मासिक धर्म के दौरान क्या नही करना चाहिए ?

मासिक धर्म और स्वास्थ्य-

शास्त्रकारों ने मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के लिए अनेक आदेश, उपदेश तथा निषेध बतलायें हैं. ऋतुमति महिलाओं को रहन-सहन, खान-पान आदि विषयों में विशेष सावधानी रखनी चाहिए. ऐसी महिला को अधिक परिश्रम से बचना चाहिए साथ ही उसे अपने को गर्मी एवं सर्दी की अधिकता से भी बचाना चाहिए.

मासिक धर्म के दौरान क्या नही करना चाहिए ?

शास्त्रकारों ने मासिक धर्म के दौरान स्न्नान का भी निषेध किया है. यह भी बताया है कि उसे अधिक भारी चीज नहीं उठानी चाहिए. जिस महिला या लड़की को मासिक धर्म हुआ है उसे अलग रखने का आदेश है. प्राचीन काल में लोगों को विश्वास था कि अधिक खून निकलने से महिला को कोई भी विपत्ति या उत्सर्ग लग सकता है. इसलिए उसे 3 दिन तक विश्राम एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से अपवित्र माना जाता था.

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान उपर्युक्त अधिकार तथ्यहीन विचारों एवं निर्देशों को निर्मूल सिद्ध कर दिया है. उनके अनुसार मासिक धर्म एक नितांत प्राकृतिक क्रिया है. जब तक महिला को तीव्र वेदना अथवा अधिक रक्तस्राव ना हो उसे अपने दैनिक कार्य भली-भांति करते रहना चाहिए. उसे व्यायाम एवं आसन आदि भी करते रहना चाहिए. साथ ही श्रोनिस्थ अंगों में अधिरक्तता हटाने के लिए हल्का विरेचन देना चाहिए. महिला को प्रतिदिन स्नान करने के पश्चात कपड़े पहनने चाहिए. महिला को आर्तव स्राव समय सैनिटरी पैड बांधे रखना चाहिए. मैंले कपड़े कभी भी इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए. पैड भींगने पर बदलते रहना चाहिए. यदि उन्हें समय से नहीं बदला गया तो महिला की योनि से बहुत ही दुर्गंध आने लगता है. योनि के अंदर कोई कपड़ा नहीं रखनी चाहिए. इससे एक तो गंदगी का विस्तार होता है और दूसरी कुमारी लड़कियों की झिल्ली के प्रवेश से फट जाती है. यदि किसी कारणवश पैड का व्यवहार संभाव न हो तो कम से कम स्वच्छ मुलायम कपड़े को गर्म पानी में उबालकर एवं सुखाकर प्रयोग में लाना चाहिए.

नोट- जिस समय मासिक स्राव चलता रहता है उस समय गर्भाशय में किसी उपसर्ग यानी इंफेक्शन के प्रवेश होने की संभावना नहीं रहती है इसीलिए आर्तव स्राव के साथ अधिक संख्या में रक्त के श्वेत कणोंका भी उत्सर्जन आर्तव रक्त में होता रहता है.

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