मासिक धर्म में रक्त का रंग बताता है बीमारियां, महिलाएं जरुर जानें

कल्याण आयुर्वेद- मासिक धर्म या पीरियड महिलाओं की जिंदगी का एक अभिन्न हिस्सा है जो 12 से 15 साल की उम्र से शुरू होकर 45 से 50 वर्ष की उम्र तक चलता है. हर महीने 3 से 7 दिनों तक मासिक धर्म के दौरान प्राइवेट पार्ट से रक्त स्राव होता है. इस दौरान महिलाओं मानसिक एवं शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इस दौरान पेट, कमर और पैरों में दर्द की समस्या होने के साथ ही मूड खराब रहता है. इन दिनों मासिक धर्म से निकलने वाले रक्त का रंग भी परिवर्तन देखने को मिलते हैं.

मासिक धर्म में रक्त का रंग बताता है बीमारियां, महिलाएं जरुर जानें

लेकिन क्या आपको पता है कि मासिक धर्म के दौरान होने वाले रक्त स्राव में रंग परिवर्तन भी देखने को मिलते हैं जो आपको बीमारियों का संकेत देते हैं.

जानें मासिक धर्म के दौरान रक्त स्राव के रंग से कैसे पता चलती है बीमारियां-

लाल रंग- यह ब्लड नया होता है जो कि शरीर से तुरंत निकलता है. इस तरह का रक्त काफी हल्का होता है जोकि हेवी ब्लीडिंग के साथ बिना गहराए निकलता है.

मध्यम लाल या क्रेनबेरी कलर- मासिक धर्म के लिए यह एक स्वस्थ और अच्छा रंग माना जाता है. यह मासिक धर्म के दूसरे दिन दिखाई देता है. एक्सपर्ट का कहना है कि जिन्हें लंबी पीरियड साइकिल होती है उन्हें रंग देखने को मिलता है. बाद में यह क्रेनबेरी शेड बदलकर थोड़ा डार्क हो जाता है क्योंकि एक नॉर्मल बात होती है.

ब्राउन कलर- डार्क ब्राउन रंग पुराने रक्त का प्रतीक है. यह लंबे समय तक गर्भाशय में संग्रहित था जो कि लंबे समय के बाद निकल रहा है. इस टाइप का रक्त आमतौर पर सुबह-सुबह देखने को मिलता है.

काला या ग्रे रंग- यह रंग एक घातक सूचना देता है इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ग्रे या काले रंग का रक्त यूट्रस में इंफेक्शन या मिसकैरेज का संकेत देता है. हालांकि अगर काले रंग का मासिक धर्म मासिक धर्म के चौथे दिन आए और उसमें हल्का सा लाल रंग भी मिला हुआ हो तो चिंता की कोई बात नहीं है.

नारंगी रंग- यह रंग तब देखने को मिलता है जब रक्त गर्भाशय ग्रीवा के साथ मिक्स हो जाता है. ब्राइट ऑरेंज कलर का रक्त कभी-कभी संक्रमण का भी संकेत देता है. इसलिए मासिक धर्म के दौरान लड़कियों एवं महिलाओं होने वाले रक्त स्राव पर जरूर नजर रखना चाहिए.

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