एड्स क्या है ? कैसे फैलता है ? जानिए इससे बचाव के तरीके

कल्याण आयुर्वेद - एड्स का मतलब उपार्जित प्रतिरक्षी अपूर्णता शहर लक्षण है. एड्स एचआईवी मानवीय प्रतिरक्षी अपूर्णता विषाणु से होता है, जो कि मानव की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है. एचआईवी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर आक्रमण करता है. जिसका काम सहयोग को संक्रामक बीमारियों जो कि जीवाणु और विषाणु से होती है. उस पर बचाना होता है. एचआईवी रक्त में उपस्थित प्रतिरोधी पदार्थ लसीका को शो पर हमला करता है. यह पदार्थ मानव को जीवाणु और विषाणु जनित बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. और शरीर की रक्षा करते हैं जब एचआईवी द्वारा आक्रमण करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है, तो इस सुरक्षा कवच के बिना एड्स पीड़ित लोग भयानक बीमारियों से क्षय रोग और कैंसर आदि से पीड़ित हो जाते हैं और शरीर को कई अवसरवादी संक्रमण यानी आम सर्दी जुकाम फुफ्फुस प्रदा इत्यादि घेर लेते हैं. जब से और कर्करग शरीर को घेर लेते हैं, तो उनका इलाज करना कठिन हो जाता है और मरीज की मृत्यु भी हो सकती है.

एड्स क्या है ? कैसे फैलता है ? जानिए इससे बचाव के तरीके

एड्स कैसे फैलता है -

अगर एक सामान्य व्यक्ति एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के वीर्य, योनि स्राव या रक्त के संपर्क में आता है, तो उसे एड्स की समस्या हो सकती है. आमतौर पर एचआईवी पॉजिटिव होने को एड्स से समझ लेते हैं, जो कि गलत है. बल्कि एचआईवी पॉजिटिव होने के 8 से 10 साल के अंदर जब संक्रमित व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है. तब उसे घातक रोग हो जाते हैं और इस स्थिति को एड्स कहा जाता है. ज्यादा संचार माध्यमों से होता है.

पीड़ित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध स्थापित करने से,

दूषित रक्त से,

संक्रमित सुई के इस्तेमाल से,

एड्स से संक्रमित मां से उसकी होने वाली संतान को,

एड्स के लक्षण क्या है -

एचआईवी से संक्रमित लोगों में लंबे समय तक एड्स के कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं. लंबे समय तक एचआईवी का भी औषधिक परीक्षण से पता नहीं लग पाता है. अधिकतर एड्स के मरीजों को सर्दी जुकाम या विषाणु बुखार हो जाता है. पर इसे एड्स होने का पता नहीं लगाया जा सकता. एचाईवी का संक्रमण होने के बाद उसका शरीर में धीरे-धीरे फैलना शुरू हो जाता है. जब वायरस का संक्रमण शरीर में अधिक हो जाता है, तब उस समय बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं. एड्स के लक्षण दिखने में 8 से 10 साल भी लग सकता है. ऐसे व्यक्ति को जिसके शरीर में एचआईवी वायरस पर एड्स के लक्षण प्रकट हुए हो एचआईवी पॉजिटिव कहा जाता है. ऐसा व्यक्ति भी खिला सकते हैं इसके कुछ प्रारंभिक लक्षण है.

वजन का काफी हद तक कम हो जाना, 

लगातार खांसी बने रहना, 

बार बार जुकाम का होना 

बुखार, सिर दर्द, थकान, 

शरीर पर निशान बनना, 

हैजा, 

भोजन में अरुचि, 

लसिका में सूजन

ध्यान रहे कि ऊपर दिए गए लक्ष्य अन्य सामान्य रोगों के भी हो सकते हैं. अतः एड्स की निश्चित रूप से पहचान केवल और केवल चिकित्सीय परीक्षण से ही की जा सकती है और करनी भी चाहिए. एचआईवी की उपस्थिति का पता लगाने हेतु मुख्यतः एंजाइम लिंक्ड इम्युनोएब्जॉर्बेंट एसेस यानी एलिसा टेस्ट किया जाता है.

एड्स के बारे में फैली हुई भ्रांतियां -

बहुत सारे लोग समझते हैं कि एड्स से पीड़ित व्यक्ति के साथ खाने-पीने उठने बैठने से ही हो जाता है, जो कि गलत है. यह समाज में एड्स के बारे में फैली हुई कुछ भ्रांतियां हैं, सच तो यह है कि रोजमर्रा के सामाजिक संपर्क में एचआईवी नहीं फैलता जैसे कि -

पीड़ित के साथ खाने पीने से, बर्तनों की साझेदारी से, हाथ मिलाने या गले मिलने से, एक ही टॉयलेट का इस्तेमाल करने से, मच्छर या अन्य कीड़ों के काटने से, पशुओं के काटने से, खांसी या छींक से.

एड्स का उपचार क्या है -

एड्स के उपचार में एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी दवाइयों का उपयोग किया जाता है. इन दवाइयों का मुख्य उद्देश्य एचआईवी के प्रभाव को कम करना शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना और अवसरवादी रोगों को ठीक करना होता है. समय के साथ-साथ वैज्ञानिक एड्स की नई-नई दवाइयों को खोज रहे हैं. लेकिन सच कहा जाए तो इससे बचाओ ही ऐड का बेहतर इलाज है.

एड्स से बचाव कैसे करें -

1.एड्स से बचाव के लिए सामान्य व्यक्ति को एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के वीर्य योनि स्राव अथवा रक्त के संपर्क में आने से बचना चाहिए. साथ ही साथ एड्स से बचाव के लिए निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए.

2.पीड़ित साथिया व्यक्ति के साथ यौन संबंध स्थापित नहीं करना चाहिए. अगर कह रहे हो तो सावधानीपूर्वक कंडोम का प्रयोग करना चाहिए. लेकिन कंडोम इस्तेमाल करने में भी कंडोम के फटने का खतरा रहता है और अपने जीवनसाथी के प्रति वफादार रहें. एक से अधिक व्यक्ति से यौन संबंध न रखें.

3.खून को अच्छी तरह जांच करने के बाद ही उसे चढ़ाना चाहिए. कई बार बिना जांच के खून मरीज को चढ़ा दिया जाता है जो कि गलत है. इसलिए डॉक्टर को खून चढ़ाने से पहले पता करना चाहिए, कि खून एचआईवी दूषित तो नहीं है.

4.उपयोग की हुई सूर्य या इंजेक्शन का प्रयोग नहीं करना चाहिए. क्योंकि यह एचआईवी संक्रमित हो सकते हैं.

5.दाढ़ी बनाते समय हमेशा ना इसे नया ब्लड उपयोग करने के लिए कहना चाहिए.

6.एड्स से जुड़ी हुई भ्रांतियों पर ध्यान नहीं देना चाहिए.

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