कोरोना के बीच सेप्सिस का बढ़ा खतरा, हार्ट अटैक और कैंसर से भी ज्यादा लोगों की जा सकती है जान, जानें लक्षण

कल्याण आयुर्वेद- कोरोना (Coronavirus) कब खत्म होगा ये कहना मुश्किल है लेकिन कोरोना जाते-जाते भी हमारे शरीर को खोखला कर रहा है. खासकर वैसे लोगों को जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता यानि इम्युनिटी कमजोर है या जो लोग पहले से ही किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं, उनके लिए खतरा अधिक है.

कोरोना के बीच सेप्सिस का बढ़ा खतरा, हार्ट अटैक और कैंसर से भी ज्यादा लोगों की जा सकती है जान, जानें लक्षण
कोरोना संक्रमित होने पर सेप्सिस का खतरा बढ़ रहा है. यह कैंसर और हार्ट अटैक से भी ज्यादा खतरनाक होने जा रहा है. इसको लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) ने भी आगाह किया है.

डराने वाले हैं आंकड़े-

डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक 2050 तक कैंसर और दिल के दौरे यानि हार्ट अटैक से भी ज्यादा सेप्सिस ( sepsis ) से लोगों की मौत होने की आशंका है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, सेप्सिस (Sepsis) इंफेक्शन के लिए एक सिंड्रोमिक रिएक्शन है और दुनियाभर में संक्रामक रोग मौत का बड़ा कारण हैं. लैंसेट जर्नल में पब्लिश एक स्टडी से पता चला है कि 2017 में दुनियाभर में 4.89 करोड़ मामले सामने आए और 1.1 करोड़ सेप्सिस ( sepsis ) से संबंधित मौतें हुईं, जो ग्लोबल डेथ नंबर्स का करीब 20 प्रतिशत है.

क्या है वजह ?

स्टडी से यह भी पता चला कि अफगानिस्तान (Afghanistan) को छोड़कर अन्य दक्षिण एशियाई देशों की तुलना में भारत में सेप्सिस ( sepsis ) से मृत्यु दर ज्यादा है. गुरुग्राम के इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिटिकल केयर एंड एनेस्थिसियोलॉजी, मेदांता - द मेडिसिटी के चेयरमैन, यतिन मेहता ने कहा, 'सेप्सिस 2050 तक कैंसर या दिल के दौरे ( हार्ट अटैक ) की तुलना में अधिक लोगों की जान ले लेगा. यह सबसे बड़ा मौत का कारण बनने जा रहा है. भारत जैसे विकासशील देशों में, एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक उपयोग के कारण शायद हाई डेथ रेट का कारण बन रहा है.

बिना जरुरत एंटीबायोटिक सेवन से बचें-

असल में डेंगू, मलेरिया, यूटीआई या यहां तक कि दस्त जैसी कई सामान्य बीमारियों के कारण भी सेप्सिस ( sepsis ) हो सकता है. डॉ मेहता स्वास्थ्य जागरूकता संस्थान - इंटीग्रेटेड हेल्थ एंड वेलबीइंग काउंसिल द्वारा हाल ही में आयोजित सेप्सिस समिट इंडिया 2021 में बोल रहे थे. इस दौरान उन्होंने कहा, एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग के अलावा, जागरूकता की कमी और तुरंत इलाज का अभाव भी खतरे की बड़ी वजह है. डॉ मेहता ने जमीनी स्तर पर सेप्सिस ( sepsis ) के बारे में जागरूकता और शिक्षा बढ़ाने का आह्वान किया. विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल में प्रगति के बावजूद, कई अस्पतालों में 50-60 प्रतिशत रोगियों को सेप्सिस और सेप्टिक शॉक होता है. इसके लिए सबसे पहले बिना जरुरत एंटीबायोटिक के सेवन से बचना चाहिए.

इन मरीजों को ज्यादा है खतरा-

भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव लव वर्मा ने कहा, 'सेप्सिस को वह मान्यता नहीं दी गई है जिसकी वह हकदार है और मौजूदा पॉलिसी जरूरत के हिसाब से काफी पीछे है. हमें ICMR, CME द्वारा रिसर्च में सेप्सिस के मामलों को चिन्हित करने की जरूरत है और इसे नीति निमार्ताओं द्वारा प्राथमिकता पर लिया जाना चाहिए.' सेप्सिस नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं में मृत्यु का प्रमुख वजह है. सेप्सिस बुजुर्गों, आईसीयू में भर्ती रोगियों, एचआईवी/एड्स, लिवर सिरोसिस, कैंसर, किडनी की बीमारी और ऑटोइम्यून बीमारियों से पीड़ित लोगों को ज्यादा प्रभावित करता है. विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान डिजीज प्रतिरोधक क्षमता के कारण होने वाली ज्यादातर मौतों में सेप्सिस की प्रमुख भूमिका रही है.

sepsis के सामान्य लक्षण-

* त्वचा मालिनीकरण.

* पेशाब कम हो जाना.

* सोचने- समझने की क्षमता में बदलाव.

* सांस लेने में परेशानी होना.

* प्लेटलेट गिनती में कमी होना.

* दिल की असामान्य कार्यप्रणाली.

* ठंड लगना.

* कमजोरी और चक्कर आना.

* शरीर में नील पड़ जाना.

* बुखार आना.

* उल्टी और घबराहट.

* मानसिक तनाव होना.

(INPUT: IANS)

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