जानिए ! बच्चे के लिए क्यों वरदान माना जाता है मां का दूध ? कितने दिनों तक ब्रेस्टफीडिंग है जरूरी

कल्याण आयुर्वेद - बच्चे और मां का रिश्ता बाकी सभी दोस्तों से ऊपर माना जाता है. बच्चे के पैदा होने के बाद कुछ समय तक उन्हें मां का दूध ही पिलाया जाता है. डॉक्टर की सलाह देते हैं कि पहले कुछ महीने तक इसके अलावा उन्हें कुछ और ना पिलाया जाए, बच्चे के लिए मां का दूध की से अमृत से कम नहीं होता है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि मां का दूध बच्चे के लिए जरूरी क्यों होता है और अगर स्तनपान न कराया जाए, तो इससे बच्चे की ग्रोथ पर कितना असर पड़ता है आइए इसके बारे में सभी बातें जानते हैं.

जानिए ! बच्चे के लिए क्यों वरदान माना जाता है मां का दूध ? कितने दिनों तक ब्रेस्टफीडिंग है जरूरी 

ब्रेस्ट फीडिंग कराने के फायदे -

ब्रेस्ट फीडिंग कराने से बच्चे की हेल्थ अच्छी रहती है. मां के दूध में वह सभी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो बच्चों की ग्रोथ के लिए जरूरी होता है. इसके अलावा स्तनपान करने से बचे की प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है. गर्भ के अंदर का वातावरण बच्चे के लिए बहुत सिर्फ रहता है पर जन्म लेने के बाद बच्चा बाहर के वातावरण में मौजूद वायरस और बैक्टीरिया से लड़ सके, इसके लिए मां का दूध उसकी इम्यूनिटी बढ़ाने का काम करता है.

देता है सुरक्षा का एहसास -

बच्चा गर्भ से बाहर आने के बाद सबसे ज्यादा अपनी मां के साथ सुरक्षित महसूस करता है. ऐसा होने में इतना पान का एक जरूरी है रोल होता है, यह इसलिए होता है क्योंकि मां की गोद में स्तनपान करते वक्त बच्चा सबसे ज्यादा सुरक्षित महसूस करता है. ब्रेस्ट फीडिंग के कारण मां और बच्चे का एक इमोशनल बॉन्ड जुड़ जाता है, इसी वजह से मां का लगाओ बच्चे से सबसे ज्यादा होता है.

कितने समय तक करानी चाहिए ब्रेस्टफीडिंग -

बच्चे को कम से कम 6 महीने तक स्तनपान कराना चाहिए. डॉक्टर भी बच्चे को कम से कम 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध पिलाने की सलाह देते हैं.

मां के लिए स्तनपान कराने के फायदे -

1.घाव का जल्दी भरना -

जब मां बच्चे को जन्म देती है तो उनके शरीर में कोई घाव और दर्द बना रहता है. लेकिन स्तनपान कराने की वजह से यह दर्द और घाव जल्दी से भर जाते हैं.

2.मां और बच्चे के बीच बेहतर संबंध -

मां और बच्चे के बीच स्तनपान बेहतर संबंध बनाता है और रिश्ते भी मजबूत करता है.

3.वजन का नियंत्रण में रहना -

प्रेग्नेंसी के समय अक्सर महिलाओं का वजन बढ़ने लगता है, लेकिन स्तनपान कराने की वजह से कैलोरी कम होती है, जिससे बढ़ते वजन को नियंत्रित करने में बहुत मदद मिलती है.

4.हार्मोन को संतुलित होना -

स्तनपान कराने की वजह से मां के हार्मोन संतुलित रहते हैं, जिसके कारण मां को अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है. साथ ही कील मुंहासे होने की संभावना भी कम हो जाती है.

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