बच्चे की सेहत के लिए सुबह दूध की जगह दें दलिया, मिलेंगे जबरदस्त फायदे

कल्याण आयुर्वेद - मेरा बच्चा ठीक से खाना नहीं खाता या उसे भूख नहीं लगती ? यह शिकायत लगभग 90% माताओं की है. वहीं ज्यादातर माता और बच्चे के टिफिन में चिज, पिज़्ज़ा, टॉफ़ी, बिस्कुट आदि रख देती है. ताकि यह बच्चों को पसंद है और यह इसी बहाने इसका सेवन करें. बहुत हुआ तो बच्चे को सुबह एक गिलास दूध पिलाकर स्कूल भेज देती है. ज्यादातर बच्चे पौष्टिक भोजन करने में आनाकानी करते हैं, उन्हें बाहर का और फ़ास्टफ़ूड भी ज्यादा पसंद आता है. परंतु हम यह बात जानते हैं, कि यह हमारी सेहत के लिए बिल्कुल भी अच्छी नहीं होती है. उसी तरह बच्चों की सेहत के लिए भी यह चीज हानिकारक होती है. ऐसे में आज के इस पोस्ट में हम आपको बच्चों की सेहत से जुड़ी जानकारी देने जा रहे हैं.

बच्चे की सेहत के लिए सुबह दूध की जगह दें दलिया, मिलेंगे जबरदस्त फायदे

तो आइये जानते हैं विस्तार से

बाल रोग विशेषज्ञ की एक डॉक्टर ने यह बताया, कि दूध पीने के बाद बच्चा स्कूल में 3 से 4 घंटे तक बैठा रहता है. इस दौरान वह कुछ नहीं खाता है, तो दूध गैस बना देती है. आगे चलकर बच्चे को कब्ज जैसी पेट से संबंधित दूसरी बीमारियों की संभावना भी काफी बढ़ जाती है. तमाम माताएं बच्चे की केला खिलाकर स्कूल भेज देती है. इससे बच्चे का पेट खराब होने का खतरा बना रहता है बच्चों को सुबह दूध पिलाने से बचना चाहिए इसके साथ आप को केला भी खिलाने से बचना चाहिए. इसकी जगह पर आप दलिया खिला सकते हैं. यह सबसे अच्छा नाश्ता माना जाता है. क्योंकि इसमें दूध चीनी और अनाज तीनों वस्तुएं मिल जाती है, जो सेहत के लिए अच्छी रहेगी और खाने में भी स्वादिष्ट लगेंगे.

बच्चा सेल निगले तो शहद पिलाएं -

बच्चों के आस पास कभी भी छोटी चीज नहीं रखनी चाहिए. सबसे ज्यादा खतरनाक बैटरी का सेल होता है. घड़ी केलकुलेटर राधिका फेल बच्चे निकल लेते हैं. पीजीआई की ओपीडी में 1 महीने में 4 से 5 बच्चे के ऐसे मामले आ रहे हैं, उन्होंने बताया कि समय पर बच्चे के शरीर से तेल नहीं निकाला गया, तो वह आहार नाल को नुकसान पहुंचा देता है. इसका अलका इन केमिकल खाने की नली को जला देता है. इसके प्रभाव को रोकने के लिए 10 से 20 मिनट पर 10ml शहद पिलाएं.

इलाज में ना करें देरी -

बाल रोग विशेषज्ञ ने कहा कि यदि नवजात तेज तेज सांस ले रहा है, शरीर नीला पड़ रहा है और बच्चे का वजन नहीं बढ़ रहा है, इतना ही नहीं अगर वह दूध नहीं पीता और उसे बार-बार निमोनिया की समस्या हो रही है, तो यह दिल की बीमारी का खतरा हो सकता है. समय पर इलाज न होने से बच्चे को बचाना भी मुश्किल हो जाता है. जन्म के 1 साल के अंदर उसका इलाज का ऑपरेशन हो जाता है, तो बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है.

तीनों तकनीक से ऑपरेशन में मरीज को अस्पताल में कम दिन गुजारने पड़ते हैं. खून का रिसाव कम हो जाता है. संक्रमण का खतरा भी नहीं होता है. ऑपरेशन का दर्द भी मरीज को सहला रहे बढ़ता है. इसलिए समय पर इलाज कराएं.

बदलती जीवनशैली में काम करने का तरीका बदल गया है. पहले लोग दिन में काम करते थे, अब देर रात तक काम कर रहे हैं. देर रात खाना खाते हैं. नतीजतन खाने को पचाने का वक्त बिलकुल नहीं मिल पाता है. पेट से संबंधित दूसरी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है. यह जानकारी इंडियन सोसायटी ऑफ क्रोनो मेडिसिन के जनरल सेक्रेटरी ने दी शनिवार को वह केजीएमयू में पत्रकारों से जानकारी साझा कर रहे थे. उन्होंने बताया कि देर रात तक जागने और उसके बाद भोजन करने पर डायबिटीज ब्लड प्रेशर मोटापा और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. इसलिए जरूरी है कि आप रात को जल्दी खाना खाकर जल्दी सो जाए, भरपूर नींद लेना और सही समय पर खाना खाना बहुत जरूरी होता है वरना कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

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