जानें- मोतिया ( glaucoma ) होने के कारण, लक्षण और अनुवांशिक चिकित्सा

कल्याण आयुर्वेद- मोतिया को धूम दृष्टि, सब्ज मोतिया आदि कहते हैं. इसे अंग्रेजी भाषा में ग्लूकोमा कहा जाता है.

जानें- मोतिया ( glaucoma ) होने के कारण, लक्षण और अनुवांशिक चिकित्सा 

मोतिया रोग में रोगी को सफेद रोशनी के चारों तरफ इंद्रधनुष की तरह विभिन्न रंगों का गोलाकार मंडल दिखाई पड़ता है. इस की दृष्टि धुंधली हो जाती है. मामूली दर्द होता है और आंख के पटल में कठोरता आ जाती है.

मोतिया रोग होने के कारण क्या है ?

मोतिया रोग का कोई निश्चित कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है. यह प्रायः 40 से 70 वर्ष की आयु में होता है ह्रदय, गठिया बाय, पुराना कब्ज, अनिद्रा, स्नायु शूल, बेरी- बेरी रोग, मनोविकार, चिंता, शोक, एट्रोपिन का अनुचित प्रयोग, कुछ बुखार, अपर्याप्त भोजन, अजीर्ण और दूरदृष्टि या निकट दृष्टि वालों का बिना चश्मे आंखों से अधिक काम लेना तथा अच्छी गोलक छोटी होना आदि कारणों से मोतिया रोग हो जाता है. इसमें आंखों के आगे कभी कभी अंधेरा छाने जैसा या कुहासे जैसा दिखलाई देता है.

मोतिया रोग के लक्षण क्या है ?

मोतिया रोग का नया और पुराना दो भागों में बांटा गया है. नए रोग में आँखों में प्रदाह होना, आंख में खून जमा होना, असह्य दर्द होना, धीरे-धीरे दृष्टि शक्ति कम होती जाना आदि लक्षण हुआ करते हैं. रोग क्रमशः बढ़कर या बार-बार बीमारी का हमला होकर संपूर्ण रोग पैदा हो जाता है. पूर्ण रोग में आँख के गोले का पत्थर की तरह कड़ा होना, माथे में टपक का दर्द बना रहना, रोगी को रोशनी से बहुत अधिक डर मालूम होना, आंखों के सामने लाल रंग के दृश्य दिखाई देना, पूर्णतया देखने की शक्ति नष्ट हो जाना या उसका बदरंग हो जाना, चटकारा का भी बदरंग हो जाना आदि लक्षण होते हैं. पुरानी बीमारी के लक्षण नए रोग की तरह ही होते हैं लेकिन उसमे आंख में दर्द रहता है रोग के बढ़ जाने पर रोगी की दोनों आंखें नष्ट हो सकती है.

मोतिया का अनुवांशिक चिकित्सा-

पौष्टिक भोजन दें, फलाहार और शाकाहार कराएं, घी, मक्खन, मांस, मछली आदि गरिष्ठ चीजों का सेवन ना करें. सुबह भ्रमण करने अवश्य जाएं. शरीर की स्वच्छता का पूरा पूरा ध्यान रखें. कब्ज ना होने दें. रात को देर तक ना जागने दें. पढ़ाई- लिखाई तथा आंखों से काम करना बिल्कुल बंद करा दें. आंखों की जांच कराकर चश्मा दिला दें.

नोट- यह लेख शैक्षणिक उदेश्य से लिखा गया है. उपर्युक्त लक्षण मिलने पर आँख रोग विशेषज्ञ की सलाह तुरंत लें. अन्यथा आँखों की रोशनी जा सकती है. धन्यवाद.

ayurvedgyansagar.com पर पढ़ें-

जानें- बेहोशी होने के कारण, लक्षण और आपातकालीन उपचार

कमर दर्द ( कटि वेदना ) होने के कारण, लक्षण और घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपचार

श्वसनीविस्फार ( ब्रोंकाइटिस ) होने के कारण, लक्षण और घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपचार

कंपवात रोग क्या है? जाने कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपाय

वृक्क पथरी क्या है ? जाने कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपाय

प्रतिश्याय ( सर्दी ) क्यों हो जाती है ? जानें कारण, लक्षण और घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपाय

चेचक क्या है ? जाने कारण, लक्षण और घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपाय

