अगर आपका भी बच्चा अधिक जमीन पर खेलता है तो हो सकता है इस गंभीर बीमारी का शिकार, जाने लक्षण

हेल्थ डेस्क- अक्सर छोटे बच्चे जमीन पर खेलना पसंद करते हैं. लेकिन विज्ञान की माने तो जमीन पर खेलना बच्चों के लिए नुकसानदायक से हो सकता है. इस उन्हें स्कार्लेट फीवर की बीमारी भी हो सकती है.

अगर आपका भी बच्चा अधिक जमीन पर खेलता है तो हो सकता है इस गंभीर बीमारी का शिकार, जाने लक्षण

चलिए जानते हैं विस्तार से-

स्कार्लेट फीवर को तरुण ज्वर, आरक्त ज्वर, लोहित ज्वर, लाल बुखार इत्यादि नामों से जाना जाता है. यह एक तीव्र संक्रामक रोग है. जिसमें बुखार, सिर दर्द, उल्टी तथा प्ररूपि विस्फोट आदि लक्षण मिलते हैं.

स्कार्लेट फीवर होने के कारण-

रक्तसंलायी स्ट्रैप्टॉकोकाई रोग का प्रमुख कारण है, नाक और कान के आश्रय भी इसके संक्रमण के कारण है.

5 से 10 वर्ष के बालकों में यह बुखार अधिक होता है. यह उन बालकों में ज्यादा होता है जो जमीन पर अधिक खेला करते हैं.

सामान्यतः संक्रमण बिंदुक- संक्रमण के द्वारा फैलता है. संक्रमित दूध या आइसक्रीम के द्वारा भी यह फैलता है. यह बुखार1 से 3 दिनों तक का होता है.

स्कार्लेट फीवर के लक्षण-

* रोग का आक्रमण अचानक होता है. इसके साथ सिर दर्द, उल्टी तथा गलशोथ भी हो जाता है.

* शरीर का तापक्रम 38 डिग्री सेंटीग्रेड से 40 डिग्री सेंटीग्रेड यानी 100 से 104 डिग्री फारेनहाइट तक हो जाता है.

* प्रायः गले की ग्रंथियां तालू तथा गला आदि लाल होकर प्रभावित हो जाते हैं.

* जीभ सुखी तथा मल से आवृत रहती है.

* नाड़ी की गति अधिक तीव्र होती है.

* 24 से 48 घंटे के बाद गर्दन, कंधों तथा वक्ष के ऊपरी भाग के आसपास विस्फोट निकल आते हैं और यह तेजी से धड़ तथा अन्य शाखाओं में फैल जाते हैं. मुंह के आसपास विस्फोट नहीं होते हैं.

* Circumoral pallor इस रोग का एक विशिष्ट लक्षण है और गला बिलकुल लाल तथा रक्ताधिक्य दिखलाई पड़ने लगता है.

* कुछ समय के बाद टॉन्सिल तथा आसपास की श्लेष्मकला की सतह पर पीले पूयदार बिंदु दिखाई देने लगते हैं. आसपास की ग्रीवा ग्रंथियां बढ़ जाती है और उन में दर्द होने लगती है. कभी-कभी उनमें पीप भी आता है.

* मुंह से दुर्गंध आने लगती है और किसी- किसी रोगी के कान तथा नाक से पूय ( पीप ) भी बहने लगता है.

* नाड़ी की गति शरीर के ताप की अपेक्षा अधिक तीव्र होती है.

* लगभग 1 सप्ताह बाद विस्फोट गायब हो जाते हैं और त्वचा पर भूसी सी दिखाई देने लगती है और यह सिलसिला 10 दिन से लेकर 6 सप्ताह तक जारी रहता है. चेहरे और शरीर से सूक्ष्म पपड़ियाँ गिरती है और हाथ- पाँव की त्वचा बड़े-बड़े चकतों के रूप में फट जाती है.

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