह के बदलाव देखे जाते हैं. मतलब यदि आपका पीरियड मिस हो गया है तो आप कैसे निश्चित करेंगी कि ये गर्भ धारण करने का संकेत है या फिर कुछ और कारण है, आइए इसे ठीक से समझें-

1. थकान महसूस होना - जब गर्भ धारण हो जाता है तो शरीर में प्रेजेस्टेरॉन का स्तर बढ़ जाता है. इसकी वजह से आपको अक्सर थकान महसूस हो सकता है. हलांकि इस दौरान कम रक्तचाप और रक्त शर्करा का स्तर भी थकान का कारण बन सकता है.

2. मतली या उल्टी होना - फिल्मों में तो प्रेगनेंसी का ये संकेत भरपूर इस्तेमाल किया जाता है. बिना किसी ख़ास कारण के उल्टी हो तो ये भी प्रेग्नेंट होने का संकेत होता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस दौरान हार्मोन के साथ-साथ फोलिक एसिड की भी कमी हो जाती है. गर्भावस्था के पहले या दुसरे महीने से इसकी शुरुवात हो जाती है.

3. भारी और संवेदनशील स्तन - जाहिर है प्रेग्नेंट होने का मतलब है कि आप माँ बनेंगी और माँ का मातृत्व स्तन से ही है. इसलिए यदि आप गर्भ से होंगी तो आपके स्तन भारी, सूजे हुए और संवेदनशील हो जाएंगे. इसका कारण है कि इस दौरान एस्ट्रोजेन और प्रेजेस्टेरॉन नामक हार्मोन्स के स्तन में परिवर्तन हो जाता है. इस अनुभव को आप माहावारी शुरू होने के अनुभव जैसा ही महसूस करेंगी.

4. सुगंध के प्रति आकर्षण - जाहिर है माँ बनना एक बेहद संवेदनशील काम है. इसलिए इस जिम्मेदारी के आने से पहले आपके शरीर में संवेदनशीलता का स्तर बढ़ जता है. और आप खुशबू या सुगंध के प्रति आकर्षित होने लगती हैं. गंध सम्बन्धी प्रणाली में होने वाला ये परिवर्तन एस्ट्रोजेन हार्मोन के स्तर में होने वाले बदलाव के कारण होता है.इस दौरान कुछ महिलाओं को मुंह में धातु जैसे स्वाद का अनुभव होता है तो वहीँ कुछ को भोजन का स्वाद भी अच्छा नहीं लगता है.

5. चक्कर आना - गर्भ धारण करने के दौरान प्रेजेस्टेरॉन हार्मोन के स्तर में वृद्धि हो जाती है. इस वजह से रक्त वाहिकाएं विस्तृत होकर आपके रक्तचाप को कम करती हैं. इसके परिणामस्वरुप आपके मस्तिष्क में अस्थाई रूप से रक्त का प्रवाह कम हो जाता है और आपको चक्कर आने लगता है. हलांकि कुछ विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि इस दौरान हार्मोनल डिसफंक्शन के कारण वस्टीबुलर या कॉक्लेयर विकार की वजह से भी चक्कर आ सकता है.

6. मनोदशा में बदलाव - जाहिर है गर्भ के दौरान संवेदनशीलता में वृद्धि हो जाती है. इस वजह से आप खुद को भावुक महसूस करेंगी. आपको अपनी मनोदशा में भी बदलाव महसूस होगा. इसका कारण है कि इस दौरान होने वाले हार्मोनल परिवर्तन मस्तिष्क के रासायनिक दूत जिसे न्यूरोट्रांसमीटर कहते हैं उसे प्रभावित करते हैं. इस दौरान आपको उदासी या चिंता भी हो सकती है.

7. बार-बार पेशाब जाना - प्रेग्नेंट हो जाने के बाद आपका मूत्राशय शरीर में होने वाले अप्रत्याशित बदलावों से प्रतिक्रिया करने के परिणामस्वरूप आपको बिना किसी द्रव के सेवन के भी बाथरूम जाने की तलब लग सकती है. दरअसल इस दौरान किडनी दुगना काम करती है इसलिए रक्त की बढ़ती हुई मात्रा यहीं छन जाती है. और कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन नामक हार्मोन पेल्विक हिस्से में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है. इसलिए आपके पेशाब करने की आवृत्ति बढ़ जाती है.

8. ऐंठन महसूस होना - इस दौरान कई महिलाओं को पीरियड के डेट से कुछ दिन पहले ऐंठन जैसा महसूस होता है. ऐसा तब होता है जब फ़र्टिलाइज्ड अंडे गर्भाशय की परत को जोड़ते हैं. इसकी वजह से गर्भाशय में संकुचन होता है और इससे ही ऐंठन जैसा लगता है.

9. पेट फूलना - गर्भ के दौरान पेट का फुलना आम बात है. यह एक ऐसा लक्षण है जो स्पष्ट दीखता है. ये भी शरीर में हुए अचानक हार्मोनल परिवर्तनों का ही परिणाम है. हार्मोनल परिवर्तन से जठर तंत्र के साथ ही परे शरीर के मसल्स के उतकों को शिथिल कर देता है. इसके अलावा पाचन तन्त्र धीमा हो जाने की वजह से भी पेट में फुलाव या ब्लोटिंग होता है.

10. मासिक चक्र का रुकना - जब आप गर्भ से होती हैं तो इस दौरान फ़र्टिलाइज्ड अंडे आपके गर्भाशय की दीवार में स्वयं को स्थापित कर लेते हैं. इसलिए पीरियड के समय ब्लीडिंग रुक जाती है. या होती भी है तो बहुत कम.

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