रोजाना पीते हैं यह पसंदीदा ड्रिंक, तो जा सकती है आंखों की रोशनी

कल्याण आयुर्वेद - कुछ लोगों को कॉफ़ी पसंद होती है, तो कुछ लोगों को चाय जूस या कोई दुसरे कोल्ड्रिंक पसंद होती है, आपको बता दें कई ऐसे लिक्विड पदार्थ से अच्छे माने जाते हैं और कई अच्छी नहीं माने जाते हैं. सबसे अधिक लोगों को कॉफी पीना पसंद होता है. इसलिए लोग दिन की शुरुआत एक कप स्ट्रांग कॉफी से करना पसंद करते हैं. इंडिया समेत दुनियाभर में कॉफी की काफी डिमांड होती है. एक कप कॉफी पीने के बाद शरीर में ताजगी आ जाती है. कई लोग दिन की शुरुआत एक कप स्ट्रांग कॉफी सेवन करना पसंद करते हैं, तो कुछ लोग दिन में कई बार कॉफी पी लेते हैं. टेस्टी और हेल्दी कॉफी पीने से शरीर में एनर्जी आ जाती है अच्छा महसूस होता है.

रोजाना पीते हैं यह पसंदीदा ड्रिंक, तो जा सकती है आंखों की रोशनी

कॉफी दुनिया की सबसे फेमस ड्रिंक में से एक है. रिसर्च के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2022 के दौरान पूरे भारत में कॉफी की खपत 12ml थी यह पिछले वर्ष की तुलना में अधिक थी 2021 में वैश्विक कॉपी की खपत लगभग 165 ml 7 थी. जिसमें यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका में सबसे अधिक मात्रा में कॉफी की खपत हुई थी. रिसर्च के मुताबिक, कॉफी के सेवन से कुछ गंभीर बीमारियां जैसे डायबिटीज और कैंसर में मदद मिल सकती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कॉफी पीने से आंखों की रोशनी भी जा सकती है.

ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है -

रिपोर्ट के मुताबिक, अधिक कॉफी पीने से ग्लूकोमा यानी मोतियाबिंद हो सकता है. यह सामान्य आंख की स्थिति है लेकिन अगर इसका जल्दी इलाज नहीं किया गया तो आंखों से दिखना बंद हो जाता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि कॉपी में काफी मात्रा में कैफीन पाया जाता है. इसलिए दिन में एक या दो बार से ज्यादा कॉफी नहीं पीना चाहिए. अगर कोई प्रतिदिन निश्चित मात्रा से अधिक कॉफी का नियमित सेवन करता है तो उस पर मोतियाबिंद होने का खतरा बढ़ जाता है.

दरअसल कैफीन युक्त ड्रिंक से ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है जिससे आंखों में दबाव भी बढ़ जाता है. वहीं अगर किसी को आंखों में लगातार दबाव पड़ता है, तो मोतियाबिंद हो सकता है. मोतियाबिंद दुनिया में सबसे अधिक अंधेपन का कारण माना जाता है. एक रिसर्च के मुताबिक, तीन या अधिक कप कॉफी पीने से एक्सफोलिएशन ग्लूकोमा का जोखिम बढ़ गया था. मोतियाबिंद का होता है जब शरीर में लिक्विड का निर्माण होता है और उसे आंखें आशिक नसों पर दबाव पड़ती है लेकिन यह जरूरी नहीं कि कॉफी पीने से मोतियाबिंद होगा.

रिसर्च में शामिल लोगों को ग्लूकोमा की फैमिली हिस्ट्री थी जो कि भविष्य में मोतियाबिंद होने के जोखिम को बढ़ा देता है. अगर कोई व्यक्ति कभी कबार अधिक कॉफी पीता यानी हफ्ते में एक दिन तो उसे इस रिसर्च में शामिल नहीं किया गया था, जो लोग हर दिन 3 या उससे अधिक कॉफी कॉफी पीते हैं, उन्हें शामिल किया गया था.

कितनी कॉपी पीनी चाहिए कॉफी में कैफीन की मात्रा अलग अलग हो सकती है. यानी कि कभी एक कप कॉफी में 50mg सफलता कभी 400mg कैंसिल हो सकता है सामान्य कॉफी के कप में औसतन 100 एमजी किस दिन होता है.

कई विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि 1 दिन में लगभग 400 मिलीग्राम कैफीन यानी लगभग चार कब के बराबर होता है. मीडियम मात्रा में कैफीन दिलाना केवल आपकी आंखों के लिए अच्छा होता है. बल्कि यह कई बीमारियों के जोखिम को भी कम करता है. कच्चे कोफ़ी बिन्स में क्लोरोजेनिक एसिड पाया जाता है, जो काफी अच्छा एंटी ऑक्सीडेंट होता है तो ब्लड प्रेशर को कम करने और ब्लड सरकुलेशन को कम करने में मदद करता है.

धीरे-धीरे होता है मोतियाबिंद -

ग्लूकोमा आमतौर पर एक ऐसी स्थिति है जो ब्रिज और व्यस्त हूं को प्रभावित कर सकता है. यह काफी धीरे-धीरे सालों में विकसित होता है पहले आखिरी रोशनी धुंधली होती है और फिर उसके बाद उसके अन्य लक्षण नजर आते हैं. इस कारण लंबे समय तक काफी सारे लोगों को पता नहीं चलता है कि उन्हें ग्लूकोमा है. अगर कोई नियमित आंख की जाँच करवाता है तो इसे इस बात का पता चल जाता है.

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