गर्भवती महिलाओं की कब्जियत दूर करने के घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपाय

कल्याण आयुर्वेद- एक महिला के लिए गर्भ धारण करना उसके लिए सबसे खुशी का पल होता है. लेकिन इस दौरान महिलाओं को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. मॉर्निंग सिकनेस, उल्टी होना, चक्कर आना कमजोरी महसूस होना आदि के अलावे कब्जियत होना भी गर्भवती महिलाओं के लिए आम समस्या है.

गर्भवती महिलाओं की कब्जियत दूर करने के घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपाय
गर्भवती महिला को कब्ज होने पर मलावरोध रहता है. उसे खुलकर दस्त नहीं आता है. दिन में कई बार मल सूखा, अति कड़ा एवं अल्प मात्रा में आता है. जिससे वह सारे दिन आलस्य में जकड़ी रहती है. किसी भी कार्य के लिए उसका जी नहीं करता है. उसे भूख भी नहीं लगती है.

गर्भावस्था में कब्ज होने के कारण-
गर्भवती महिला को गर्भ के दबाव के कारण कब्ज होता है. यह रोग विशेष रूप से शहर की महिलाओं में ज्यादा मिलता है क्योंकि इस शहर की महिलाएं सारा दिन आराम से और मुलायम गद्दों पर पड़ी रहती हैं. यह भी देखा गया है कि जिन महिलाओं को गर्भावस्था में कब्ज रहता है. उसके बच्चे को भी कब्ज की समस्या होती है.
गर्भवती महिलाओं की कब्जियत दूर करने के घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपाय-
1 .ग्लिसरीन अथवा एरंड तेल आधा चम्मच की मात्रा में गर्म दूध के साथ मिलाकर रात को सोते समय पिलाने से सुबह दस्त साफ होता है.
2 .हिंग्वाष्टक चूर्ण या लवण भास्कर चूर्ण मट्ठा के साथ सेवन कराने से कब्ज की समस्या दूर होती है.
3 . सोठ, गुड़ अथवा हरड़ और गुड़ का सेवन कराने से गर्भवती महिला का पेट साफ रहता है.
4 .गुलकंद गुलाब 24 ग्राम और हरड़ का मुरब्बा एक नग रात्रि के समय खिलाकर ऊपर से गर्म दूध पिलाने से कब्जियत की समस्या से राहत मिलती है.
5 .छोटी हरड़ और काला नमक बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें. इस चूर्ण को 6 से 12 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ सेवन करने से 2-4 दस्त हो जाते हैं और पेट साफ हो जाता है.
6 .ईसबगोल की भूसी 12 ग्राम को जल में 24 घंटे भिगो कर रखें. इसके बाद उतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर जल या दूध के साथ सेवन कराने से दस्त साफ होता है.
7 .त्रिफला चूर्ण 36 ग्राम अजवाइन और सेंधा नमक 12-12 ग्राम इन सबको अच्छी तरह मिलाकर सुरक्षित रख लें. अब इस चूर्ण में से 3 से 12 ग्राम चूर्ण गर्म पानी के साथ खाने से पेट साफ रहता है. साथ ही गर्भवती महिला की पाचन शक्ति बढ़ती है और भूख लगती है.
स्रोत- स्त्री रोग चिकित्सा.

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