इस बीमारी के कारण हो सकता है पीरियड्स में बहुत ज्यादा दर्द, मां बनने में भी आती है बाधा

कल्याण आयुर्वेद - महिलाओं को पीरियड के दौरान दर्द होना आम बात है. लेकिन अगर आपका यह दर्द काफी ज्यादा है, तो आपको एंडोमेट्रियोसिस नामक समस्या हो सकती है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह बीमारी महिलाओं के लिए बहुत तकलीफ देह होती है. या ना केवल तकलीफ देती है, बल्कि सोशल लाइफ रिलेशन पर असर डालती है. ऐसे में यदि शुरुआती चरण में ही इनका इलाज करा लिया जाए, तो गंभीर बीमारी होने से बचा जा सकता है. वरना यह आगे चलकर महिलाओं में बांझपन का कारण बन सकता है.

इस बीमारी के कारण हो सकता है पीरियड्स में बहुत ज्यादा दर्द, मां बनने में भी आती है बाधा

एंडोमेट्रियोसिस किसे कहते हैं -

देश की प्रतिष्ठित चिकित्सक और पद्मश्री से सम्मानित डॉ अलका कृपलानी ने बताया कि जागरूकता के अभाव में एंडोमेट्रियोसिस से परेशान महिलाओं की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है. सामान्यतः 25 से 30 साल की उम्र की महिलाओं में पेट में दर्द की शिकायत होती है. कुछ लोग इसको गंभीरता से नहीं लेते हैं. लिहाजा यह एक बड़ी परेशानी बन कर सामने आती है. जब भी महिला को पीरियड होते हैं, तो शरीर के अंदर कल की तरफ भी ब्लडिंग होती है. इस तरह ओवरी के अंदर ब्लड जम जाता है और इसे एंडोमेट्रियोटिक सिस्ट कहते हैं. इसी समस्या को एंडोमेट्रियोसिस कहा जाता है. 

एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण -

यह शरीर को तोड़ने वाली बीमारी है. पीरियड के दौरान बहुत ज्यादा दर्द होना इसका मुख्य लक्षण है. पीरियड में इतना दर्द होता है कि यह पेन किलर के बावजूद भी नहीं जाता है. इस बीमारी के लक्षणों के बारे में डॉक्टर ने बताया कि यदि शुरू में ही यह परेशानी महसूस होने पर डॉक्टर को दिखाया जाए, तो इस परेशानी से जल्द छुटकारा पाया जा सकता है. इसके प्रमुख लक्षणों में मासिक धर्म के दौरान महावारी के 1 या 2 हफ्ते के आसपास ऐसा महसूस होना, माहवारी के बीच में ब्लीडिंग कमर के निचले हिस्से में दर्द होना आदि शामिल हैं.

महिलाओं में इनफर्टिलिटी का कारण बन सकती है यह बीमारी -

एंडोमेट्रियोसिस की वजह से यूट्रस डैमेज हो जाती है. इसलिए नतीजन जगदीयहश गंभीर बीमारी होकर इनफर्टिलिटी का कारण बन सकती है. अगर हालत ज्यादा बिगड़ जाए तो इसकी वजह से पेल्विस आर्गन को नुकसान पहुंच सकता है और गर्भधारण करने में भी बहुत सारी दिक्कतें हो सकती हैं. अल्ट्रासाउंड और m.r.i. से इसका पता लगाया जा सकता है. वहीं इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए महिलाओं को अल्कोहल, कैफीन, तनाव, जंक फूड से जुड़ी चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए और ओमेगा 3 फैटी एसिड, ताजे फल और सब्जियां, नियमित एक्सरसाइज और योगा को अपनाना चाहिए.

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