आमाशय व्रण ( पेप्टिक अल्सर ) क्या है ? जाने कारण, लक्षण और घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपाय

उन्डूकपुच्छशोथ ( Appendicitis ) क्या है? जानें कारण, लक्षण और घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपाय

हैजा रोग क्या है ? जानें कारण, लक्षण और घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपाय

सर्दियों में सिंघाड़ा खाने के फायदे

अफारा (Flatulence ) रोग क्या है ? जाने कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपाय

जठर अत्यम्लता ( Hyperacidity ) क्या है ? जाने कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपाय

हिचकी क्या है? जाने कारण, लक्षण एवं घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय

विटामिन डी क्या है ? यह हमारे शरीर के लिए क्यों जरूरी है ? जाने प्राप्त करने के बेहतर स्रोत

सेहत के लिए वरदान है नींबू, जाने फायदे

बच्चों को मिर्गी होने के कारण, लक्षण, उपचार एवं बचाव के तरीके

हींग क्या है ? जाने इसके फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके

गठिया रोग संधिशोथ क्या है ? जाने कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपाय

पुरुषों को नियमित करना चाहिए इन चीजों का सेवन, कभी नही होगी कमजोरी की समस्या

सोना, चांदी आदि धातु से बने गहने पहनने के क्या स्वास्थ्य लाभ होते हैं? जरुर जानिए

दूध- दही नहीं खाते हैं तो शरीर में कैल्शियम की पूर्ति के लिए करें इन चीजों का सेवन

मर्दाना शक्ति बिल्कुल खत्म हो चुकी है उनके लिए अमृत समान गुणकारी है यह चूर्ण, जानें बनाने और सेवन करने की विधि

स्पर्म काउंट बढ़ाने में इस दाल का पानी है काफी फायदेमंद, जानें अन्य घरेलू उपाय

एक नहीं कई बीमारियों का रामबाण दवा है आंवला, जानें इस्तेमाल करने की विधि

रात को सोने से पहले पी लें खजूर वाला दूध, फायदे जानकर हैरान रह जाएंगे

महिला व पुरुषों में प्रजनन क्षमता बढ़ाने के कारगर घरेलू उपाय

दिल और दिमाग के लिए काफी फायदेमंद है मसूर दाल, मोटापा को भी करता है नियंत्रित

कई जटिल बीमारियों का रामबाण इलाज है फिटकरी, जानें इस्तेमाल करने के तरीके

पेट में कृमि ( कीड़ा ) होने के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपाय

पित्ताशय में पथरी होने के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपाय

 

जानें- स्वास्थ्य रक्षा की सरल विधियां क्या है ?

सारस्वतारिष्ट बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

बाजीकरण चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

अश्वगंधादि चूर्ण बनाने की विधि उपयोग एवं फायदे

शतावर्यादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

स्वादिष्ट विरेचन चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

शतपत्रादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

लवण भास्कर चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

अमृतारिष्ट बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

गंधक रसायन चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

महामंजिष्ठादि क्वाथ बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

योगराज और महायोगराज गुग्गुल बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

आयुर्वेद के अनुसार किस ऋतु में कौन सा पदार्थ खाना स्वास्थ्य के लिए हितकर होता है, जानें विस्तार से

ब्रेन ट्यूमर होने के कारण, लक्षण और घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपचार

श्रीखंड चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

ब्राह्मी चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

बिल्वादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

तालीसादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

सितोपलादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

दाड़िमपुष्प चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग और फायदे

मुंहासे दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय

सफेद बालों को काला करने के आयुर्वेदिक उपाय

गंजे सिर पर बाल उगाने के आयुर्वेदिक उपाय

कर्पूरासव बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

वासासव बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

मृगमदासव बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

द्राक्षासव बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

अर्जुनारिष्ट बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

खदिरारिष्ट बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

चंदनासव बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

महारास्नादि क्वाथ बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

रक्तगिल चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

नारसिंह चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

कामदेव चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

शकाकलादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

विदारीकंदादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

प्रद्रांतक चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

माजूफलादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

मुसल्यादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

सारिवादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

कंकोलादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

प्रवालादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

जातिफलादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

अद्रकासव बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

लोहासव बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

 

Post a Comment

0 Comments