पैरों में भूलकर भी ना पहने सोने के गहने, हो सकते हैं यह नुकसान

कल्याण आयुर्वेद - आभूषण या ज्वेलरी पहनना हिंदू धर्म का अहम हिस्सा होता है. शादी हो या फिर कोई दूसरा अवसर ज्वेलरी पहनने का अपना ही अलग महत्व है. शादीशुदा महिलाएं पैरों में बिछिया और पायल पहनती हैं. आमतौर पर महिलाएं सोने के गहने पहनना पसंद करती हैं. लेकिन पैरों में आमतौर पर महिलाएं चांदी के गहने ही पहनती हैं. आज के इस पोस्ट में हम आपको पैरों में सोने के गहने पहनने के नुकसान बताएंगे.

पैरों में भूलकर भी ना पहने सोने के गहने, हो सकते हैं यह नुकसान

तो आइए जानते हैं विस्तार से -

1.सोने के आभूषण शरीर को गर्म रखते हैं. जबकि चांदी के आभूषण शरीर को शीतलता प्रदान करती है. इसलिए चांदी के आभूषण शरीर को ठंडा रखने का काम करता है. इस प्रकार कमर के ऊपर सोना और कमर से नीचे चांदी पहनने से शरीर का तापमान संतुलित रहता है. जिससे कई बीमारियों से छुटकारा मिलता है.

2.धार्मिक मान्यता अनुसार भगवान विष्णु को सोना अत्यंत प्रिय है. क्योंकि सोना लक्ष्मी जी का स्वरुप होता है. इसलिए सोने को शरीर के निचले हिस्सों में जैसे पैरों में पायल और बिछिया पहनना भगवान विष्णु सहित समस्त देवताओं का अपमान होता है.

3.ज्योतिष शास्त्र की बात करें तो पैर और टांग का जॉइंट जिसमें पायल पहनी जाती है, वह केतु का स्थान होता है. अगर केतु में शीतलता नहीं हो तो वह हमेशा नकारात्मक सोच के साथ क्लेश वाली बात ही करेगा. इसलिए सहन शक्ति बढ़ाने के लिए चांदी की पायल पहनना ज्यादा जरूरी होता है.

4.महिलाओं को यदि पैरों की हड्डियों में दर्द की समस्या है, तो उन्हें चांदी की पायल पहनी चाहिए. क्योंकि पायल पैरों में रगड़ कर हड्डी और जोड़ों के दर्द में राहत दिलाती है. इससे रक्त संचार अच्छी तरह से होता है. जिससे महिलाओं से जुड़ी कई समस्याओं में लाभ मिलता है.

5.मान्यता है कि चांदी की बिछिया पाने से महिलाओं में पीरियड नियमत रहते हैं. बिछिया पैरों में एक्यूप्रेशर का भी काम करती है. पायल में लगे घुंघरू की खनक घर में पॉजिटिव एनर्जी रहती है.

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