सावधान ! दिन में सोने की आदत को कहें बाय, वरना छिन जाएगी आंखों की रोशनी

कल्याण आयुर्वेद - कहते हैं सोने के लिए रात बनी है और काम करने के लिए दिन रात में. अगर आप 6 से 8 घंटे की नींद लेते हैं, तो यह आपकी सेहत के लिए पर्याप्त होता है. साथ ही सुबह उठकर आप फ्रेश महसूस करते हैं लेकिन कुछ लोगों के दिल में सोने की आदत होती है. कई बार रात में नींद पूरी न होने की वजह से लोगों को दिन में सुस्ती महसूस होती है और वह सो जाते हैं.

सावधान ! दिन में सोने की आदत को कहें बाय, वरना छिन जाएगी आंखों की रोशनी

आपको बता दें कि दिन में सोने की आदत आपकी आंखों की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. अगर आप दिन में सोते हैं तो इससे आंखों पर बुरा असर पड़ता है. इसका खुलासा एक शोध में हुआ है. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह स्थिति ज्यादा गंभीर हो तो समस्या अंधेपन तक पहुंच सकती है. आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से.

दिन में सोना क्यों है खतरनाक -

एक रिपोर्ट के मुताबिक, जो लोग रात में पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं और दिन में सोते समय खर्राटे लेते हैं, उनकी इस आदत से ग्लूकोमा यानी काला मोतियाबिंद होने का खतरा बढ़ जाता है. इस बीमारी का सही समय पर इलाज न हो तो स्थिति काफी गंभीर हो सकती है. जिससे दृष्टिहीनता यानी अंधे होने का खतरा बना रहता है. वहीं एक रिसर्च के अनुसार, व्यक्ति की आंखों की रोशनी चली जाए तो दोबारा नहीं होती है. शोधकर्ताओं ने बताया कि रात में पूरी नींद लेने की स्थिति में किसी भी उम्र के लोगों को भी समस्या हो सकती है. बुजुर्गों और धूम्रपान करने वालों में भी हो सकती है.

शोध में खुलासा -

स्टडी के अनुसार, 40 से 69 साल के बीच की उम्र वाले करीब 400000 से अधिक लोगों के डाइट पर आंकलन हुआ. इस स्टडी में शामिल सभी लोगों की नींद की आदतों के बारे में पूछा गया. जिसमें पाया गया कि 8690 लोगों को ग्लूकोमा की शिकायत है. ऐसे में शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग रात में भरपूर नींद नहीं लेते हैं और दिन के वक्त होते हैं. उनमें ग्लूकोमा का खतरा 11% तक बढ़ जाता है. इतना ही नहीं दिन में सोने की आप की यह हरकत आप को इस बीमारी का शिकार बना सकती है. जिससे आपकी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए खराब हो सकती है. ऐसे में आपको दिन में सोने से बचना चाहिए. बेहतर है कि आप रात को भरपूर नींद लें.

जाने एक्सपर्ट की राय -

एक्सपर्ट का कहना है, कि अगर आप अच्छी नींद नहीं सोते हैं, तो इससे हमारे निर्णय लेने की क्षमता सीखने की क्षमता हमारे व्यवहार और स्वभाव और हमारी याददाश्त पर बहुत बुरा असर पड़ता है. दरअसल ग्लूकोमा आंख से दिमाग को जोड़ने वाली ऑप्टिक तंत्रिका को बहुत ज्यादा प्रभावित करने लगता है. जिस वजह से आंखों के संवेदनशील कोशिकाओं का क्षरण होने लगता है. इसलिए डेली सोने की आदत को सुधारो और रात के लिए अच्छी तरीके से पूरी करें. एक्सपर्ट का मानना है कि समय पर इलाज ना मिलने की वजह से आंखों की रोशनी हमेशा के जा सकती है. ऐसे में कोशिश करें कि आप इस समस्या से बचे रहें.

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